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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: सोमवार, 12 सितंबर 2011

आत्म-अनुशासन : इच्छा-शक्ति

(Original Post : Self-Discipline : Will Power June 7, 2005 by Steve Pavlina)  
एक सफल व्यक्ति और दूसरे लोगों के बीच फर्क, शक्ति की कमी या अज्ञानता का नहीं है बल्कि इरादे का है 
– विंस लोम्बार्डी  
इच्छा-शक्ति - इन दिनों कितना मैला-कुचैला सा शब्द है| आप कितने ही ऐसे विज्ञापन देख चुकें हैं जोकि अपने उत्पाद(Product) को इच्छा-शक्ति के विकल्प के तौर पर स्थापित करने कर प्रयास करते हैं| उनकी शुरुआत ही आपको यह बताने से होती है कि इच्छा-शक्ति बेकार की चीज है और फिर वे आपको कोई उत्पाद बेचने का पर्यास करते हैं जो कि ‘फ़ौरन और आसानी से’ (fast and easy) काम करता है| जैसे कि वजन घटाने की दवाएं या कुछ अजीब से दिखने वाले व्यायाम उपकरण (exercise equipment)| अक्सर वे, थोड़े ही समय में नामुमकिन से परिणामों की गारंटी भी दे डालते हैं-और यह उनके लिए तो एक जीती हुई बाजी ही है क्योंकि जिन लोगों में इच्छा-शक्ति की कमी है वे इन बेकार के उत्पादों को वापिस करने के लिए समय ही नहीं निकाल पाएंगे|

लेकिन जानते हैं, मजे की बात क्या है?..........इच्छा-शक्ति वाकई में काम करती है| लेकिन इसका पूरा लाभ उठाने के लिए आपको यह सीखना होगा कि यह क्या कर सकती है और क्या नहीं? जो लोग यह कहते हैं कि इच्छा-शक्ति काम नहीं करती, वे इसे, ऐसे तरीके से इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं जोकि इसकी क्षमता से बाहर है|   

इच्छा-शक्ति क्या है?
इच्छा-शक्ति आपको वह क़ाबलियत देती है जिसमें आप एक कार्य-विधि(course of action) तय करते हैं और खुद से कहते हैं - “आक्रमण”

इच्छा-शक्ति, एक बेहद शक्तिशाली परन्तु अस्थायी बल प्रदान करती है| इसे एक बार में जलने वाले रॉकेट की तरह समझिए| यह बड़ी तेजी से जलती है, लेकिन अगर बुद्धिमानी से इसे  निर्देशित किया जाए तो यह, वह बल प्रदान कर सकती है जिसकी आपको, जड़ता से पार पाने और गतिशील होने के लिए जरूरत होती है|

इच्छा-शक्ति, आत्म-अनुशासन के लिए भाले की नोक का काम करती है| अगर आजादी की लड़ाई से तुलना करें तो इच्छा-शक्ति, १८५७ के विद्रोह की तरह है| यह एक बहुत बड़ा विद्रोह था| संघर्ष की एक लहर उठी जिसने आजादी की लड़ाई की दिशा ही बदल दी| हालाँकि आजादी पाने में हमें और ९० साल लग गए| आजादी के संघर्ष में रोजाना इसी तरह का प्रयास करना असंभव होता!

इच्छा-शक्ति, शक्ति की सघनता(concentration, एक बिन्दु पर जमाव) है| आप अपनी सारी ताकत जमा करते हैं और आगे की तरफ एक जोरदार बल लगते हैं| आप रणनीति बनाकर अपनी समस्याओं के सबसे कमजोर बिन्दुओं पर तब तक हमला करते हैं जब तक कि उनमें दरार नहीं पड़ जाती| इससे आपको इतनी जगह मिल जाती है कि आप उनके इलाके में और अंदर तक घुस सकें और उन्हें खत्म कर सकें |

इच्छा-शक्ति के प्रयोग में निम्नलिखित चरण शामिल हैं :
१.    अपना लक्ष्य चुनें|
२.    आक्रमण की योजना तैयार करें|      
३.    योजना पर अमल करें|

इच्छा-शक्ति के प्रयोग में, चरण १ और २ कार्यान्वित करने में बेशक वक्त लीजिए, लेकिन जब आप चरण ३ पर पहुंचें तो समझ जाइये कि लोहा गरम है और आपको तेजी से और ताकतवर प्रहार करना होगा|

अपनी समस्याओं को ऐसे तरीके से निपटाने की कोशिश न करें, जिसमें आपको हर रोज उच्च-स्तर की इच्छा-शक्ति की जरुरत पड़े| इच्छा-शक्ति अस्थिर होती है| अगर आप इसे अधिक लंबे समय तक इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे तो आप थक कर चूर हो जाएंगे| इसे ऊर्जा के उस स्तर की जरूरत होती है जिसे आप केवल थोड़े समय तक ही बना कर रख सकते हैं| अधिकतर बार ईंधन कुछ ही दिनों में खत्म हो जाता है|   

इच्छा-शक्ति का उपयोग, खुद पर निर्भर, गतिशीलता के निर्माण में करें
अगर इच्छा-शक्ति का उपयोग केवल छोटे पर ताकतवर बल के रूप में ही किया जा सकता है तो आखिर इसे इस्तेमाल करने का सबसे बढ़िया तरीका क्या है? कैसे आप खुद को, पुराने ढर्रे पर लौटने से बचा पाएंगे, जब इच्छा-शक्ति का अल्पकालिक बल समाप्त हो जायेगा?
इच्छा-शक्ति को इस्तेमाल करने का सबसे बेहतर तरीका है कि आप इसका इस्तेमाल मोर्चाबंदी करने में करें, ताकि आगे की प्रगति में, शुरुआती बल से कहीं कम प्रयास की आवश्यकता पडे| आजादी की लड़ाई को याद करें तो - १८५७ के विद्रोह ने एक मोर्चाबंदी का काम किया, इसने देश को एक सूत्र में पिरोने का काम किया जिससे आगे के संघर्ष का रास्ता अपेक्षाकृत आसान हो गया| इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आगे का रास्ता मुश्किलों से भरा नहीं रहा| लेकिन यह और भी मुश्किल हो सकता था अगर १८५७ की क्रांति नहीं हुई होती और देश को एकजुट होने के लिए और कई सालों तक हर रोज भारी संघर्ष करना पड़ता|  
   
तो इच्छा-शक्ति का सही इस्तेमाल मोर्चाबंदी करने में है - आप इलाके को ही हमेशा के लिए कुछ इस तरह से बदलें ताकि आगे बढ़ना आसान हो जाए| शक्ति की, उच्च-स्तर की लगातार पड़ने वाली जरुरत को कम करने के लिए, इच्छा-शक्ति का उपयोग करें|

एक उदाहरण
आइये एक ठोस उदहारण से इसे समझें, मान लीजिये कि आपका लक्ष्य १० किलो कम करना है| आप डायटिंग करने कर प्रयास करते हैं| इसमें इच्छा-शक्ति की जरूरत होती है, और पहले हफ्ते आप इसे अच्छी तरह से कर पाते हैं| परन्तु अगले कुछ हफ़्तों में पुरानी आदतें आप पर हावी होने लगती हैं और आप दोबारा वजन बढ़ा लेते हैं| आप फिर से कोशिश करते हैं, इस बार अलग-अलग तरह के आहार के साथ, पर नतीजा वही रहता है| ढाक के तीन पात! आप गतिशीलता को इतने लंबे समय तक नहीं बनाए रह सकते कि वजन कम करने के अपने लक्ष्य तक पंहुच पायें|

और यह अपेक्षित भी है क्योंकि इच्छा-शक्ति, अस्थायी होती है| यह छलांगो के लिए है, लंबी दौड़ों के लिए नहीं| इच्छा-शक्ति के लिए सचेत एकाग्रता की जरूरत होती है और सचेत एकाग्रता बहुत थका देने वाली होती है - यह लंबे समय तक बरकरार नहीं रखी जा सकती| कोई न कोई चीज आपका ध्यान आखिरकार भंग कर ही देगी|

आइये, इसी लक्ष्य को, इच्छा-शक्ति के सही प्रयोग से हासिल करने का प्रयास करते हैं| आप यह मानते हैं कि आप इच्छा-शक्ति को केवल अल्प-कालिक बल के रूप में ही इस्तेमाल कर सकते हैं - वह भी, अधिक-से-अधिक कुछ दिनों तक ही| और उसके बाद यह गायब हो जायेगी| तो अच्छा यही रहेगा कि आप इच्छा-शक्ति  का उपयोग, अपने आस-पास के इलाके को ही इस तरीके से बदलने में करें कि गतिशीलता बनाये रखना इतना मुश्किल न रहे, जितना कि फिर नये सिरे से शुरुआत करना| आपको, अपनी इच्छा-शक्ति का उपयोग, लक्ष्य की सरहद पर मोर्चाबंदी करने में करना चाहिए|

तो आप आराम से बैठ कर एक योजना बनाते हैं, इसमें तो अधिक ऊर्जा की जरुरत नहीं होती| और योजना पर अमल करने के लिए आप के पास आज, और अगले कुछ दिन होंगे|    

आप उन सभी लक्ष्यों की पहचान कर लेते हैं जिन पर आपको आक्रमण करना ही होगा, अगर आप सफल होना चाहते है| सबसे पहले तो आपको अपनी रसोई से सभी तरह के जंक फ़ूड (अस्वास्थ्कर भोजन) को हमेशा के लिए अलविदा कहना होगा, इसमें वह सभी खाद्य-पदार्थ (भोजन) शामिल हैं जिन्हें आप पेट-दर्द उठने तक खाने के शौकीन हैं| और आपको इसे, उन खाद्य-पदार्थों से बदलना होगा जिनसे आपको वजन कम करने में मदद मिले जैसे कि फल और सब्जियां| दूसरे, आप जानते हैं कि जब आप घर आते हैं, आपको जोरों की भूख लगी है और अगर खाना तैयार नहीं है तो फास्ट-फ़ूड (झटपट तैयार होने वाला खाना) खाने के लिए आपका ललचाना तय हैं| इसलिए आप हर हफ्ते के आख़िरी दिन, अगले पूरे हफ्ते के लिए, खास आहार (ऐसा खाना जो कि सेहतमंद हो और जल्दी खराब न हो) बनाकर रख दें| इससे आपके पास फ्रिज में हमेशा कुछ-न-कुछ रहेगा| आप हफ्ते के आखिरी दिन के कुछ घंटे, खाद्य-सामग्री की खरीदारी के लिए, और (अगले हफ्ते के) खास आहार को बनाने के लिए, बचा कर रखें| और इसके साथ-साथ आप, स्वास्थ्यवर्धक भोजन बनाने के तरीकों की एक अच्छी सी किताब खरीद लेते हैं| आप अपने आस-पास के उन लोगों के समूह के बारे में पता लगाते हैं जोकि आप ही की तरह वजन घटाना चाहते हैं, और उनसे किसी पहले से तय जगह (जैसेकि पार्क इत्यादि) में, रोजाना या कुछ दिनों के अंतराल पर नियमित मिलने का कार्यक्रम बनाते हैं| आप, एक वेट-चार्ट (ऐसा चार्ट जो वजन और लम्बाई का अनुपात दर्शाये), अपने बाथरूम के दरवाजे पर लगा देते हैं| आप एक अच्छी  वजन तोलने की मशीन जोकि वजन और बॉडी फैट(शारीरिक-वसा) को माप सके, खरीद लेते हैं| आप एक सैम्पल सूची बनाते हैं (जिसमें कि ५ तरह के भोजन जोकि आप नाश्ते में बना सकते हैं, ५ लंच और ५ डिनर शामिल हों) और इसे अपने फ्रिज के दरवाजे पर चिपका देते हैं| और भी बहुत से तरीके जो आपको अजमाना चाहें..., इस वक्त आप यह सब लिख लेते हैं ताकि भूल न जाएँ|

और फिर आप इस पर अमल करते हैं - तेजी से और पूरी ताकत लगा कर| आप, शायद पूरी योजना को एक ही दिन में भी कार्यान्वित कर सकें| वजन-घटाने के इच्छुक लोगों के समूह के बारे में आज ही पता लगाएं और उनसे पहली मुलाक़ात भी कर लें| सभी तरह के फास्ट-फ़ूड और जंक फ़ूड को रसोई से बाहर निकालें और पड़ोसियों में बाँट दें| अपना खास आहार बनाने का सारा सामान, नयी पाक-पुस्तिका (cookbook), और वजन तोलने की मशीन खरीद डालें| वेट-चार्ट और सैम्पल सूची को आज ही लगा दें| भोजन बनाने की विधी को चुन लें और हफ्ते के लिए खास-आहार आज ही बना दें|....बस हो गया!

दिन के खत्म होते-होते आपने, अपनी इच्छा-शक्ति का प्रयोग, वजन घटने के लिए सीधे करने के बजाय, उन परिस्थितियों के निर्माण में किया जिनसे कि वजन घटाने की योजना पर अमल करना आसान हो जाए| जब आप अगली सुबह जागेंगे तो आप पाएंगे कि आपका वातावरण, नाटकीय ढंग से आपकी योजना के हिसाब से ढल चुका है| आपका फ्रिज, पहले से बनाए हुए, सेहतमंद आहार से भरा हुआ होगा| आपके घर में समस्या पैदा करने वाले जंक-फ़ूड सिरे से नदारद होंगे| आप वजन घटाने वाले समूह के सदस्य होंगे और उनसे आपकी मीटिंग्स पहले से तय होंगी| हर हफ्ते, आपका कुछ समय खाद्य-सामग्री की खरीदारी और खास आहार को बनाने के लिए तय रहेगा| हाँ यह सही है कि वजन घटाने की योजना को अमल में लाने के लिए, आपको अभी भी कुछ अनुशासन की जरूरत होगी| लेकिन आप पहले ही चीजों को इस हद तक बदल चुके होंगे कि यह अब उतना मुश्किल नहीं रह जाएगा जितना कि यह इन बदलावों के बगैर होता|

इच्छा-शक्ति का प्रयोग, अपनी सबसे बड़ी समस्याओं पर सीधे हमला करने में न करें| इसके बजाय, इच्छा-शक्ति को, वातावरण और उन सामाजिक रुकावटों पर हमला करने में करें, जिनसे कि समस्या को बल मिलता हैं| पहले मोर्चाबंदी करें और फिर अपनी स्थिति को मजबूत कर लें (मेरा मतलब इसे एक आदत में बदल लें)|  

आदत, क्रिया को स्वचालित प्रणाली(autopilot) में  डाल देती है इस तरह से, इसे लगातार जारी रखने के लिए, बहुत ही कम ऊर्जा की जरुरत पड़ती है और आप अपने लक्ष्य की तरफ बहते चले जाते हैं| 
यह लेख, आत्म-अनुशासन की श्रंखला का पहला भाग है | पहला भाग | दूसरा भाग | तीसरा भाग | चौथा भाग | पांचवां भाग | छठा भाग 
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