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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: गुरुवार, 22 सितंबर 2011

आत्म-अनुशासन : कठिन-परिश्रम

(Original Post : Self-Discipline : Hard Work June 7th, 2005 by Steve Pavlina)
   
जिंदगी का सबसे बड़ा रहस्य यही है कि कोई बड़ा रहस्य नहीं है| आपका कोई भी लक्ष्य हो, आप उसे हासिल कर सकते हैं अगर आप काम करने के लिए तैयार हैं - ओपरा विनफ्रे

कठिन-परिश्रम - एक और मैला-कुचैला शब्द|

कठिन-परिश्रम की परिभाषा 
मेरे लिए कठिन-परिश्रम वह है जोकि आपको चुनौती देता है|

लेकिन आखिर चुनौती जरूरी क्यों है? क्यों न उसे ही किया जाए जोकि आसान है?

ज्यादातर लोग वही करते हैं जोकि आसान है और कठिन-परिश्रम से दूर रहते हैं - और यही वजह है कि आपको ठीक इसका उलटा करना चाहिए| जिंदगी के सतही अवसरों पर लोगों के झुंड-के झुंड टूट पड़ते हैं क्योंकि वे आसान होते हैं| अपेक्षाकृत ज्यादा कठिन चुनौतियों पर मुकाबला (competition) काफी कम होता है और अवसर कहीं ज्यादा|
अफ्रीका में सोने की एक खदान है जोकि २ मील गहरी है| इसे बनाने में दसियों लाख डॉलर का खर्चा आया, लेकिन यह अब तक की सबसे ज्यादा मुनाफ़ा देने वाली सोने की खदानों में से एक है| इन खनिकों(खान खोदने वाले लोग) नें एक बहुत मुश्किल चुनौती को, कठिन परिश्रम से काबू में किया, और आखिर मेहनत का फल मिला| मुझे(स्टीव पव्लीना) को याद है कि जब मैं १९९९ में कंप्यूटर गेम 'Dweep' का विकास कर रहा था तो मैंने चार महीने(फुल-टाइम), एक ऐसा प्रारूप-दस्तावेज (Design-document) बनाने में लगा दिए जो कि केवल पांच पेज लंबा था| यह एक तर्क (logic)पर आधारित पहेलियों(puzzle) का खेल था और मुझे सही डिजाइन को हासिल करना बहुत चुनौतीपूर्ण लगा| एक बार डिजाईन पूरा होने के बाद बाकी सभी काम जैसेकि - प्रोग्रामिंग, चित्रकला, संगीत, ध्वनी-प्रभाव, इंस्टॉलर लिखने और गेम बाजार में लाने में, केवल दो महीने का समय और लगा|

मैंने इतना समय समझ-बूझ कर, डिजाईन पर काम करने में लगाया क्योंकि मैं यकीन करता था कि इस तरह से मैं मुकाबले में बढ़त हासिल कर सकता हूँ, जिसकी मुझे जरुरत थी| मैं जानता था कि गेम के तकनीकी पक्ष के आधार पर मैं, दूसरों से मुकाबला नहीं कर सकता था| मैंने, स्पर्धा का अध्ययन किया और मुझे बहुत से ऐसे गेम्स मिले जिन्हें कि मैं "नीचे लटका हुआ फल" समझता था| बाजार में ऐसे गेम्स की बाढ़ आई हुई थी जोकि पुराने गेम्स की नकल थे, ऐसा सामान जिसे बनाना आसान था| और फिर मेरे शुरुआती गेम्स भी डिजाईन के मामले में कमजोर ही थे, ज्यादातर निशाना लगाने वाले, एकरस गेम्स|

एक मूल (original) गेम को उसके अनूठे खेल-खेलने के ढंग के साथ डिजाईन करना एक कठिन, बहुत कठिन काम था, लेकिन इसका नतीजा लाजवाब रहा| 'डवीप' नें सन २००० में शेयरवेअर (Shareware) इंडस्ट्री का पुरस्कार जीता, और इसके ही एक उन्नत संस्करण (डवीप गोल्ड) नें, अगले साल भी यही पुरस्कार जीता| उस गेम की सफलता की वजह से, न्यूयोर्क टाइम्स के एक रिपोर्टर ने मेरा (स्टीव पव्लेना का) इंटरव्यू लिया, और मेरा इंटरव्यू एक बढ़िया फोटो के साथ जून १३, २००१ के संस्करण (बिजनेस विभाग) में छपा| पहली बार १ जून, १९९९ में जारी होने के बाद, 'डवीप' अब बिक्री के सातवें साल की शुरुआत कर रहा है| यह आज की तकनीक से मुकाबला नहीं कर सकता| तकनीक से मुकाबला, यह तब भी नहीं कर सकता था, जब यह पहली बार जारी हुआ था| लेकिन डिजाईन के मामले में यह आज भी, दूसरे सर्वश्रेष्ठ प्रतियोगियों को टक्कर देता है| मैंने पाया कि ऐसे बहुत से खिलाड़ी हैं जोकि एक बेहतर-डिजाईन, पर पुरानी तकनीक के गेम को खेलना  पसंद करते हैं बजाय एक तकनीकी रूप से नवीन पर सतही गेम के| इस गेम की लंबी सफलता से मैंने सीखा कि कठिन-परिश्रम का फल मीठा होता है|

‘डवीप’ इतने लंबे समय तक कभी भी नहीं टिक पाता अगर मैंने डिजाईन करते समय आसान रास्ता चुना होता| मैंने सोने के लिए २ मील गहरी खुदाई की, यही वजह है कि किसी दूसरे शख्स के लिए, गेम को, बाजार में इसकी जगह से हिलाना, बहुत मुश्किल था| ऐसा करने के लिए उन्हें मुझसे ज्यादा गहरी खुदाई करनी पड़ती, और बहुत ही कम लोग ऐसा करने के इच्छुक होंगे क्योंकि रचनात्मक गेम डिजाईन करना, अत्याधिक रूप से मुश्किल काम हैं| यह तो हर कोई कहता है कि उसके पास एक अच्छे गेम की कल्पना है, लेकिन वास्तव में उस कल्पना को इस्तेमाल करके ऐसा कुछ बनाना जोकि काम करे, मजेदार हो और जिसमें नयापन हो, कड़ी मेहनत का काम है| जब मैं उन, दूसरे गेम्स को देखता हूँ जिन्हें ५ साल से ज्यादा समय से सफलता मिल रही है, मुझे उन गेम्स में, बार-बार, कठिन-परिश्रम करने की स्वेच्छा(willingness) दिखाई देती है जोकि बाकी गेम्स में नहीं मिलती| फिर भी, आज बाजार, अच्छे गेम्स की नकलों से और भी ज्यादा अटा पड़ा है, जितना तब था, जब मैंने शुरूआत की थी|

जब आप खुद को मुश्किल काम करने के लिए अनुशासित कर लेते हैं तो नतीजों के उस क्षेत्र में दाखिल हो जाते हैं जहां पर बाकी सब का प्रवेश करना मना है| जो मुश्किल है उसे करने के लिए तैयार रहना ऐसा है जैसेकि आपको, अपने ही एक खास खजाने की चाबी मिल गई हो|

कठिन-परिश्रम के बारे में एक अच्छी बात यह है कि यह सर्वव्यापी(Universal) है| इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप किस उद्द्योग(industry) में हैं - कठिन-परिश्रम को आप लंबे समय के सकारात्मक परिणाम हासिल करने के लिए प्रयोग कर सकते हैं|
  
मैं ठीक इसी सिद्धांत का उपयोग, इस व्यक्तित्व-विकास के व्यवसाय को खडा करने में कर रहा हूँ| मैं बहुत सी ऐसी चीजें करता हूँ जो कि मुश्किल हैं| मैं उन विषयों को संबोधित करने का प्रयास करता हूँ जिन्हें दूसरे लोग हाथ भी नहीं लगाते और उन विषयों से कतराता हूँ जो कि "नीचे लटके हुए फल" की श्रेणी में आते हैं| मैं विषयों की गहराई से छान-बीन करके, सोने की खोज करने का प्रयास करता हूँ| मैं काफी शोध और अध्धयन करता हूँ| मैं लंबे-चौड़े लेख लिखता हूँ और अपने सबसे अच्छे विचारों को निशुल्क रूप से, सभी के लिए उपलब्ध करा देता हूँ, इसलिए मैं हमेशा अपने बेहतर को और अच्छा बनाने के लिए बाध्य रहता हूँ| मैंने इस व्यवसाय को पिछले साल अक्टूबर में शुरू किया था और इस पर पूरे वक्त काम कर रहा रहूँ और वह भी बिना किसी तनख्वाह(Salary) के|

इसी दौरान मैं 'टोस्टमास्टर' में अपने बातचीत करने के हुनर को बेहतर बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा हूँ (मेरी पहली सालगिरह,२ जून को थी). मैं दो अलग-अलग क्लबों(clubs) का सदस्य हूँ और हर महीने ६-७ मीटिंग्स में भाग लेता हूँ| मुझे, क्लब का सदस्य बनने के एक महीने के बाद 'क्लब-ऑफिसर' बना दिया गया और मुझे अभी 'सेकंड-ऑफिसर' के एक पद के लिए चुना गया है| मैंने कई व्याख्यान(भाषण) दिए हैं, जोकि सभी निशुल्क थे|     

जबसे मैं सदस्य बना हूँ मैंने सभी भाषण-प्रतियोगिताओं में भाग लिया है| अगर इतना वक्त मैंने, अपने गेम के व्यवसाय में लगाया होता तो इस वक्त मेरे पास काफी धन-दौलत होती| फिर यह कठिन-परिश्रम का काम हैं और मुझे पेशेवर वक्ता(professional) बनने के लिए, अभी कम से कम एक साल का प्रशिक्षण और चाहिए| लेकिन जो भी हो, मैं इसकी कीमत देने को तैयार हूँ| मैं आसान रास्ता चुन कर ऐसे हलके स्तर पर नहीं पहुंचना चाहता जहां से मैं बार-बार नीचे फिसलता रहूँ| मैं स्टेज पर पहुँच कर 'खुद अपनी मदद कैसे करें'(Self-help) विषय पर मन को भाने-वाले, ऐसे जुमलों की फुहार नहीं छोडना चाहता जो कि अभी भी तालियाँ और फीस का चेक(paycheck) तो बटोरते हैं लेकिन वास्तव में किसी की मदद नहीं करते| अगर इसे सीखने में सालों लगते हैं तो लगते रहें|
       
इसी सिद्धांत का आगे, मैं अपनी किताब लिखने में भी इस्तेमाल कर रहा हूँ| यह काफी कड़ी-मेहनत का काम हैं| लेकिन मैं चाहता हूँ कि यह एक ऐसी किस्म की किताब हो जिसे लोग आज से दस साल बाद भी पढ़ रहे हों| ऐसी किताब लिखना कम से कम १० गुना अधिक कठिन हैं बनिस्बत उन किताबों के जिनका आज, किताबों की दुकानों के मनोविज्ञान विभाग(psychology section) में बोलबाला है| परन्तु इनमें से ज्यादातर किताबें सालभर में ही दुकानों से गायब हो जाएंगी और काफी कम लोग ही उन्हें याद रख पाएंगे|       

कड़ी-मेहनत काम आती है| और जब आपसे कोई यह कहे कि यह सही नहीं है तो सावधान हो जाइये, अगली आवाज किसी सेल्स-मैन की होगी जो आपको ‘फ़ौरन और आसानी से’(fast and easy) काम करने वाली कोई चीज बेचने का प्रयास कर रहा होगा| कठिन-परिश्रम करने की जितनी ज्यादा क्षमता आपमें होगी उतना ही बड़ा फल आपकी पकड में आएगा| जितना गहरा आप खोदेंगे, उतना ही बड़ा खजाना आपके हाथ आएगा|    

स्वस्थ रहना कड़ी-मेहनत का काम है| एक सफल रिश्ते को ढूंढना और उसे निभाना कड़ी-मेहनत का काम है| बच्चों को बड़ा करना कड़ी-मेहनत का काम है| खुद को व्यवस्थित रखना कड़ी-मेहनत का काम है| लक्ष्य निर्धारित करना, उन्हें हासिल करने की योजना तैयार करना और खुद को रास्ते पर  बनाये रहना, कड़ी-मेहनत का काम है| यहाँ तक कि खुश रहना भी कड़ी-मेहनत का काम है(सच्ची खुशी जोकि आत्म-सम्मान से आती है, न कि वह बनावटी खुशी जोकि (समस्याओं को) नकारने और पलायनवाद(escapism) से आती है)|      
कठिन-परिश्रम और स्वीकृती साथ-साथ चलती हैं| एक बात जो आपको स्वीकार करनी ही होगी कि आपकी जिंदगी में कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जोकि बिना कठिन-परिश्रम के किसी और चीज से परास्त नहीं होने वाले| हो सकता है कि एक संतोषजनक रिश्ते को ढूंढ पाने में आपकी किस्मत साथ न दे रही हो| शायद यह केवल तभी संभव हो पाए जब आप यह स्वीकार कर लें कि इसके लिए आपको वही करना होगा जिससे आप अब तक बचते आ रहे हैं| हो सकता है कि आप अपना वजन कम करना चाहें| शायद, अब यह स्वीकार करने का वक्त आ गया है कि आपके लक्ष्य का रास्ता, अनुशासित खान-पान और व्यायाम(दोंनों ही कड़ी-मेहनत का काम हैं) से होकर गुजरता है| और हो सकता है कि आप, अपनी आमदनी को बढ़ाना चाहते हैं| शायद, अब आपको मान लेना चाहिए कि ऐसा कर पाने का केवल एक ही तरीका है और वह है कठिन-परिश्रम|

जब आप कठिन-परिश्रम को टालने और उससे घबराने की बजाय खुद को सहज ही उसके हवाले कर देंगे तो आपकी जिंदगी एक बिलकुल ही नए स्तर पर पहुँच जाएगी| आप इसे अपना दोस्त बनाएँ न कि अपना दुश्मन| यह एक शक्तिशाली औजार हैं जो आपका साथ देगा| 

यह लेख, आत्म-अनुशासन की श्रंखला का पहला भाग है | पहला भाग | दूसरा भाग | तीसरा भाग | चौथा भाग | पांचवां भाग | छठा भाग 


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