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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: मंगलवार, 4 अक्तूबर 2011

आत्म-अनुशासन : कर्मशीलता

(Original Post : Self-Discipline : Industry June 9th, 2005 by Steve Pavlina)    

कर्मशीलता का अर्थ है कड़ी-मेहनत| कठिन-परिश्रम की तुलना में, कर्मशील होने के लिए आपको जरूरी नहीं कि वही काम करना होगा जोकि चुनौतीपूर्ण है या फिर कठिन है| इसका सीधा सा अर्थ है कि आपको काम में अपना समय देना होगा| आप कर्मशील, आसान काम करके भी बन सकते हैं और कठिन काम करके भी|

मान लीजिए आपका घर में एक छोटा शिशु (baby) है| और आपका काफी वक्त डाईपर(बच्चों का लंगोट) बदलने में खर्च हो जाता है| अब यह असल में कोई कठिन काम तो नहीं - बात सिर्फ इस काम को बार-बार, दिन में कई बार करने की है|

आपको जिंदगी में ऐसे कई काम मिलेंगे जो जरूरी नहीं कि बहुत कठिन ही हों, लेकिन सामूहिक रूप से उन्हें काफी वक्त देने की जरुरत पडती है| अगर आप उनसे पार पाने के लिए खुद को अनुशासित नहीं रखते हैं तो वे आपके जीवन में काफी उथल-पुथल पैदा कर सकते हैं| एक पल के लिए उन सभी छोटी-छोटी चीजों के बारे में सोचिए, जिन्हें करना आपके लिए जरूरी है : खरीददारी, खाना-बनाना, सफाई करना, कपडे धोना, टैक्स, बिल चुकाना, घर संभालना, बच्चों की देखभाल, आदि-आदि| और यह तो केवल घर के लिए है - यदि इसमें आप ऑफिस, के काम भी जोड़ लें तो सूची और भी लंबी हो जाती है| ये सभी चीजें शायद कभी भी आपकी महत्वपुर्ण कार्यों की सूची में न आ पाएं लेकिन फिर भी इन्हें करना जरूरी तो है ही|

आत्म-अनुशासन के लिए यह जरूरी हैं कि आप, जहाँ आवश्यक हो, वहाँ समय देने की क्षमता विकसित करें| काफी तरह की गडबडियां तभी पैदा होती हैं जब हम, जो काम जरूरी है, उसे सही तरह से करने के लिए समय देने से इनकार कर देते हैं| ऐसी गडबडियां, एक अस्तव्यस्त मेज या ठसाठस भरे हुए ई-मेल 'इन्बोक्स' से लेकर 'एनरोन' या 'वर्ल्ड-कॉम' घोटाले तक जा सकती हैं| अब यह आपकी मर्जी है कि आप क्या चुनते हैं - बड़ी गडबडी या छोटी| किसी भी सूरत में, समस्या के लिए जिम्मेदार एक महत्वपूर्ण घटक है, जो जरूरी है वह करने के लिए समय देने से इनकार करना|

कई बार यह स्पष्ट होता है कि क्या करने की जरूरत है? कई बार यह बिलकुल भी स्पष्ट नहीं होता| कुछ भी हो परन्तु, अस्त-व्यस्ता को नजरअंदाज करने से तो काम नहीं बनने वाला| अगर आप यह नहीं जानते हैं कि क्या करने की जरुरत है तो पहला कदम तो यही पता लगाना होगा कि आखिर करना क्या है? शायद, इसके लिए आपको जानकारी ढूँढने और उस विषय में अपना ज्ञान बढाने की जरूरत पड़ सकती है| पिछले साल, इस ब्लॉग को शुरू करने कई लिए मुझे (स्टीव पव्लेना को) सीखना पड़ा कि आखिर इसे करना कैसे है| मैंने अपना समय, दूसरे लोगों का ब्लॉग पढ़कर और ब्लॉग साधनों(blog tools) का उपयोग सीखकर, खुद का ज्ञान बढ़ाने में लगाया| यह मेरे लिए मुश्किल तो नहीं था लेकिन इसमें काफी समय लगाने की जरूरत थी| 

कई बार हम छोटी-छोटी समस्याओं को भी बड़े लंबे समय तक टालते रहते हैं| जनवरी में मेरी पत्नी और मैंने, एक नया घर खरीदा| लेकिन, बंधे हुए सामान के आख़िरी बक्से को हम, पिछले सप्ताहंत पर ही खोल पाए| ज्यादातर सामान को तो हमने, शिफ्ट करने के पहले ही हफ्ते में ही निकाल लिया था, लेकिन कुछ बक्से, एक कोने में खिसका दिए गए थे, और हम दोनों में से कोई भी उन बक्सों को खोलना नहीं चाहता था| क्यों? क्योंकि हम नहीं जानते थे कि उनमें से जो सामान निकलेगा, उसे हम कहाँ रखेंगे? और यह सबसे आसान लगा कि समस्या को नकार दिया जाए और उम्मीद की जाए कि बक्से जादू से अपनेआप ही खुल जाएंगे| आखिरकार, हमने, पिछले हफ्ते के अंत में, उन बक्सों को खोल ही दिया और मकान में कुछ छोटे-मोटे सुधार कर डाले जो कि बड़े दिनों से परेशान कर रहे थे| 
 
अब इन चीजों को करना कोई मुश्किल या महंगा काम तो नहीं था| यह तो महज, इन कामों को करने के लिए, कुछ समय निकालने की बात थी| इसमें बहुत कुशलता या बुध्दि की जरूरत तो नहीं थी| हमें सिर्फ यह स्वीकार करना था कि इन कार्यों को करने की जरुरत है, कुछ मिनट यह सोचने में लगाते कि काम को कैसे किया जाए, और फिर उन कार्यों को निपटा देते|

समय दीजिए
जीवन में बहुत सी समस्याएँ ऐसी हैं जिनका समाधान मुख्य-रूप से, 'बुद्धी ताक पर रखकर', समय लगाना ही है| अगर आपका ई-मेल 'इन्बोक्स' पूरी तरह से भरा हुआ है, तो यह कोई चुनौतीपूर्ण समस्या नहीं है| मेरा विश्वास कीजिये - जिंदगी में पुराने, पत्राचार को संभालने से भी बड़ी बहुत सी चुनौतियां हैं| मैं गारंटी देता हूँ कि आपमें इसे संभालने के लिए पर्याप्त समझ है| अपने ई-मेल 'इन्बोक्स' को खाली करना पूरी तरह से समय लगाने की बात है| शायद, यह करने में आपको कई घंटे लग जाएँ| अगर यह काम इस लायक है कि इसमें कई घंटे दिए जाने चाहिएं तो समय लगाइए| चाहें तो इस दौरान आप मधुर संगीत का भी आनंद लें सकते हैं| नहीं तो सभी ई-मेल सेलेक्ट कीजिए (Ctrl + A) और डिलीट(Delete) का बटन दबा दीजिए, और इसे निपटाइए|

अभी किये जाने वाले कार्यों की, आपकी सूची में से कितने काम ऐसे हैं जिन्हें कार्यशीलता के सामान्य उपयोग से सुलझाया जा सकता है? इन्हें हल करने के लिए, कई बार आपको विशेष रूप से रचनात्मक या चतुर होने की जरुरत नहीं होती - कई बार 'लठ्ठमार' :-) तकनीक भी काम कर जाती है| परन्तु, इस इच्छा-चक्र (pattern of wishing) में फंसना आसान है कि लठ्ठमार तकनीक की जरुरत नहीं हैं| यह थका देने वाला, उबाऊ काम है| यह कोई इतना महत्वपूर्ण भी नहीं है| और फिर भी यह करना जरूरी तो है| अगर आप, समस्या को दरकिनार करने या उसे जड़ से खत्म करने का  कोई तीव्र या बेहतर तरीका, जिससे कि ज्यादा समय लेने वाले समाधान से बचा जा सके, ढूंढ सकें तो उसका पूरा फायदा उठाइए| कार्यों को बांटिए, उन्हें हटा दीजिए - समय के बोझ को कम करने के लिए आप जो कुछ भी कर सकते हैं, करें| लेकिन, अगर आप को पता हैं कि यह काम ऐसा है जिसे आप बिना अपना व्यक्तिगत समय दिए पूरा नहीं कर सकते, ठीक मेरे घर के उन नालायक बक्सों की तरह जिन्होंने खुद को खोलने से इनकार कर दिया, तो इसे स्वीकार कीजिये और इसे निपटा दीजिए| शिकायत मत कीजिए| न ही भुनभुनाइए| बस इसे कर डालिए|

अपनी व्यक्तिगत उत्पादकता (productivity) का विकास कीजिए
कर्मशील बनने के लिए खुद को अनुशासित करने से आप अपने समय को ज्यादा उपयोगी बना पाएंगे| समय तो सीमित है, लेकिन आपकी व्यक्तिगत उत्पादकता की कोई सीमा नहीं| कुछ लोग अपने समय को दूसरों से कहीं ज्यादा कुशलता से इस्तेमाल करते हैं| यह वाकई हैरानी की बात है कि लोग एक तेज कंप्यूटर या बढ़िया माइलेज देने वाली कार, खरीदने के लिए अधिक कीमत देने को भी तैयार रहते हैं, लेकिन वे अपनी व्यक्तिगत क्षमता पर शायद ही कभी ध्यान देते हों| अंतत: आपकी व्यक्तिगत उत्पादकता आपके कहीं अधिक काम आएगी, बनिस्बत कंप्यूटर या कार के| एक कर्मशील प्रोग्रामर(Programmer)को १०-साल पुराना कंप्यूटर दे दीजिए और वह एक साल की अवधि के दौरान, कहीं ज्यादा बेहतर काम कर पाएगा बजाए एक आलसी प्रोग्रामर के जिसके पास नवीनतम तकनीक हो|
   
तमाम तरह की टेक्नोलोजी और उपकरण(gadgets)जो हमें आज उपलब्ध हैं और जोकि हमें और ज्यादा कुशल बना सकते हैं, इसके बावजूद आपकी व्यक्तिगत उत्पादकता, अभी भी आपके लिए  सबसे बड़ी रुकावट है| खुद को ज्यादा कुशल बनाने के लिए टेक्नोलोजी की तरफ मत देखिए| अगर आपके विचार से आप, टेक्नोलोजी के बिना उत्पादक नहीं हैं तो आप टेक्नोलोजी के साथ भी उत्पादक नहीं होंगें - यह सिर्फ आपकी बुरी आदतों पर पर्दा डालने का काम करेगी| लेकिन, अगर आप टेक्नोलोजी के बिना भी कर्मशील हैं तो यह आपको और भी बेहतर बना सकती है| टेक्नोलोजी को एक बल के गुणक (force multiplier) के रूप में देखिए - जो भी आपके पास है यह उसको कई गुना बढ़ा देगी|

अगर आप अपने समय का बेहतर उपयोग करना चाहते हैं तो मेरी राय है कि आप नीचे दिए हुए लेख से शुरुआत करें :

अपनी व्यक्तिगत उत्पादकता को तीन गुना बढाईये (यह लेख जल्द ही उपलब्ध होगा)

उस लेख का मुख्य विचार यह है कि आप पहले अपनी उत्पादकता के वर्तमान स्तर को पहचानिए (लेख यह बताता है कि इसे समय का हिसाब रखकर कैसे किया जा सकता है), अपने अभी के 'कुशलता अनुपात' को पहचानिए, और फिर इसे धीरे-धीरे बढाते चले जाईए|     

मैंने वह लेख सन २००० में लिखा था, और मैं इसी तरीके पर बार-बार, लौटकर आता रहता हूँ, छह महीनों में कम से कम एक बार| यह मुझे सचेत करता रहता हैं कि मैं अपने समय का कैसे इस्तेमाल कर रहा हूँ| मैंने इसे, कुछ ही महीने पहले प्रयोग किया था, मैंने कुछ दिनों तक अपने समय के उपयोग का हिसाब रखा, और मैं यह जानकर हैरान रह गया कि सुधार की गुंजाईश काफी कम है| मुझे पांच साल लगे, उस लेख के लिखने से लेकर, इस मुकाम तक पहुँचने तक| लेकिन, मुझे महसूस हो रहा है कि आखिरकार मैं अपने समय का कुशलता से उपयोग कर रहा हूँ| हालांकि अभी भी, जब-तब, कई अनुत्पादक (unproductive) दिन गुजरते हैं, लेकिन ऐसे दिन विरले ही होते हैं| ज्यादातर समय तो मैं अपने दिन को देखता हूँ और खुद से कहता हूँ कि "मैंने आज वाकई काफी काम कर लिया| और मैं, तय वक्त में, इसे और बेहतर तरीके से शायद नहीं कर पाता|"

पांच साल पहले मुझे पता था कि मुझे क्या करना है| मुझे इसे लगातार करते रहने के लिए जरूरी शक्ति और अनुशासन हासिल करने में इतना समय लगा| और यह आसान तो बिलकुल भी नहीं था|

जब आप अपनी व्यक्तिगत उत्पादकता के विकास के रास्ते पर चलते है तो कई ऐसे दिन भी आते हैं जब बाल-नोचनें और दांत-पीसने का मन होता है, लेकिन अंतत इसका अच्छा परिणाम निकलता है| मेरे विचार से काफी लोग, अधिक उत्पादक होने के विचार की ओर अपने सहज ज्ञान के कारण ही आकर्षित होते है| अब यह समझने में अधिक दिमाग लगाने की जरूरत तो नहीं कि अगर आप अपने समय का कुशलतापूर्वक उपयोग कर सकें, तो आप ज्यादा काम कर पाएंगे और आपको तेजी से नतीजे मिलेंगे| व्यक्तिगत विकास आपको अपने जीवन में इतनी खाली जगह बनाने की छूट देता है जिससे आप वह सभी कुछ कर सकें जोकि आप महसूस करते है कि आपको करना चाहिए - स्वास्थवर्धक खाना खाना, व्यायाम करना, कठिन-परिश्रम करना, परिवार को वक्त देना, एक बढ़िया सामाजिक जीवन जीना, और अपने वजूद को सार्थक बनाना| वरना किसी-न-किसी चीज की कुर्बानी तो देनी ही पड़ेगी| व्यक्तिगत कुशलता के एक उच्च स्तर के बिना, इस बात की पूरी संभावना है कि आपको किसी ऐसी चीज को छोडना पडे जो आपके लिए जरूरी हो| आपको हमेशा दुविधा में रहेंगे कि आखिर किसे चुनें - स्वास्थ्य या आजीविका(रोजगार), आजीविका या परिवार, परिवार या दोस्त| कर्मशीलता आपको वह सामर्थ्य देती है जिससे आप इन्ही सभी चीजों का एक साथ आनंद ले पाएं, ताकि आपको आजीविका को परिवार के ऊपर (या फिर उल्टा) न चुनना पडे| आपको दोनों मिल सकते हैं और वह भी एक साथ|

बेशक, कर्मशीलता बहुत से औजारों में से केवल एक औजार है| यह आपको, आपका काम कुशलता से करने की काबलियत देती है, लेकिन यह आपको कतई नहीं बताएगी कि आपको आखिर करना क्या है? कर्मशीलता एक निम्न दर्जे का औजार है| मेहनत से काम करना जरूरी नहीं कि समझदारी से काम करना भी हो| लेकिन कर्मशीलता की इस कमजोरी की बावजूद, यह एक जबर्दस्त औजार है जिसे आप, व्यक्तित्व विकास के अपने बक्से(toolbox) में जरुर रखना चाहेंगे| एकबार आपने, एक कार्य-विधि(course of action) तय कर ली, योजना का खाका तैयार कर लिया और उसे अमल में लाने के लिए तैयार हो गए| अब, यहाँ जो काम कर्मशीलता कर सकती है वह कोई दुसरी चीज नहीं कर पाएगी| अंततः, परिणाम तो आपके काम करने से ही हासिल होगा, और कर्मशीलता का तो सार ही है - काम करना|

यह लेख, आत्म-अनुशासन की श्रंखला का पांचवां भाग है | पहला भाग | दूसरा भाग | तीसरा भाग | चौथा भाग | पांचवां भाग | छठा भाग


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