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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: सोमवार, 26 दिसंबर 2011

आप क्यों नहीं?

(Original Post : Why Not You? December 8th, 2005 by Steve Pavlina)
  
क्या आप उन लोगों में से एक हैं जो कि दुनिया की समस्याओं को देखते हैं और निम्नलिखित बातों में से कोई एक बात कहते हैं :  
  • इस बारे में किसी को तो कुछ न कुछ करना ही पडेगा|
  • जिन लोगों पर इसे संभालने की जिम्मेदारी है वे आखिर हैं कहाँ?
  • आखिर हम लोग टैक्स किस लिए भरते हैं? आखिर किसी को तो इसे ठीक करने की जिम्मेदारी मिली ही होगी?   
  • आखिर इस बारे में कोई कुछ करता क्यों नहीं?   
कोई और क्यों? आप क्यों नहीं?
अगर आप वाकई में किसी समस्या का, समाधान निकलते हुए देखना चाहते है, तो आप ही क्यों नहीं इस पर काम शुरू कर देते? अब यह तो तय है कि आपके कुढने और शिकायत करने से कुछ नहीं होने वाला

आप कहते हैं कि “यह एक बड़ी समस्या है|” इसे बड़ी समस्या होना ही था| उन समस्याओं का सामना करने से, जो कि आप के लिए बहुत बड़ी हैं, आपका एक मनुष्य के तौर पर विकास होता हैं| आपको क्या लगता है क्यों यह समस्या बार-बार, आपको परेशान के लिए, आपके सामने उठ खड़ी होती है? क्या आप सोचते हैं कि आपसे यह उम्मीद की जाती है कि आप इससे छुपते रहें और इस बात का इंतज़ार करें कि कोई आए और, आपके लिए, इस समस्या को हल कर दे? अगर आपका ध्यान इस पर गया है तो यह समस्या आपकी है|

ऐसी एक समस्या का सामना करके, जो आप के लिए बहुत बड़ी है, आप अपने जीवन को उद्देश्य दे सकते हैं| यह उदासीनता और बोरियत का ईलाज है| क्या हो जाएगा अगर आपको जब-तब असफलता का सामना करना पडेगा? शुरुआत में तो असफल होना स्वाभाविक हैं – और एक नहीं कई बार| हमारे व्यक्तित्व का ऐसे ही तो निर्माण होता है| लेकिन जब आप दृढ(persistence) रहेंगे तो आप एक पत्थर पर एक निशान तो छोड ही देंगे (करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान – रस्सी आवत जावत ते, सिल पर पड़त निशान)| और जब आप जैसे सचेत होकर निशान डालने वाले काफी लोग काम करेंगे तो दुनिया की कोई भी समस्या दुसाध्य(unsolvable) नहीं रह जाएगी|

आखिर और कितने समय तक आप, अपनी काबलियत से कम पर समझौता करते रहेंगे| आपको वाकई में लगता है कि आप दुनिया में ज्यादा से ज्यादा मशीनों(consumer goods) का उपभोग करने के लिए ही आए हैं| क्या आपके जीवन का यही मकसद हैं?

क्या हम गाँधी को एक वकील के तौर पर याद करते हैं? क्या यीशु केवल एक बढ़ई(carpenter) थे?

अगर आप इस बात का इंतजार कर रहें हैं कि कोई आए और दुनिया की समस्याओं को हल करे, तो फिर आप समस्या का ही एक हिस्सा हैं| और वे लोग जिनका जीवन, उद्देश्य की लिए समर्पित हैं, उन्हें आपके, कोशिश न करने के, कारण और भी कड़ी मेहनत से काम करना पडेगा| अगर आप सिस्टम पर काम नहीं कर रहे हैं तो आप सिस्टम के अंदर काम कर रहे हैं, इसका मतलब आप सक्रिय रूप से, इसे बढ़ावा दे रहे हैं|

दुनिया की समस्याओं को हल करने की जिम्मेदारी आपके कंधों पर है| आप नियंत्रण से तो इनकार कर सकते हैं लेकिन आप अपनी जिम्मेदारी को कभी भी नहीं छोड सकते| 

आप क्यों नहीं?  

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2 टिप्‍पणियां:

  1. bahoot accha article hai lekin kai bar insan kuchh karna chahata hai par shayad paristhitiya unhe nahi karne deti.....yeh excuse ho sakta hai par bat to yahi sahi hai ki swayam ko har paristhiti me kucchh karna padega

    उत्तर देंहटाएं
  2. आलेख पसंद करने का शुक्रिया विवेक|
    हाँ, यह सही है कि कभी-कभी हालात हम पर हावी हो जाते हैं, और ऐसा सभी के साथ कभी न कभी होता है| मैं जब भी ऐसी परिस्थिति में होता हूँ तो मुझे एक कविता बरबस ही याद आ जाती है जिसे मैंने बचपन में पढ़ा था
    आकाश सुख देगा नहीं,
    धरती पसीजी है कहीं|
    जिससे हर्दय को बल मिले,
    है ध्येय अपना तो वहीं|

    उत्तर देंहटाएं

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