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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: बुधवार, 18 जनवरी 2012

डिप्रेशन (अवसाद) को कैसे दूर भगाएं?

(Original Post : Overcoming Depression Jun 29th, 2006 by Steve Pavlina)   

इस हफ्ते की शुरुआत में मैनें, “निराशावादी लोगों की मदद कैसे करें” (लेख जल्द ही उपलब्ध होगा) विषय पर एक लेख लिखा था| लेकिन क्या हो, अगर आप खुद ही लंबे समय से उदासी महसूस कर रहे हों तो? इस लेख में मैं, आपको नकारात्मक मन:स्थिति से निकलने के एक तरीके के बारे में बताना चाहता हूँ, जोकि डिप्रेशन (अवसाद) को थोड़े समय के लिए ही नहीं बल्कि हमेशा के लिए दूर कर सकता है| इसे सरल बनाने के लिए मैं डिप्रेशन का उदाहरण दे रहा हूँ, लेकिन यह तरीका दूसरी नकारात्मक भावनाओं, जैसे कि गुस्सा, चिंता, नाराजगी आदि पर भी काम करता है|

डिप्रेशन क्या है?
डिप्रेशन से ग्रसित व्यक्तियों के पास अक्सर उदास रहने की एक, उचित सी लगने वाली, वजह होती है, और बाहर से देखने पर उन कारणों में कुछ भी गलत नहीं लगता| अगर आप आर्थिक तंगी, सेहत या और दूसरी अनचाही चुनौतियों का सामना कर रहे हैं तो कोई भी समझदार व्यक्ति आपके हालात को देखकर, आपसे सहमत हो जाएगा| “हाँ भई, यह तो बड़े मुश्किल हालात हैं|”

मैं, यह कह कर कि आपकी समस्याएं, इतनी कठिन भी नहीं हैं, आपकी समझदारी का अपमान नहीं करूँगा| बल्कि इसके विपरीत, मैं तो यह मानता हूँ कि शायद आपकी परिस्थिति वाकई में खराब है, और इसके कारण आपका उदास रहना पूरी तरह से जायज है| मेरी हमदर्दी आपके साथ है, क्योंकि जिस दौर से आप गुजर रहें हैं, मैं भी उसी दौर से गुजर चुका हूँ| मैं जानता हूँ कि हर वक्त, बुरा महसूस करना कितना डरावना होता है, कैसा लगता है, जब आपकी जिंदगी में नकारात्मक नतीजों की भरमार होती है, और आप, कोई भी बदलाव को करने में, खुद को असमर्थ पाते हैं|

अगर आप वर्तमान में, किसी ऐसी ही परिस्थिति से गुजर रहे हैं तो मेरी सहानुभूति आपके साथ है| परन्तु उससे भी जरूरी बात यह है कि मेरे पास एक समाधान है जिसे मैं आपके साथ बांटना चाहता हूँ| मेरे विचार से अब तक आप समझ चुके होंगे कि जिस हालत से आप गुजर रहे हैं, उसका कोई फौरी (quick fix) समाधान नहीं है, लेकिन एक व्यावहारिक समाधान जरुर है| आपका डिप्रेशन, किसी भी तरह से स्थायी नहीं है| यह समाधान काम करेगा अगर आप इसे समझने के लिए वक्त देंगे और जितनी भी ऊर्जा आप जुटा सकें उसका इस्तेमाल, इस पर अमल करने में करेंगे| यह कोई ‘सब-कुछ या कुछ भी नहीं’ (all-or-nothing) तरह का समाधान नहीं है, इसलिए इसका, आंशिक(partial) रूप से प्रयोग करने से भी आपको आंशिक नतीजे मिलने लगेंगे| और जानते है इसकी सबसे अच्छी बात क्या है?, इसके लिए आपको शारीरिक रूप से, सीधे तौर पर, कोई प्रयास करने की जरूरत नहीं है| आप इस पूरी प्रक्रिया को अपने बिस्तर में लेटे-लेटे भी संपन्न कर सकते हैं|

इस प्रक्रिया का एक अच्छा पहलु यह है कि एक बार आपने, अपने डिप्रेशन पर काबू पा लिया तो फिर आप, अपने इस अनुभव को दूसरों लोगों के साथ बाँट कर उनकी मदद कर सकते हैं| इसलिए अभी इसे सहन करना आपके लिए भले ही कठिन क्यों न हो, लेकिन एक ऐसा दिन आएगा जब आप, मुड कर इस वक्त को, एक अमूल्य तोहफे के तौर पर देखेंगे और पाएंगे कि आपने इस दौरान बहुत कुछ सीखा| मेरे लिए तो, यह निश्चित रूप से, सही साबित हुआ है|

निम्नलिखित पंक्तियाँ जो कि खलील गिब्रान के ग्रंथ “पैगम्बर(The Prophet)” में से हैं, कुछ गूढ़ सत्य बयान करती हैं –
“उदासी आपके अस्तित्व को जितनी गहराई तक तराशेगी, उतना ही आनंद आप थाम पाएंगे|

मधु का यह प्याला(cup) जो आपके हाथ में है, क्या यह वही प्याला नहीं है, जिसे कारखाने की भट्टी में जलाया गया है?

और यह बांसुरी जिसकी तान आपकी आत्मा को सुकून पहुंचाती है, क्या यह वही बाँस नहीं है, जिसे चाकुओं से छेद दिया गया था?    

जब कभी आप खुश हों तो अपने मन में गहरे झाँक कर देखिये और आप पाएंगे कि वही चीज, जिसने कभी आपको उदासी दी थी, आज आपको खुशी दे रही है| 

जब कभी आप उदास हों तो फिर अपने मन में झाँकिए, और आप इस सच्चाई को जान लेंगे कि जिस चीज के लिए आज आप रो रहे हैं, वह कभी आपके आनंद की वजह थी|”

डिप्रेशन की असली वजह क्या है?
मैं इस बात को, सीधे-साफ़ तौर पर कहूँगा| यह आपकी परिस्थिति नहीं, जिसके कारण आप डिप्रेशन में हैं| आपकी उदासी की वजह तो आपका उस परिस्थिति पर ध्यान देना हैं| हो सकता हैं कि आपका जीवन अनचाही परिस्थितियों से भरा हुआ हो, परन्तु वे, आपके डिप्रेशन की असली वजह नहीं हैं| प्रतिकूल परिस्थितियाँ, डिप्रेशन की वजह तभी बन सकती हैं, जब आप उन पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं| अगर आप अपना ध्यान हटा लें तो आपके हालात, आपको प्रभावित करने की शक्ति खो बैठते हैं, चाहे वे कितने ही बुरे क्यों न नजर आते हों|

एक साधारण सा उदाहरण लेते हैं| मान लीजिए कि आप कर्ज में डूबे हुए हैं, आपको कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा, और कर्जदार होना आपको बिलकुल भी पसंद नहीं हैं| फिर भी कर्जदार होना आपको तभी डिप्रेस करता है जब आप उसके बारे में सोच-विचार करते हैं| अगर आप किसी और चीज के बारे में सोचें जिससे कि आपको खुशी मिले, तो आप, थोड़ी देर के लिए ही सही, लेकिन डिप्रेशन से दूर होते हैं| इसलिए, कर्जदार होना, आपके डिप्रेशन की वजह नहीं है| यह तो आपका. कर्जदार होने पर, ध्यान देना और इसे नापसंद करना हैं जोकि आपको डिप्रेस करता हैं| 

आइए, इसे एक और उदाहरण से समझते हैं : मान लीजिए कि आप अकेलापन महसूस करते हैं| आप पाते हैं कि आपके जीवन में एक आत्मीय सम्बंध की कमी है, और इसके कारण आपको अकेलापन महसूस करते हैं| लेकिन क्या वास्तव में यह सम्बंध की कमी ही है जिसकी वजह से आपको अकेलापन महसूस होता है? यह फिर आप अकेलापन सिर्फ तभी महसूस करते हैं जब आप इस सच्चाई पर ध्यान देते हैं कि जिस सम्बंध की आपको उम्मीद थी वह आपको नहीं मिला? जब आप कोई अच्छी सी फिल्म देखने में पूरी तरह से मग्न होते हैं, या फिर कोई दिलचस्प किताब पढ़ने में व्यस्त होते हैं, तो आप, पूरी तरह से, अपने अकेलेपन के बारे में भूल जाते हैं, सच है न| लेकिन अगर आप, अपने आस-पास देखें, और पाएं कि आप बिलकुल अकेले हैं, या फिर आप एक खुशहाल जोड़े(couple/दम्पति) को देखें और अपनी हालत से उसकी तुलना करें, तो आपका अकेलापन फिर से लौट आता है|

मैं जानता हूँ कि यह बेहद साधारण सी और शायद बेकार की बात लगती है, लेकिन एक पल रुकिए और सोचिए| मेरे विचार से आप यह तो स्वीकार करेंगे कि आप डिप्रेशन सिर्फ तभी महसूस करते हैं जब आप नकारात्मक परिस्थितियों पर ध्यान देते हैं, जैसे कि धन की कमी, सम्बंध की कमी, या फिर अच्छे स्वास्थ्य की कमी| लेकिन यही तो मूल तथ्य है कि आपकी परिस्थितियाँ, आपके डिप्रेशन की असली वजह नहीं हैं| आपके डिप्रेशन का असली कारण, आपका उन पर ध्यान देना हैं... खास तौर पर आपकी, उन चीजों पर, ध्यान देने की आदत, जिन्हें आप पसंद नहीं करते हैं| स्थायी डिप्रेशन के मामलों में तो इस बात की काफी संभावना है कि आपको, अभी वर्तमान में उन्हीं चीजों का अनुभव हो रहा हो जिन्हें आप बिलकुल भी पसंद नहीं करते हैं| लिहाजा, जो आपको वर्तमान में मिल रहा है, सिर्फ उस पर ध्यान देना ही, आपके डिप्रेशन का प्रमुख कारण हैं|

डिप्रेशन के घातक जाल को पहचानिए
यही वजह है कि डिप्रेशन का जाल इतना घातक होता है| एक बार आप निराशा के उस स्तर तक पहुँच जाएँ, जहां पर आपको वह हासिल न हो रहा हो जो कि आप चाहते हैं, और आप बार-बार इस सच्चाई पर ध्यान देते रहें कि आपको वह नहीं मिल रहा जो आप चाहते हैं, तो आपका डिप्रेशन खुद को ही सहारा देने लगता है और आप बुरी तरह से फंस जाते हैं|

आपने देखा...कि जो भूल आप कर रहे हैं और जिसकी वजह से आप डिप्रेशन में फंसे हुए हैं, वह इतनी चकरा देने वाली है कि आप शायद यह सोचने लगें कि आप उचित समझदारी से काम ले रहे हैं जबकि हकीकत में आप बिलकुल अनाड़ी साबित हो रहे हों| आप शायद यह सोचें कि यह तो सहज ज्ञान है कि आपको अपनी परिस्थितियों का अवलोकन(observe) करना चाहिए, और जो आपको मिल रहा है उसे ध्यान में रखकर, उचित प्रतिक्रिया देनी चाहिए| लेकिन ऐसा करने पर आप गलत साबित होंगे| अगर आप डिप्रेशन में हैं तो यह, आपके लिए शायद, सब से ज्यादा नुकसानदेह योजना साबित हो| मैं जानता हूँ कि यह, सहज ज्ञान के एकदम उलट बात लगती है, लेकिन यही कारण है कि क्यों डिप्रेशन की वजह से लाखों लोग इतनी तकलीफ में रहते हैं| सहज ज्ञान से सोच-विचार करना, इस जाल का ही एक हिस्सा है| इसी वजह से कुछ, बेहद समझदार लोग भी लंबे समय के लिए डिप्रेशन के शिकंजे में फंस जाते हैं और यहाँ तक कि खुदकुशी भी कर लेते हैं| डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए उनका सबसे बेहतरीन, बुद्धिमानी भरा प्रयास भी, उन्हें इसमें और ज्यादा उलझा देता है| आप जितना अधिक जोर, बाहर निकलने के लिए लगाएंगे, आपका डिप्रेशन उतना ही बदतर होता चला जायेगा|

डिप्रेशन से निकलने में निरंतर असफल होने के कारण कई लोग, थोड़ी समय की राहत पाने के लिए, दवाइयों, शराब, नशीले पदार्थों, टीवी, विडियो गेम्स, या फिर और भी दूसरी आदतें जो कि उनकी सजगता को कम कर देती हैं, का सहारा लेने लगते हैं| यकीनन, इनमें से कोई भी चीज, आधारभूत नकारात्मक परिस्थितियों का समाधान नहीं करती| बल्कि ये चीजें तो उन्हें(परिस्थितियों को) और भी बदतर बना देती हैं| अपनी समस्याओं से भागने से तो आप, कर्जे से बाहर नहीं निकल सकते, प्रेम पर आधारित सम्बंध नहीं बना सकते, या अपनी सेहत में सुधार नहीं कर सकते हैं|    

डिप्रेशन का समाधान
डिप्रेशन का समाधान, दरअसल बहुत ही सरल है, लेकिन ज्यादातर लोगों के लिए यह सहज ज्ञान के एकदम उलट है (बशर्ते आप ‘आकर्षण के नियम’ के अनुसार अपने जीवन को न ढाल चुके हों)| इसका समाधान है कि आप, अपने ध्यान को, जो चीज आपको डिप्रेस करती है, उससे हटा कर वहाँ लगा दे, जिससे आपको खुशी, बेहद खुशी महसूस होती है| अगर आप स्थायी डिप्रेशन में हैं तो यह संभव है कि आपके जीवन में ऐसा कुछ भी न हो जिससे आपको खुशी का एहसास हो| आपकी पूरी परिस्थिति ही, ऊपर से नीचे तक, अप्रिय हो सकती है| अगर आप इस स्थिति में है तो अपना ध्यान, अपने बाहरी परिवेश से, हटा कर कल्पना(imagine) करने में लगा दें| अपने मन की दृष्टि से आपको उन कल्पित परिस्तिथियों का निर्माण करना होगा, जिनके बारे में सोचने से आपको अच्छा महसूस होता है| फिर आप, अपना ज्यादा वक्त, ख्याली महल बनाने में लगाएं और अपने बाहरी परिवेश पर कम ध्यान दें|

यह पलायन की तरह लग सकता हैं लेकिन आप समस्या से भागने का प्रयास नहीं कर रहे हैं| आपका उद्देश्य तो अपनी कल्पना में, उन नई, सजीव परिस्थितियों का निर्माण करना है जो आप को आकर्षक लगें| कल्पना कीजिए कि आपका कैसा महसूस होगा, अगर आप के पास धन-दौलत की कोई कमीं न हो, प्रेम सम्बंध हो, सेहत अच्छी हो, व्यवसाय अच्छा चल रहा हो, और भी बहुत कुछ|

शुरुआत में यह सब करना काफी कठिन हो सकता हैं, लेकिन, अभ्यास करने से आप इसमें बेहतर होते चले जाएंगे| बेशक आपको अभी भी अपनी बुनियादी जरूरतों पर ध्यान देना होगा और कुछ बाहरी समस्याओं को, जितना संभव हो उतने बेहतर तरीके से हल करना होगा| लेकिन, उन पर बस उतना ही ध्यान दें जितना कि जरूरी हो| अपनी समस्याओं पर, बस इतना ही ध्यान दें, जिससे कि आपका काम चल सके| और फिर बाकी का समय, अपनी कल्पना में व्यतीत करें|
 
अपनी कल्पना में आपको कुछ भी ऐसा, जो आप को अच्छा लगे, करने की पूरी आजादी है| वहाँ किसी भी तरह की कोई पाबंदी नहीं होती है| आप ऐसा कुछ भी सोच सकते हैं जिससे कि आपको खुशी मिले| कल्पना कीजिए कि वे वास्तविक हैं और उनका आनंद लीजिए| अपने सपनों के घर का निर्माण कीजिए| दुनियाभर में घूमिए| अपने आदर्श दोस्त बनाईए| अपने लिए आदर्श सम्बंध की कल्पना कीजिए| खुद को महाशक्तियाँ दीजिए और दुनिया की रक्षा कीजिए|

खुद के प्रति सहनशील बनिए| अगर आप खुद को, अपनी समस्याओं की चिंता करते हुए पाएं, तो अपने मन की सकारात्मक सृष्टि(creations) में वापस लौट जाएँ और उन्हें बेहतर बनाएँ| मुझे तो सबसे पहले, इमारतों के, निर्माण पर ध्यान देना पसंद है| मैं इनके बारे में जितना अधिक सोचता हूँ, उतनी ही ज्यादा चीजें, इसमें जोड़ता जाता हूँ| मैं इसमें लगातार बदलाव करता रहता हूँ ताकि यह और भी बेहतर होता चला जाए|

अपनी कल्पना में, मैंने एक बहुत बड़ा १०० एकड का, एक फ़ार्म बनाया है (सतीश - कल्पना में आप जितनी चाहे उतनी जमीन के मालिक बन सकते हैंJ), जहाँ पर मैं (अपने मन में) जहाँ चाहूँ, वहाँ घूम-फिर सकता हूँ| मैं काल्पनिक स्वीमिंग पूल में तैर सकता हूँ, टेनिस खेल सकता हूँ, जिम (व्ययामशाला) में वर्जिश कर सकता हूँ, अपने खुद के आफिस में बैठ सकता हूँ, चारदीवारी के साथ-साथ दौड़ लगा सकता हूँ, शांत कमरे में ध्यान लगा सकता हूँ, खूबसूरत बगीचे में टहल सकता हूँ या फिर अपने पैरों को झरने के पानी में डाल कर बैठ सकता हूँ| यहाँ तक कि मैं, वहाँ रहने वाले किरदारों (व्यक्तियों) से दिलचस्प बातचीत भी कर सकता हूँ| मेरी कल्पना में इस जगह की इतनी स्थिर छवि बन चुकी है कि मैं इसे कहीं स्पष्ट रूप से याद कर सकते हूँ बजाय उन जगहों के जहाँ पर मैं वाकई में घूम चुका हूँ| और मैं जब भी चाहूँ, यह उपलब्ध होती है| जब मैं ध्यान लगाने बैठता हूँ तो अक्सर, अपनी कल्पना में, मैं वहाँ पहुँच जाता हूँ, और अपना वक्त इसे और थोड़ा और बेहतर बनाने में लगाता हूँ| 

इससे डिप्रेशन कैसे दूर होगा ?
जैसे-जैसे आप, अपना ध्यान बाहरी नकारात्मक परिस्थितियों से हटा कर इसे, सकारात्मक काल्पनिक विचारों पर लगाने लगते हैं, तो आप, अपना काफी वक्त अच्छा महसूस करते हुए बिताएंगे, न कि बुरा महसूस करते हुए, इससे आपके डिप्रेशन का कोहरा धीरे-धीरे छंटने लगेगा|

जितना अधिक, आप अपने विचारों में परिवर्तन लाएंगे, उतनी ही तेजी से आपका डिप्रेशन दूर होगा| यह साफ़ तौर पर ज्यादा समय, वह सोचने में जिससे आपको खुशी महसूस होती है, में लगाने और जो आपको डिप्रेस करता है, उस पर अपना कम समय, देने का ही परिणाम है|

अब, फिर से अच्छा महसूस करना बढ़िया बात है, लेकिन आपकी नकारात्मक परिस्थितियों का क्या?

हालाँकि आप बेहतर महसूस कर रहे हैं, लेकिन शायद आप, अभी भी समस्याओं के बोझ तले दबे हुए हों| चिंता मत कीजिए| इस तरीके से आपको अपने हालात को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी|

आपकी परिस्थितियों में दो तरह से सुधार होगा| पहले, क्योंकि आप बेहतर महसूस कर रहे हैं, इसलिए आप, खुद अपनी मदद करने के लिए ज्यादा उत्साहित होंगे| डिप्रेशन आपको अक्षम(disempower) बना देता है, लेकिन सकारात्मक भावनाएँ आपको सक्षम(empower) बनाती हैं| इसलिए जब आप बेहतर महसूस कर रहे होते हैं तो इस बात की संभावना अधिक हो जाती है कि आप कर्जे से उबरने के लिए उचित कदम उठाएंगे, बजाय उस वक्त के जब आप उदास हों| डिप्रेस्ड लोग अपनी समस्याओं पर ही सोचते रहते हैं, लेकिन जैसे-जैसे आपका डिप्रेशन दूर होने लगता है, आप समाधानों के बारे में सोचना शुरू कर देते हैं|

दूसरा सुधार यह होगा कि जब आप अच्छा महसूस कर रहे होते हैं तो ‘आकर्षण के नियम’ के कारण, बिना अधिक प्रयास के, आपके जीवन में ज्यादा सकारात्मक नतीजे आने लगते हैं| मैं (स्टीव पेव्लीना), इसके काम करने के तरीके को पूरी तरह से समझने का दावा तो नहीं करता हूँ लेकिन मैं इसे इतनी बार काम करता हुआ देख चुका हूँ कि संदेह करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता| और ‘दस लाख रूपये का प्रयोग’(लेख जल्द ही उपलब्ध होगा) के पीछे भी यही सिद्धांत है| जब आप, अपनी किसी इच्छा के बारे में सोचते है और ऐसा करने से आपको अच्छा महसूस होता है, तो आप इसे, उन तरीकों से, अपनी तरफ आकर्षित करने लगते हैं, जिन्हें आपके (प्रत्यक्ष/direct रूप से) कार्य करने के नतीजों के आधार पर, नहीं समझा जा सकता है| यह कुछ ऐसा है जैसे कि आपकी किस्मत आपका साथ देने लगी हो|

आपके प्रत्यक्ष रूप से काम करने और आकर्षण के नियम के एक साथ सक्रिय होने की वजह से, आपकी नकारात्मक परिस्थितियां पूरी तरह से बदल जाएंगी| इसके काम करने के लिए एक जरूरी शर्त यह है कि आप वह सोचें जो आप चाहते हैं और जिसे सोचकर आपको अच्छा महसूस होता है|

स्थायी डिप्रेशन से जीवन भर के आनंद की ओर
क्या आपने इस बात को कभी महसूस किया है कि आपकी आजादी(स्वतंत्रता), कितना असाधारण तोहफा है? बाहरी आजादी के एकदम उलट, आपके पास, आपकी मानसिक आजादी हमेशा होती है| आपको, अपने मन में किसी भी ऐसे विचार को, जिसकी आप कल्पना कर सकें, रखने की पूरी आजादी है – इतनी आजादी कि अपनी शक्ति को समझनें में असफल रहने पर, आप अपने जीवन को एक उदास नर्क बना लेंगे... यह फिर, अगर आपने इस पर नियंत्रण कर लिया तो, इसे एक आनंदमय स्वर्ग बना सकते है|       

क्या आप अभी भी, जिसे आप नहीं चाहते, उस के बारे में सोच कर खुद को तकलीफ पहुँचा रहे हैं? आपको अपने जीवन में जो चीज पसंद नहीं है, सिर्फ उस पर ध्यान देने और विचार करने से, आप एक नकारात्मक अवस्था के जाल में फंस सकते हैं| अपने ध्यान को, ऐसे विचारों से हटा कर, वहाँ पर केंद्रित कीजिए जिसकी आपको वाकई में इच्छा है, चाहे आपके पास, केवल अपनी कल्पना में ध्यान लगाने का ही एकमात्र विकल्प क्यों न उपलब्ध हो| अपनी कल्पना को ही अपने सकारात्मक विचारों का निजी आश्रय-स्थल(private refuge) बन जाने दीजिए| अपनी रचनात्मक कल्पना का उपयोग, खुद को, ‘बेहतर महसूस कराने’ की अवस्था में पहुँचने के लिए कीजिए, आपके बाहरी हालात चाहे जैसे भी हों| इससे ‘आकर्षण का नियम’ सक्रिय हो जाएगा, और जल्द ही आपकी बाहरी परिस्थितियाँ भी, आपके विचारों के स्वरूप से मेल-खाती हुईं, बेहतर होती चली जाएंगी| और एक वक्त ऐसा भी आएगा जब आपके हालात इतने बेहतर हो जाएंगे कि सिर्फ, जो आपको मिल रहा है, उस पर ध्यान देने भर से ही, आप रोमांच से भर उठेंगे| और आप, डिप्रेशन के ‘बद-से-बदतर’ होते हुए चक्र के बजाय, अपने जीवन को ‘अच्छे-से-बेहतर’ बनते हुए चक्र में स्थानांतरित(shift) कर देंगे|

अगर आप अपनी बाहरी वास्तविकता को बदलना चाहते हैं तो पहले आपको अपनी भीतरी वास्तविकता को बदलना होगा|         
[यह article आपको कैसा लगा, कृपया comments के जरिए इस पर अपनी राय जाहिर करें, अगर आपके पास इस article से जुडी कोई जानकारी या सुझाव हो तो आप उसे 3kbiblog@gmail.com पर भेज कर हमारे साथ share कर सकते हैं | ]

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31 टिप्‍पणियां:

  1. आलेख अच्‍छा है लेकिन बहुत बड़ा है। अवसाद ना घेर ले इसलिए इसे बीच में ही छोड़ रही हूँ।

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  2. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.com

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  3. lekh bahut achcha aur prerak hai ...magar depressed insaan man ke tal par hi to hara hua hota hai ..uske liye vicharo ko sahi disha dena bahut mushkil ho jata hai ...mere khyaal se aise vakt me use apne routine ko jarur follow karna chahiye , dheere dheere vo unme mentaly bhi engage ho jata hai ...haan perfect change man ke level par ho tabhi vo hamesha ke liye depression ki quaid se mukt ho sakta hai ...maine bhi is par likha hua blog par dala hua hai ...

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  4. आलेख पसंद करने के लिए आप सभी का धन्यवाद|
    आशा है कि आप आगे भी ऐसे ही मेरा होंसला बढाते रहेंगे|

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  5. तो आपने "रहस्य" जान लिया है.. :) पहली बार जब मैने पूरी शक्ति से कल्पनाओं पर नियंत्रण किया था तो कुछ चमत्कार सा देखने को मिला.. जो चीजें मुझे अक्सर नहीं मिलती.. वो चींजे अगर ऐसे ही सामान्यतया मिल जाये तो समझ में आता है कि जरूर कुछ लोचा तो है.. सब कुछ भाग्य नहीं है.. हौसलों से भाग्य बनता है.. और हौसले से डिप्रेशन क्या? रोगी शरीर भी स्वस्थ हो जाता है.. हमेशा खुश रहना शुरू में कठिन तो लगेगा.. लेकिन बाद में आदत सी बन जाती है.. और ये आदत दूसरों को गुदगुदाती है.. और वो कहते हैं - यू हैव अ गुड सेंस ऑफ ह्यूमर!! ;)

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  6. शुक्रिया मनीष,
    आपके विचार जानकर बहुत अच्छा लगा| कुछ पंक्तियाँ बरबस ही याद आ गयीं|
    "जितना अपनाओगे उतना ही निखर जाएगी, जिंदगी खवाब नहीं है कि बिखर जाऐगी |"

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  7. bahut achchha aur vyavharik hai.thoda lamba hai per shayad chhota karne per adhoora rah jata. bahut bahut dhanyawad.

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  8. शुक्रिया, अविनाश जी

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  9. मुझे ये सब करने से आनंद मिल सकता हैं , पर मैं ऐसा कर नहीं पता हूँ |जब मैं दुनिया से दूर भागता हूँ तो अवसाद में आ जाता हूँ और ऐसा चाहता हूँ कि कोई आकर मुझे वहां से निकले | मैं खुद नहीं निकल पता | अगर कल्पना लोक में ही रहूँगा तो मेरा पढाई का कम अधुरा रह जायेगा और पढने से मैं इस समस्या से नहीं निकल पता हूँ |जो चीजें पसंद नहीं हैं वो ही जीवन में ज्यादा उपयोगी हैं तो मैं क्या करू ? उनसे कैसे दूर जाऊ ?

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  10. इस ब्लॉग में रुची लेने के लिए आपका धन्यवाद दिनेश जी| यकीन मानिए कि इस लेख को अनुवाद करने के पीछे मेरा सिर्फ एक ही उद्देश्य है और वह है आप ही की तरह, उन सभी व्यक्तियों की मदद करना जोकि व्यक्तित्व विकास की राह पर हैं| मैं खुद भी काफी वक्त तक डिप्रेशन के जाल में फंस चुका हूँ, इसलिए मैं आपकी स्थिति को अच्छी तरह से समझ सकता हूँ|
    काल्पनिक परिस्थतियों के निर्माण करने का अर्थ पलायन करना नहीं है| यहाँ आप हालात से भागने की कोशिश नहीं कर रहे हैं बल्कि आप तो परिस्थितियों को पूरी तरह बिना किसी शर्त का स्वीकार कर रहे हैं| यह समाधान, अपने हालात को स्वीकार करने और फिर उसे सुधारने के लिए कुछ काम करने का तरीका है| आप डिप्रेशन को बाहरी दुनिया में नहीं हरा सकते क्योंकि बाहरी दुनिया या परिस्थितयों पर आपका बहुत कम नियंत्रण होता है, आप इसे सिर्फ खुद अपने अंदर ही हरा सकते हैं जहां पर आपका पूरा नियंत्रण होता है (और जहां डिप्रेशन की जड़ होती है)|

    क्या आप जानना चाहेंगे कि एक 14 साल के किशोर ने, जिसका भविष्य पूरी तरह से अन्धकार में गुजरना लगभग तय था, उसने खुद को डिप्रेशन से बाहर कैसे निकाला और कैसे उसने stevepavlina.com, की नीवं डाली जिसे लाखों लोग रोजाना पढते हैं और फायदा उठाते हैं, तो आपको यह ऑडियो जरुर सुनना चाहिए, जोकि नीचे दिए गए लिंक पर उपलब्द्ध है|
    podcast-001-intro-to-personal-development

    इसके अलावा इस ब्लॉग में कुछ और लेख हैं जिन्हें आप पढ़ सकते हैं :
    २० मिनट में कैसे आप अच्छा महसूस कर सकते हैं?
    आत्म-अनुशासन:स्वीकृति
    जीवन का महान खेल
    खुद को साधिए !

    आप चाहें तो अपना ई-मेल पता मुझसे शेयर कर सकते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  11. shuru mein padhte samay aisa lag raha tha ki kuch fayda hoga lekin baad mein kaafi boring laga. kuch baat acchi lagi jaise negative baato se dhyan hata lena.

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  12. धन्यवाद अर्चना जी| दिनेश जी आपका भी धन्यवाद|

    उत्तर देंहटाएं
  13. mai bhi 4 mahine se depression me hu, jyad tar subah se saam ko 6-7 baje tak pareshan rahata hu uske bad sone tak thik rahata hu.akhir kya karun,

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  14. आप इस लेख में बताई गई बातों पर अमल करके देखिए आपको, अपनी मनस्थिति में फौरन फर्क नजर आने लगेगा| अधिक जानकारी के लिए आप डेल कार्नेगी की पुस्तक "चिंता छोड़ो सुख से जियो" पढ़ सकते हैं| बस इतना याद रखिये कि डिप्रेशन आपकी रचना है, अगर आप इसे बना सकते हैं तो जड़ से मिटा भी सकते हैं|

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  15. बहुत अच्छा है लेकिन सफलता कब मिलती है जिस की मुझे जरुरत है bharatraj105@gmail.com

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. धन्यवाद,
      दोस्त सफलता या असफलता हमारे हाथ में नहीं होती, ज़रा सोचिए कि अगर किसी भी काम में सफल या असफल होना हम चुन पाते तो कोई भी व्यक्ति असफल होने को क्यों चुनता| जैसा कि किसी महान व्यक्ति ने कहा है कि "असफलता वे सीढियां हैं जिन पर चलकर हम सफलता तक पहुँचते हैं"|

      सिर्फ कोशिश करना हमारे हाथ में होता है, तो फिर अपनी पूरी कोशिश करते रहिए जब तक की आप सफल नहीं हो जाते| अपना पूरा ध्यान काम में अपना 100% देने पर रखिए और जल्द ही सफलता आपके कदम चूमेगी|

      हटाएं
    2. ऐसा नही है सतीस जी कुछ बाते ऐसी होती है जिसके जो दिमाग में जगह बना लेती है असफलता का मुख्य कारन है नकारात्मक सोच मै एक छोटी सी बात कहूँगा जिसमे बहुत गहराई और ये आपके नकारत्मक सोच को बदल देगी ((" मै सिर्फ एक एक बात कहूँगा अपनी जिन्दगी को एक नाव के तरह बनाओ नाव के बाहर पानी ही पानी होता है जहा तक देखो पानी हे पानी लेकिन नाव डूबता कब है जब वो उस पानी को अपने अन्दर आने देता है उसी तरह नकारात्मक बाते की ढेर लगी दुनिया में लेकिन इन बातो को जबतक आप अपने अंदर नही लाओगे तब तक आपका कोई कुछ नही बिगाड़ पाता आप कभी उदास नही हो सकते नकारत्मक विचारो का दिल में घेरा हो जाना ही डिप्रेसन है))

      हटाएं
  16. आपके लेख ने मेरी जिंदगी मै नई शक्ति जग दी।
    धन्यवाद आपका लेख शायद मेरे लिए ही लिखा गया था।

    उत्तर देंहटाएं
  17. मै सिर्फ एक एक बात कहूँगा अपनी जिन्दगी को एक नाव के तरह बनाओ नाव के बाहर पानी ही पानी होता है जहा तक देखो पानी हे पानी लेकिन नाव डूबता कब है जब वो उस पानी को अपने अन्दर आने देता है उसी तरह नकारात्मक बाते की ढेर लगी दुनिया में लेकिन इन बातो को जबतक आप अपने अंदर नही लाओगे तब तक आपका कोई कुछ नही बिगाड़ पाता आप कभी उदास नही हो सकते नकारत्मक विचारो का दिल में घेरा हो जाना ही डिप्रेसन है

    उत्तर देंहटाएं
  18. कुछ नही हो सकता हे मेरा क्योंकि में ना तो लोगो में बोल पाता हूं ना लोगो को समझ सकता हूँ

    उत्तर देंहटाएं
  19. मुझे हर वक्त्त ड़र लगा रहता हैं कहीं शादी हो या और कुछ प्रोत्राम मन में डर रहता हैं गलत विचार ही आते हैं

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. केवट जी इस ब्लॉग पर आपका स्वागत है| मैं अपने अनुभव से एक बात कहना चाहूँगा कि डिप्रेशन से बाहर निकलना थोड़ा मुश्किल जरुर है लेकिन असंभव बिलकुल नहीं| दुनिया में लाखों लोग कोशिश करके इससे बाहर निकल चुके हैं| नीचें मैंने कुछ लेखों की सूची दी है जिन्हें आप पढ़ सकते हैं| उम्मीद है कि इनसे आपको अपनी स्थिति समझने में मदद मिलेगी|

      http://www.guide2india.org/social-phobia-in-hindi/

      http://www.onlymyhealth.com/social-anxiety-disorder-causes-and-treatments-in-hindi-1380632538

      https://www.artofliving.org/in-hi/yoga/health-and-wellness/yoga-for-anxiety-disorder

      http://whatsknowledge.com/phobia-a-to-z-in-hindi/

      हटाएं
  20. लेख बहुत अच्छा है और प्रेरणास्त्रोत है

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  21. मैं हमेशा कल्पना के ही जीवन में जीता हूँ,किसी को देख लूँ तो कल्पना करने लगता हूँ,कोई घटना हो गरीब हो तो कल्पना करने लगता हूँ मैं बहुत परेशान हूँ इस समस्या से मन मेरा मेरे बस में नहीहै।

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  22. लेख बहुत ही सुज्जजित तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

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