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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

दिल से नाता जोड़िए

Original Post : Connecting From the Heart, Nov 17th, 2010 by Steve Pavlina)   

आप कैसे, अपने किसी करीबी व्यक्ति के साथ हार्दिक सम्बंध बनाएंगे?

मेरे विचार से सबसे अच्छा तरीका है कि आप दूसरे व्यक्ति को यह इजाजत दें कि वह आपको बिना परदों(curtains) के देख सके|

मेरे उद्देश्य, यहाँ शारीरिक परदों से नहीं है बल्कि भावनात्मक-आध्यात्मिक परदों से है|

जब आप दूसरे व्यक्ति के साथ बातचीत कर रहे हों, तो अपने कैरियर के बारे में बात करें; और फिर उस विषय पर अधिक जोर न देकर, उसे विषय को छोड दीजिए| अपने गुजरे हुए कल के बारे में बात करें; और फिर उसे छोड दीजिए| अपने दूसरे संबंधों के बारे में बात करें; और फिर उन्हें भी जाने दें|

बिना किसी विषय को दोहराए, बातचीत करना और सम्बंध बनाना जारी रखिए| आखिरकार आप, एक ऐसे विचार से जा टकराएंगे जिसके बारे में सोचने से आपको तकलीफ होती है| और यहीं पर आपको हिम्मत जुटाने की जरुरत होगी ताकि आप इस विषय की छानबीन कर सकें और इसे दूसरों के साथ बाँट सकें|

Last Modified: शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

क्या आप अपनी धुन मन में ही लिए दुनिया से चले जाएंगे?

Original Post : Don’t Die With Your Music Still in You, Jan 8th, 2005 by Steve Pavlina)
  
क्या हो अगर आपकी वर्तमान जीवन शैली(lifestyle)बेहद आरामदायक हो और आपके पास संपत्ति की कोई कमी न हो? और अगर आपके वह काम करने से जिससे आपको खुशी मिलती है, इस संपत्ति के छिन जाने का डर हो तो आप इसे कैसे उचित ठहराएंगे?

मेरा (स्टीव पव्लिना) का ख़याल इस बारे में कुछ ऐसा है...

एक ऐसी जीवन शैली को छोड देना जिससे कि आपको गहरी संतुष्टी(fulfillment) ना मिलती हो, धूल को छोड़ने के बराबर है| इसमें मूल रूप से ऐसी कोई भी चीज नहीं होती जिसकी रक्षा आप करना चाहें| एक वेतन, एक कार, एक मकान, या फिर एक जीवन शैली इस लायक नहीं हैं कि उनकी सुरक्षा की जाए, अगर इस सुरक्षा के बदले आपको, अपनी आत्म-संतुष्टि और खुशी की कुर्बानी देनी पडे| वे लोग, जो बिना आत्म-संतुष्टी के, सिर्फ भौतिक कामयाबी के जाल में फंसे हुए हैं, उनका खुद को यह कह कर बहलाना कि, उनके पास कुछ ऐसी मूल्यवान(valuable) चीजें हैं जिनकी सुरक्षा उन्हें करनी चाहिए, एक भ्रम के अलावा और कुछ भी नहीं है| अधिकतर मामलों में यह एहसास कि कुछ है जिसकी रक्षा करनी चाहिए, असली डर से मुहँ छुपाने का सिर्फ एक बहाना भर होता है – कि शायद हकीकत में यह सब सामान, उस खुशी के मुकाबले जो मैंने खो दी है, धूल के बराबर है... शायद मुझे ज्यादा निडर होकर अपना जीवन जीना चाहिए और मेरे सामान का क्या अंजाम होगा इसकी इतनी फ़िक्र नहीं करनी चाहिए|

Last Modified: मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

अपने लक्ष्य को हासिल करने का बेहतर तरीका कौन सा है?

 (Original Post : Cause-Effect vs. Intention-Manifestation, Oct 17th, 2005 by Steve Pavlina)
अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए उपलब्ध आदर्शों में से एक है, कारण और परिणाम का| इस आदर्श के मुताबिक़, आपका लक्ष्य, वह परिणाम है जो आपको हासिल करना है| और आपका काम है उस कारण की पहचान कर, उसका निर्माण करना, ताकि आपको मनचाहा परिणाम मिल सके, और आप, अपना लक्ष्य हासिल कर पाएं|    

सुनने में काफी आसान लगता है, है न?

परन्तु, इस आदर्श तरीके के साथ एक प्रमुख समस्या है कि इसे समझने में, लगभग सभी व्यक्ति गंभीर रूप से ग़लतफ़हमी के शिकार होते हैं| और इस ग़लतफ़हमी की वजह है, यह न जानना कि असली ‘कारण’ आखिर है क्या?

आप यह मान सकते हैं कि परिणाम का कारण, शारीरिक और मानसिक क्रियाओं की एक श्रृंखला(series) हो सकती है, जिससे कि वह परिणाम हासिल होता है| क्रिया-प्रतिक्रिया| अगर आपका लक्ष्य, खाना बनाना है तो शायद आप सोचने लगें कि खाना तैयार करने के ‘चरणों की श्रंखला’(series of steps) ही वह कारण होगी|