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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

क्या आप अपनी धुन मन में ही लिए दुनिया से चले जाएंगे?

Original Post : Don’t Die With Your Music Still in You, Jan 8th, 2005 by Steve Pavlina)
  
क्या हो अगर आपकी वर्तमान जीवन शैली(lifestyle)बेहद आरामदायक हो और आपके पास संपत्ति की कोई कमी न हो? और अगर आपके वह काम करने से जिससे आपको खुशी मिलती है, इस संपत्ति के छिन जाने का डर हो तो आप इसे कैसे उचित ठहराएंगे?

मेरा (स्टीव पव्लिना) का ख़याल इस बारे में कुछ ऐसा है...

एक ऐसी जीवन शैली को छोड देना जिससे कि आपको गहरी संतुष्टी(fulfillment) ना मिलती हो, धूल को छोड़ने के बराबर है| इसमें मूल रूप से ऐसी कोई भी चीज नहीं होती जिसकी रक्षा आप करना चाहें| एक वेतन, एक कार, एक मकान, या फिर एक जीवन शैली इस लायक नहीं हैं कि उनकी सुरक्षा की जाए, अगर इस सुरक्षा के बदले आपको, अपनी आत्म-संतुष्टि और खुशी की कुर्बानी देनी पडे| वे लोग, जो बिना आत्म-संतुष्टी के, सिर्फ भौतिक कामयाबी के जाल में फंसे हुए हैं, उनका खुद को यह कह कर बहलाना कि, उनके पास कुछ ऐसी मूल्यवान(valuable) चीजें हैं जिनकी सुरक्षा उन्हें करनी चाहिए, एक भ्रम के अलावा और कुछ भी नहीं है| अधिकतर मामलों में यह एहसास कि कुछ है जिसकी रक्षा करनी चाहिए, असली डर से मुहँ छुपाने का सिर्फ एक बहाना भर होता है – कि शायद हकीकत में यह सब सामान, उस खुशी के मुकाबले जो मैंने खो दी है, धूल के बराबर है... शायद मुझे ज्यादा निडर होकर अपना जीवन जीना चाहिए और मेरे सामान का क्या अंजाम होगा इसकी इतनी फ़िक्र नहीं करनी चाहिए|

मेरे पास जीवन में अभी कुछ भौतिक साजो-सामान है| मेरे पास एक बिजनेस, कंप्यूटर, एक कार जिसकी पूरी किश्तें चुका दी गई हैं, और मैं अपनी श्रीमती जी के साथ नया घर खरीदने वाला हूँ| लेकिन यह सब केवल सामान भर है| इसका कोई महत्व नहीं है| इसमें कोई भी वास्तविक महत्व की वस्तु नहीं है| मैं इस सब को खुशी-खुशी छोड सकता हूँ और एक झोपड़ी में भी गुजर-बसर कर सकता हूँ, अगर मुझे अपने मिशन(जीवन का लक्ष्य) पर काम करने के लिए यह कीमत चुकानी पडे तो| मैं चाहता हूँ कि मेरे जीवन का महत्व, केवल सामान इकट्ठा करने और एक आरामदायक जिंदगी गुजारने से, कहीं अधिक हो| मैं अमीर होकर भी मर सकता हूँ या फिर शायद फ़कीर होकर| लेकिन मैं अपनी संगीत, अपने मन में ही लिए दुनिया से नहीं जाऊँगा|

आखिर हम, इस दुनिया में आए ही क्यों हैं? सामान इकठ्ठा करने के लिए, एक आरामदायक जीवन शैली जीने के लिए, अपने परिवार के जीवन को जितना हो सके उतना आरामदायक बनाकर और फिर मर जाने के लिए? अब पता नहीं मृत्यु के बाद भी जीवन है या नहीं, लेकिन एक बात तो साफ़ है कि हम इन वस्तुओं में से कोई एक भी अपने साथ लेकर नहीं जा सकते| हमारी आरामदायक जीवन शैली की उम्र बहुत ही कम होती है|

और अब इसका सबसे बुरा पहलू| उस वक्त, जब आप वस्तुओं/सामान को हासिल करने के लिए जी-जान से जुटे हुए होंगे, आप अचानक भी स्वर्ग-सिधार सकते हैं| आप, आज भी मर सकते हैं| आपकी मृत्यु कल भी हो सकती है| शायद आप अगले ७० वर्षों तक जीवित रहें| आज से कुछ दशकों के बाद, शायद आपकी चेतना को मानव-रूपी रोबोट में स्थानांतरित(transferred) कर दिया जाए, लेकिन आप, अपना प्रतिरूप(copy/backup) बनाने के बावजूद, फिर भी एक दुर्घटना में नष्ट हो सकते हैं| कम से कम वर्तमान में तो आप, अभी भी असुरक्षित हैं| कितने ही लोग रोजाना म्रत्यु के शिकार बनते हैं| कुछ ही वर्ष पहले, भारत और दक्षिण एशिया में आए भूकंप और सुनामी से करीब १,५०,०००+ लोगों की आकाल मृत्यु हो गयी| आखिर उनमें से कितने लोग, दिसंबर २००४ की शुरुआत में यह जानते थे कि उनके जीवन में केवल कुछ ही हफ्ते बाकी बचे हैं? और इस पर जरा गौर कीजिए कि उन सभी वस्तुओं का क्या हुआ जो उन लोगों नें जमा की थीं – वे नष्ट हो गयीं| आम मछुआरा हो या फिर टूरिस्ट – इससे कोई फर्क नहीं पड़ता| हम सभी का अंत एक ही जैसा होना है|

तो फिर अपने जीवन को, वस्तुओं को हासिल करने और उनकी रक्षा करने में समर्पित करने का क्या औचित्य(point) बनता है? आपकी सारी धन-संपत्ति, उन बाहरी शक्तियों के द्वारा, जिन पर आपका कोई जोर नहीं चलता है, आपसे छीने जा सकते हैं| आप, अपने सामान को सुरक्षित रखने के लिए चाहे जितने मर्जी बंदोबस्त क्यों न कर लें, आप कभी भी अपने सामान की संपूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पाएंगे| यह हमेशा ही असुरक्षित रहेगा| तब फिर, एक ऐसा जीवन, जिसका उद्देश्य वस्तुओं को हासिल करना और उनकी रक्षा करना ही हो, कभी भी वास्तविक रूप से सुरक्षित नहीं होगा|

तो फिर आपके पास खोने के लिए क्या है? वह क्या है जिसे गंवाने का जोखिम आप उठाएंगे अगर अपने सपनों के पीछे जाते हैं तो? अगर आपकी वर्तमान जीवन शैली आपको आत्म-संतुष्टि नहीं दे पा रही तो फिर आप कंगाली से ही शुरुआत कर रहे हैं, चाहे आपके पास धन-दौलत की कोई कमी न हो| इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आपके पास एक रुपया है या फिर लाखों| किसी भी तरह से आपके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है| धन और भौतिक संपत्ति, केवल वे संसाधन है जिनका उपयोग आपको इस दुनिया में रहते हुए ही करना है – आप उनको अपने साथ लेकर नहीं जा सकते| आप केवल, अपने जीवन से होकर गुजरने वाले धन और सामान के, एक अस्थायी प्रबंधक(manager) भर हैं| इसलिए जब आप धन का जोखिम उठाते हैं तो आप, हमेशा रहने वाली किसी चीज को खोने का, जोखिम नहीं उठा रहे होते हैं| धन कमाइए, धन का नुकसान उठाइए, धन को निवेश(invest) में डालिए| लेकिन भौतिक वस्तुओं को अपनी खुद की आत्म-संतुष्टि और खुशी से ज्यादा महत्वपूर्ण मत बनाइए|

अगर आप कुर्सी पर बैठे हुए एक ऐसी नौकरी में काम कर रहे हैं जिसे आप नापसंद करते हैं, सिर्फ इसलिए ताकि आप अपनी वर्तमान जीवन शैली को सुरक्षित रख सकें, तो आप असल में किसी चीज की रक्षा नहीं कर रहे हैं| क्या, गहरे कहीं आपके अंतर्मन में, एक ऐसा हिस्सा नहीं है जोकि बस, उस सारे कबाड(junk) से बाहर निकलकर, चले जाना चाहता है और वास्तविक जीवन जीने की शुरुआत करना चाहता है? क्या आप महसूस कर सकते हैं कि आपके दिन कितने खाली और खोखले हैं, बिलकुल निरर्थक से? क्या आप भूल चुके हैं कि वास्तव में एक ऐसा दिन जीना, जोकि आपको एक मनुष्य के तौर पर गहराई से संतुष्टी देता है, कैसा होता है? ज़रा अपने मकान और इसमें रखे सामान पर एक नजर डाल कर देखिए| इस हकीकत को जानिये कि अंततः इन सभी वस्तुओं को एक दिन धूल में ही बदल जाना है| इसमें से कुछ भी हमेशा नहीं रहने वाला| यह सब अस्थायी है| आपका मकान एक दिन जर्जर(कमजोर पड़ना, crumble) हो जाएगा| आपकी कार, आखिरकार एक दिन किसी कबाड़ख़ाने(junkyard) में पडी होगी| आप इसमें से किसी भी समान को हमेशा के लिए अपने पास नहीं रख सकते हैं| अंततः, आप इन सभी को खो बैठेंगे| या फिर ये आप को खो देंगे|

तो आखिरकार यह किस तरह की जिंदगी हैं – एक ऐसी जिंदगी जोकि धूल की रक्षा करने के लिए समर्पित है| क्या आप, अपना जीवन ऐसी ही जीना चाहते हैं? अगर आपको लगता है कि मनुष्य रूप में आपके अस्तित्व का कोई उद्देश्य तो जरुर है, तो क्या वह उद्देश्य यही है?

जीवन बहुत अनमोल होता है, इसे व्यर्थ मत जाने दीजिए| अगर आप, अपने दिन एक ऐसी नौकरी करने में गुजार रहे हैं जिसमें आपको गहरी संतुष्टि नहीं मिल पा रही है, तो आपके दिन धूल की रक्षा करने में गुजर रहे हैं| वहां पर कुछ भी वास्तविक महत्व की वस्तु नहीं है| चीजें, आपको आत्म-संतुष्टि नहीं दे सकतीं| अंततः यह सब, केवल आपको एक उद्देश्यपूर्ण जीवन(living on purpose) जीने के, रास्ते से भटकाने का ही काम करेगा|   

तो जीवन को वास्तविक रूप से जीने का क्या अर्थ होता है? अंदर गहरे कहीं, आपको पहले से ही, उस दिशा का अंदाजा है जहाँ पर इस सवाल का जवाब मौजूद है| आखिरकार, यह एक चुनाव है| जिस तरह की जिंदगी आप जीना चाहते हैं, आप वैसी जिंदगी जीने के लिए पूरी तरह से आजाद हैं| लेकिन आप जान जाएंगे कि कब आप वास्तविक रूप से जीवन जी रहें हैं, अगर आपकी जीवन शैली में कोई फर्क न पडे, जब आपको यह पता हो कि आपकी जिंदगी में केवल १८ महीने ही बाकी बचे हैं| वहीं दूसरी तरफ, यह जानने पर कि आपकी जिंदगी में केवल १८ महीने ही बाकी बचे हैं, अगर आपको जीवन जीने के अपने तरीके में कुछ बड़े बदलाव करने पड़ें, तो क्यों न उन बदलावों को अभी ही कर डालिए? इस लेख को पढ़ने वाले किसी व्यक्ति के पास शायद १८ महीने से कम का ही जीवन बचा हो| कहीं वह आप ही तो नहीं?

अपने जीवन को वास्तविक रूप से जियें| जो आपके लिए वाकई मायने रखता है, उसके लिए अपना जीवन समर्पित करें|

मेरे(स्टीव पव्लिना) लिए जो चीज मायने रखती है – जो मेरे लिए वास्तविक है – वह है लोगों को प्रेरित(inspire) करना और लोगों की मदद करना| चाहे वह सीधे तौर पर हो या फिर परोक्ष(indirectly) रूप से, जब भी मैं किसी व्यक्ति की, एक वाकई कठिन समस्या को हल करने में, मदद कर पाता हूँ, या फिर किसी व्यक्ति को, उसके जीवन की एक बड़ी रुकावट को पार करने के लिए, प्ररित कर पाता हूँ तो इससे मुझे बेहद संतुष्टि मिलती है| और ऐसा करने पर आत्म-संतुष्टि का जो एहसास मुझे होता है वह इतना जबर्दस्त होता है कि वह भौतिक वस्तुओं से मिलने वाली सभी क्षणिक(थोड़े समय के लिए, momentary) खुशियों पर भारी पड़ता है| इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि मैं इससे कितना कमा रहा हूँ| इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है अगर लोग मेरे विचारों को नकार दें या फिर, जिस काम को करने में मुझे आनंद आता है, उसका मजाक उड़ाने लगें| हो सकता है कि इस लेख को १००० से ज्यादा व्यक्ति पढ़ें, लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि इसमें बताए गए सुझावों से, केवल एक ही व्यक्ति को और वह भी बेहद छोटे स्तर पर ही, फायदा हो पाए| दूसरे ९९९ व्यक्ति शायद यह नतीजा निकालें कि मैं पागल हो गया हूँ और फिर कभी इस ब्लॉग पर वापस न आएं| और इसमें कुछ भी गलत नहीं होगा| क्योंकि मैं तो उस एक व्यक्ति के लिए ही लिख रहा हूँ|

वहीं दूसरी ओर, हर नए दिन की शुरुआत, इस विचार से करने से कि आज मुझे वह काम करना है जिससे मुझे आत्म-संतुष्टि मिले, मैं इस काम को करते हुए एक ऐसे व्यवसाय का निर्माण कर रहा हूँ जोकि मुझे और मेरे परिवार को आर्थिक सहायता दे सकता है| और अंततः आयोजक, मुझे व्याख्यान (भाषण) देने लिए बुलाने लगेंगे और इसके लिए मुझे अच्छी फीस भी मिलने लगेगी, इसके अलावा, मैं ‘जानकारी पर आधारित उत्पाद (information based products)’ जैसेकि किताबें और ऑडियो सामग्री भी बेच सकता हूँ| इस प्रकार, जिस काम में मुझे आनंद आता है, उस काम से शुरुआत करके, मैं फिर उसका निर्माण ‘आय के एक स्रोत (source of income)’ के रूप में कर सकता हूँ| मेरे बिजनेस से मुझे जितना अधिक फायदा होगा, अंततः मैं उतने ही अधिक लोगों तक अपनी बात पहुँचा पाऊंगा| इस तरह से पैसा कमाना और मेरी अपनी आत्म-संतुष्टि, एक दूसरे के  साथ-साथ चलेंगे – एक दूसरे के खिलाफ नहीं| अगर आप वह काम कर रहे हैं जिससे आपको खुशी मिलती है तो आप निश्चित तौर पर इसे ‘आय के एक स्रोत’ में बदलने का रास्ता निकाल सकते हैं – फिर तो जितना अधिक धन आप कमाएंगे, अपना पसंदीदा काम करते रहने की, अपनी क्षमता का उतना ही अधिक विस्तार आप करते चले जाएंगे और वह भी ‘बड़े और भी बड़े’ पैमाने पर|

जिस काम में आपको आनंद आता है उसे ‘आय के एक स्रोत’ में बदल देना, चाहे वह नौकरी के रूप में हो या फिर व्यवसाय के द्वारा, एक बड़ा ही लुभावना विचार है| आपको अगर इतना अधिक समय धन कमाने में खर्च करना ही है तो उस धन को, अपने सपनों को साकार करते हुए ही क्यों न कमाया जाए, बजाए धूल की रक्षा करते हुए कमाने के?

तो आपकी वर्तमान ‘कार्यों की सूची(tasks to do list)’ कैसी नजर आती है? क्या यह उन कार्यों से भरी हुई है जिनसे आप कोई जुड़ाव महसूस नहीं करते हैं? क्या आप ऐसी सामग्री टाइप कर रहे हैं जिसका कोई मतलब नहीं निकलता, उबाऊ मीटिंग्स में समय गुजार रहे हैं, बस कागज़ उलट-पलट रहे हैं और कंप्यूटर को प्रसन्न करने के लिए सुबह से शाम तक, एक बेहद दिलकश पिंजरे में बैठे हुए, फॉर्म भर रहे हैं? आप क्यों हर रोज इसी तरह की जिंदगी का चुनाव कर रहे हैं? आप कभी भी ऐसा करना रोक सकते हैं, आपको हमेशा ही ऐसा करने की पूरी आजादी होती है| आखिर खुद के लिए नियम आप ही बनाते हैं|

आपके ‘कार्यों की सूची’ में से कितने फीसदी (प्रतिशत) कार्य, पूरे होने पर आपको गहराई से आत्म-संतुष्टी देंगे? किस प्रकार की ‘कार्यों की सूची’ आप वास्तव में बनाना चाहेंगे? इसमें कौन-कौन से कार्य शामिल होंगे? संगीत की एक नयी धुन बनाना| कुछ प्रेरक वाक्य लिखना और इसे दूसरों के साथ बांटना| अपने जीवन-साथी के साथ वक्त बिताना| व्यायाम करना| अपने बच्चों के साथ खेलना| कुछ साफ़-सफाई करना| एक बढ़िया सी किताब पढ़ना| समाज सेवा करना| अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना| अपने बॉस से कहना “बस बहुत हुआ! अब आगे से मैं नीरस काम नहीं करूँगा|” ऐसा कुछ करना जिससे कि दिन के आखिर में आपको ऐसा एहसास हो कि आपने वाकई में अपना सर्वोत्तम(best) योगदान दिया है| 

अपनी धुन को दिल में ही लिए दुनिया से मत जाइए|   

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