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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

जीवन का महान खेल

(Original Post : Life-The Ultimate Game, December 1st, 2006 by Steve Pavlina)    

किसी खेल(game, कंप्यूटर गेम) के निर्माण के दौरान, एक अच्छा खेल-निर्माता(कंप्यूटर गेम-डिजाइनर) हमेशा खिलाड़ी के सामने काफी सारे ठोस विकल्प(choices) रखता है| जब तक कि दिलचस्प विकल्प उपलब्द्ध(available) रहते हैं, खेल भी मजेदार बना रहता है| लेकिन अगर विकल्प उबाऊ, अस्पष्ट, अर्थहीन और आधे-अधूरे होते हैं तो खेल भी नीरस हो जाता है... चाहे बेशक आप ईनाम में i-pod ही क्यों न जीत जाएँ|

कुछ मशहूर खेलों, जैसे कि ताश का खेल, शतरंज, और गो, में ललचाने वाले विकल्पों की कोई कमी नहीं होती| अब ज़रा ‘टिक टैक् टो’ को लीजिए| जब आप छोटे बच्चे होते हैं तो विकल्प आपको रोमांचित कर सकते हैं और खेलने से आपको खुशी भी मिलती है| लेकिन जैसे-जैसे आप बड़े होते जाते हैं विकल्प, उबाऊ(boring) और स्पष्ट हो जाते हैं और खेल, आपको रोमांचित करने की अपनी क्षमता, खोने लगता हैं|  

यहाँ तक कि कौशल(skill) पर आधारित खेल - जैसे कि ‘गोल्फ’ या फिर ‘क्वेक’(Quake), ललचाने वाले विकल्पों से भरे हुए होते हैं| इनमें ‘सामरिक(tactical, नीतिगत) विकल्प’ और ‘प्रशिक्षण विकल्प’ शामिल होते हैं| आप कौन से गुणों का विकास करना चाहेंगे और कब? आप इसमें कितना समय लगाना पसंद करेंगे? आप कैसे अपनी शक्तियों का फायदा उठाएंगे और कैसे अपनी कमजोरियों की भरपाई करेंगे?

Last Modified: बुधवार, 11 अप्रैल 2012

समाचार – जानकारी या फिर एक लत?

Original Post : Overcoming News Addiction, Sept. 26th, 2006 by Steve Pavlina)    

करीब ३० दिन पहले, मैंने(स्टीव पव्लिना नें) फैंसला किया कि मैं ख़बरें देखना बंद कर दूंगा और इसके लिए मैंने अपने भरोसेमंद तरीके, ‘३० दिनों की परीक्षण विधी’ (लेख जल्द ही उपलब्ध होगा), का उपयोग किया| टीवी समाचार देखना और अखबार पढ़ना तो मैं पहले ही बंद कर चुका था, लेकिन फिर भी मुझे ‘Yahoo News’ और ‘CNN’ को, हर एक या दो दिन में, खंगालने की आदत थी, इसलिए मैनें यह निर्णय लिया कि मैं समाचार के सारे स्रोतों(sources) को छोड दूंगा और पूरी तरह से ख़बरों से मुक्त हो जाऊंगा| मैंने इस प्रयोग में जो कुछ भी सीखा वह मैं इस लेख के जरिए आप के साथ बाँट रहा हूँ| यह प्रयोग इतना अच्छा साबित हुआ कि मैंने इरादा कर लिया है कि अब मैं रोजाना ख़बरें जांचने की आदत से दूर ही रहूँगा|

ख़बरों से दूर रहने करने की प्रेरणा
यह तो मैं पहले ही से जानता था कि समाचार के लोकप्रिय स्रोतों का झुकाव, नकारात्मक ख़बरों (लेख जल्द ही उपलब्ध होगा) की ओर कितना अधिक होता है, लेकिन इस दोष के बावजूद, मैंने अंदाजा लगाया कि ख़बरों से पूरी तरह किनारा करने के बजाय कुछ ख़बरें देखना ज्यादा अच्छा है| कुछ गिनी-चुनी ख़बरें देखना मुझे दोनों बुरी आदतों(हर खबर देखना या फिर ख़बरें बिलकुल न देखना) में से कुछ कम बुरी आदत लगी| क्या वर्तमान में जो कुछ हो रहा है उसकी जानकारी रखना जरूरी नहीं है? अगर मैंने समाचार के सारे साधनों से नाता तोड़ लिया तो क्या मैं गुफा-मानव(caveman) नहीं बन जाऊंगा - मानव सभ्यता से एकदम अलग-थलग एक व्यक्ति?