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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

जीवन का महान खेल

(Original Post : Life-The Ultimate Game, December 1st, 2006 by Steve Pavlina)    

किसी खेल(game, कंप्यूटर गेम) के निर्माण के दौरान, एक अच्छा खेल-निर्माता(कंप्यूटर गेम-डिजाइनर) हमेशा खिलाड़ी के सामने काफी सारे ठोस विकल्प(choices) रखता है| जब तक कि दिलचस्प विकल्प उपलब्द्ध(available) रहते हैं, खेल भी मजेदार बना रहता है| लेकिन अगर विकल्प उबाऊ, अस्पष्ट, अर्थहीन और आधे-अधूरे होते हैं तो खेल भी नीरस हो जाता है... चाहे बेशक आप ईनाम में i-pod ही क्यों न जीत जाएँ|

कुछ मशहूर खेलों, जैसे कि ताश का खेल, शतरंज, और गो, में ललचाने वाले विकल्पों की कोई कमी नहीं होती| अब ज़रा ‘टिक टैक् टो’ को लीजिए| जब आप छोटे बच्चे होते हैं तो विकल्प आपको रोमांचित कर सकते हैं और खेलने से आपको खुशी भी मिलती है| लेकिन जैसे-जैसे आप बड़े होते जाते हैं विकल्प, उबाऊ(boring) और स्पष्ट हो जाते हैं और खेल, आपको रोमांचित करने की अपनी क्षमता, खोने लगता हैं|  

यहाँ तक कि कौशल(skill) पर आधारित खेल - जैसे कि ‘गोल्फ’ या फिर ‘क्वेक’(Quake), ललचाने वाले विकल्पों से भरे हुए होते हैं| इनमें ‘सामरिक(tactical, नीतिगत) विकल्प’ और ‘प्रशिक्षण विकल्प’ शामिल होते हैं| आप कौन से गुणों का विकास करना चाहेंगे और कब? आप इसमें कितना समय लगाना पसंद करेंगे? आप कैसे अपनी शक्तियों का फायदा उठाएंगे और कैसे अपनी कमजोरियों की भरपाई करेंगे?

एक खेल में आपके पास कुछ संसाधन होते हैं, धन-जिसे आप खर्च कर सकते हैं| यह सोना, पॉइंट्स(points) या ऊर्जा किसी भी रूप में हो सकता है| संसाधन, उपलब्ध विकल्पों में और नए विकल्प जोड़ देते हैं : आप धन कैसे कमाएंगे? आप कितना कमाएंगे? आप अपनी आमदनी को कैसे खर्च करेंगे? आप, ‘धन कमाने’ और ‘धन कमाने की क्षमता बढाने’(आमदनी बढाने) के बीच, समय का बंटवारा कैसे करेंगे?

अब क्योंकि मैं(स्टीव पव्लिना) खुद एक ‘कंप्यूटर गेम-डिजाइनर’ रह चुका हूँ, तो मेरे लिए जिंदगी को एक ऐसे खेल के रूप में देखना, जोकि विकल्पों से भरा हुआ है, आसान था| नए खिलाड़ियों के लिए, जीवन में ऊपर बताए गए सभी संसाधन उपलब्ध होते हैं| हमारे सामने तरह-तरह के विकल्प रख दिए जाते हैं जिनमें कि, कुशलता का विकास, संसाधनों को हासिल करना, सम्बंध बनाना, और भी बहुत से विकल्प शामिल होते हैं| जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती जाती हैं, हमारे चुनाव और भी ज्यादा जटिल(complex) होते चले जाते हैं, क्योंकि बचपन की जो चीजें हमारे लिए मायने रखती थीं, वे हमें बाद में इतना प्रेरित नहीं करतीं|

फिर आखिर खेल का उद्देश्य क्या होता है? खेल का उद्देश्य होता है, अनुभव का पूरा आनंद उठाना – खुशी महसूस करना| खेल खेलने की दूसरी वजह होती है खुद का विकास करना, क्योंकि खेल एक बेहतरीन शिक्षक साबित हो सकता है| खुश रहना और सीखना, वास्तव में जिंदगी जीने का एक अच्छा तरीका नजर आता है, क्या आपको ऐसा नहीं लगता?   

तो आखिर एक अच्छे खिलाड़ी की पहचान क्या है? इसका जवाब तलाशने के लिए आपको किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचना होगा जोकि एक अच्छा खिलाड़ी है (मुझे एक नाम अनानायास ही याद आता है – ‘सचिन तेंदुलकर’- सतीश), जोकि अपनी तरफ से, अपना बेहतरीन खेल खेलने की पूरी कोशिश करता है| और साथ ही साथ वह इस बात को भी समझता हैं कि सभी खिलाड़ियों को इस अनुभव का आनंद उठाने का समान अवसर मिलना चाहिए, यहाँ तक कि भावी प्रतियोगियों (would be competitors) को भी| एक अच्छा खिलाड़ी अपना समय, अपनी योग्यता को बढाने में लगाता है| वह अपने खेल को गंभीरता से लेता है, लेकिन इतनी गंभीरता से भी नहीं कि उसके लिए हार-जीत ही सब कुछ हो| वह व्यक्ति जिसके लिए केवल खेल का परिणाम ही मायने रखता है उसे हम एक ‘निराश हारा हुआ व्यक्ति’ या फिर एक ‘अहंकारी विजेता’ के नाम से पुकारते हैं|

अगर जिंदगी एक खेल है तो आप कितने अच्छे खिलाड़ी हैं?

क्या आप, ‘खेलने से मिलने वाले आनंद’ का अनुभव लेने के लिए, उसे खुल कर खेल पाते हैं? क्या आप अपने प्रदर्शन(performance) पर ध्यान देते हैं और अपनी योग्यता को निखारने(improve) के लिए समय लगाते हैं? क्या आप एक अच्छे खिलाड़ी हैं? क्या आप संपूर्ण खेल को ‘खुले दिल से’ स्वीकार करते हैं या फिर उसके कुछ हिस्सों को पसंद नहीं करते?

क्या यह एक नासमझी नहीं है कि हममें से बहुत से व्यक्ति ‘जीवन के खेल’ के छोटे-छोटे हिस्सों(खेलों) में इतने अधिक उलझ जाते हैं कि हमारा ध्यान ‘जीवन के विशालकाय खेल’ पर जा ही नहीं पाता? क्या आपने कभी कंप्यूटर/विडियो गेम में अपनी ‘आभासी रूप(character)’ को ५० वें स्तर तक पहुंचाया हैं, जहाँ पर उसके पास बेशुमार दौलत और उज्जवल(radiant) महाशक्तियाँ हों, जबकि वास्तविक दुनिया में आपका भौतिक स्वरूप, ५ वें स्तर पर ही लडखडा रहा हो, निराशा से भरा हुआ, बिलकुल बेडोल, और जोकि अपने बिल भी बड़ी मुश्किल से चुका पा रहा हो| हममें से बहुत से व्यक्ति, इस जाल में कभीं न कभी फंस चुके हैं|

जीवन के खेल के ऐसे कौन से हिस्से/छोटे खेल हैं जिन्हें आप जीवन का संपूर्ण खेल मानने की भूल कर बैठते हैं? शिक्षा का खेल? रोजगार का खेल? आर्थिक सुरक्षा का खेल? परिवार का खेल? शारीरिक क्षमता का खेल? आध्यात्मिकता का खेल? ऐसे बेशुमार छोटे-छोटे खेल हैं जोकि हमारा ध्यान, जीवन के ‘हमेशा बढते रहने वाले’ कहीं विशालकाय खेल से, भटका सकते हैं| ये छोटे खेल भी खुद में, रोचक और मूल्यवान(valuable) होते हैं, लेकिन वे केवल एक बड़ी पहेली का छोटा सा हिस्सा भर ही होते हैं|

एक ऐसे विश्व-प्रसिद्द अभिनेता(actor) के बारे में आप क्या सोचेंगे जो नशे का शिकार हो जाता है? एक ऐसे मशहूर नेता का क्या, जिसकी पत्नी उसे छोड कर चली जाती हैं? और एक ऐसे डॉक्टर के बारे में आपका क्या ख्याल है जोकि दिवालिया(bankrupt) हो जाता है?

जितने दिलचस्प चुनाव(decisions) आपको, अपने जीवन में हर रोज करने होते हैं उतने चुनाव कोई भी ‘आभासी वास्तविकता(virtual reality)’ आपके सामने नहीं रख सकती| हमारे सामने विकल्पों की कोई कमीं नही होती, और उनके परिणाम इतने रोचक होते हैं जोकि हमें अपना चुनाव ध्यान से करने के लिए प्ररित करते हैं| जीवन के खेल की बनावट(design) बड़ी ही मजबूत है|

ऐसा अनोखा खेल, जिसके बारे में कल्पना करना भी मुश्किल हो, हमारे सामने होने पर भी, हममें से अधिकतर लोग खेलने से इनकार कर देते हैं| हम किनारे पर बैठ कर, दुनिया की जटिलताओं(complexities) की चिंता करने लगते हैं बजाए इसके कि हम उन्हें गले से लगा लें| हमारी दिलचस्पी केवल, खेल के छोटे हिस्सों में ही बनी रहती है| बहुत थोड़े से लोग ही सचेत रहकर  पूरे खेल को साधने की कोशिश करते हैं|   

आखिर क्यों?
आप वर्तमान में, जीवन से किस स्तर पर जुड़े हुए हैं यह इस पर निर्भर करता है कि आप, ‘जीवन के खेल से’ तुलना करने पर खुद को कहाँ पाते हैं? क्या आप खेल से बड़े हैं, या फिर खेल आपसे बड़ा है?

जब आप एक ऐसा खेल खेलते हैं जोकि आपसे बड़ा होता है तो आप अभिभूत(overwhelmed) हो जाते हैं| इसमें संभालने के लिए काफी कुछ होता है, और आप जल्दी ही इसे छोड देते हैं| मुझे याद है कि जब मैंने पहली बार शतरंज खेलनें की कोशिश की तो मैं केवल सात वर्ष का था| यह खेल मुझे बड़ा नजर आता था| मैं निराश हो गया क्योंकि मैं इसे समझ ही नहीं पाया| इसलिए मैनें इसे खेलनें की कोशिश ही छोड दी| मेरे लिए ‘अंगूर खट्टे निकले|’ अगर आपका विचार है कि जीवन आपसे बड़ा है तो आप भी नहीं खेलना चाहेंगे| फिर तो खेल एक बड़ी मुसीबत बन जाएगा|

वहीं दूसरी तरफ, जब आप एक ऐसा खेल खेलते हैं जोकि आपसे छोटा होता है, तो इस पर आपका नियंत्रण बना रहता है| हालाँकि अगर खेल बहुत ही छोटा होता है, तो यह उबाऊ(boring) बन जाता है जैसे कि ‘टिक टैक टो’| वे खेल जोकि बेहद छोटे होते हैं वे अधिक आकर्षक नहीं लगते क्योंकि उन्हें खेलना चुनौतीपूर्ण नहीं होता| उन खेलों में आकर्षक विकल्पों की बेहद कमी होती है| कुछ लोग इस चक्र(pattern) में उलझ जाते हैं, वे खेल के शुरुआती स्तरों पर महारत(mastering) हासिल कर लेते हैं और यह भूल ही जाते हैं कि आगे खेल की कठिनाई के दूसरे स्तर, जैसे कि मीडियम, हाई, और मास्टर भी हैं|

सबसे सुखद स्थिति तब होती है जब खेल लगभग आपके बराबर होता है| यह आपके लिए एकदम सही मेल होता है| आपको नियमों की जानकारी होती हैं, खेल को कैसे खेलना है इसे समझने के लिए आप समय लगाते हैं, लेकिन आप जानते हैं कि खेल पर महारत हासिल करना, एक जीवन भर लंबी प्रक्रिया होगी| ऑनलाइन खेल(internet based game) इसी, सुखद स्थिति को बनाए रखने की कोशिश करते हैं, ताकि उनके खिलाड़ी महीने दर महीने खेल की फीस भरते रहें| उन्हें खेल को नए खिलाड़ियों के लिए काफी आसान बनाए रखना पड़ता है वहीं दूसरी ओर, खेल माहिर खिलाड़ियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण बने रहना चाहिए| सामाजिक जुड़ाव भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है|

जब आपको लगता है कि आप और जीवन बराबरी पर हैं, तब आप मानव जीवन की सुखद स्थिति का अनुभव करते हैं| यह वह जगह है जहाँ पर खेल सबसे अधिक मजेदार और पुरस्कृत(rewarding) होता है| जहाँ पर आप जीवन में पूरी तरह से व्यस्त हो जाते हैं, और जीवन की घटनाओं की उनके अनुभव के लिए कद्र करते हैं| आप इस स्थिति का बयान ऐसे कर सकते हैं जैसे कि आप नदी की एक धारा में बहे जा रहें हों, हैरानी, अचरज, या फिर सम्मोहन|

खेल में तब क्या होता है जब आप हारने लगते हैं? यदि आप एक अच्छे खिलाड़ी हैं, तो आप इसे एक अतिरिक्त(added) चुनौती के रूप में स्वीकार करेंगे| जब हालात ठीक नहीं होते तो अच्छे खिलाड़ी शिकायत करना नहीं शुरू कर देते| जब खेल कठिन हो जाता है, तो अच्छे खिलाड़ी चुनौती के मुताबिक़ खुद को बेहतर बना लेते हैं|

मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तभी कर पाता हूँ जब मैं इस दृष्टिकोण(perspective) को लेकर चलता हूँ कि जीवन एक महान खेल है, जोकि सम्मोहक विकल्पों और दिलचस्प परिणामों से भरा हुआ है| नकारात्मक लगने वाली घटनाओं का विरोध करने के बजाय, मैं उन्हें एक अतिरिक्त चुनौतियों के रूप में स्वीकार करता हूँ| उदाहरण के लिए, अगर मैं आर्थिक समस्या से गुजर रहा होता हूँ तो यह कोई बड़ी बात नहीं होती क्योंकि पैसा और कुछ भी नहीं, केवल ‘खेल की दुनिया’ का एक संसाधन ही तो है| ये सिर्फ ‘खेल में मिलने वाले’ सोने के सिक्कें ही तो हैं, जिन्हें कभी भी कड़ी मेहनत और रचनात्मकता से दोबारा कमाया जा सकता है| और यह पता लगाना कि कैसे अधिक सोना कमाया जाए, एक बड़ी ही दिलचस्प और लुभावने विकल्पों से भरी हुए चुनौती है|

अच्छे खिलाड़ी तब भी, अपने प्रसिद्ध के कारण, आलसी नहीं हो जाते, जबकि सब कुछ उनके मुताबिक़ होता रहता है| क्या होता है जब खेल बहुत ही आसान हो जाता है, जब विकल्प नीरस और शुष्क(uninteresting) लगने लगते हैं? तब वक्त होता है नए इलाके में कदम बढ़ा कर नई चुनौतियों के लिए रास्ता तैयार करने का| उदाहरण के तौर पर, मेरे लिए आर्थिक रूप से चीजें काफी आसान हो चुकी हैं, और जितना सोना मैं कमा रहा हूँ वह मेरे परिवार की जरुरत से कहीं अधिक है| हालाँकि सोने का थोडा भण्डार होना अच्छी बात हैं, लेकिन सोने का भण्डार जमा करने में अपनी बाकी की जिंदगी बिताना तो उम्मीद से कहीं अधिक उबाऊ हो जाएगा, और कहने की जरूरत नहीं कि यह एक रोचक संसाधन की भी बर्बादी होगी जिसे कहीं अच्छे काम में लगाया जा सकता है| सोने के बारे में मजेदार बात यह है कि आप उन्नत(upgrade) संसाधन खरीद सकते हैं और फिर ज्यादा बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं| और मैं और मेरी श्रीमती जी ठीक ऐसा ही करने की योजना बना रहे हैं – ताकि हम अपने संसाधनों का उपयोग करके एक बड़ी टीम बनाएँ और बड़ी चुनौतियों को हाथ में लेकर खुद को और भी अधिक उपयोगी बना सकें| और खेल को अगले स्तर पर ले जाएँ|

यह बड़े दुःख की बात है कि लोग इतनी आसानी से भुला देते हैं कि जिंदगी को रोचक, चुनौतीपूर्ण और आनंदमय होना चाहिए| अगर आपका जीवन ललचाने वाले विकल्पों से भरा हुआ है तो खुद को भाग्यशाली समझिए| कुछ निर्णय लीजिए, उनके परिणामों का अनुभव कीजिए, और वहाँ से खुद का विकास कीजिए| यह कितना अच्छा विचार है|

खेल में आप सिर्फ तभी हार सकते हैं जब आप खेलने से इनकार कर देते हैं| जब आप खेल को सक्रिय(actively) होकर खेलते हैं, तो आप कुशलता और अनुभव हासिल करने लगते हैं(और शायद सोना भी हासिल कर पाएं)| अगर आप खेलना जारी रखें तो धीरे-धीरे अपने किरदार को १० वें स्तर, २० वें स्तर, ३० वें स्तर पर पहुँचा सकते हैं| बस इस बात का ख्याल रखिए कि जब आप ३० वें स्तर पर पहुंचें तब आप १० वें स्तर के ‘राक्षसों(monstors)’ से न लड़ रहें हों|

एक अनुभवी खिलाड़ी, एक ऐसे किरदार(character) से क्या कहेगा जोकि एक कोने में बैठकर, बस  शिकायतें ही करता रहता है कि सोना जीतना कितना मुश्किल है, राक्षस कितने धूर्त(evil) हैं, ‘खेल के अंक’(experience points) कितने भेदभावपूर्ण(unfair) तरीके से बांटे जाते हैं, कैसे कोई भी अच्छा साथी साबित नहीं होता, वगैरह-वैगरह? मैं अंदाजा लगा सकता हूँ कि जवाब कुछ इस तरह का होगा, “रोंदू! रोना बंद करों, और जाकर खेल खेलो!”

अगर आप खुद को मानव-शरीर में पाते हैं, तो आप यहाँ पर मानव-जीवन का खेल खेलने के लिए आए हैं| एक कोने में बैठकर, एक नौसिखिए(newbie) खिलाड़ी की तरह, रोते मत रहिए| सच्चाई तो यह है कि अगर आप अपना सारा सोना खो बैठते हैं, अगर आपके साथी आपको छोड देते हैं, या फिर आपके किरदार को ‘प्लेग’ हो जाता है, तो यह सब खेल का ही एक हिस्सा होता है| हर रुकावट, चुनौतियों के एक नए दौर की शुरुआत कर देती है| खेल से यह उम्मीद नहीं की जाती कि यह निष्पक्ष(fair) होगा – बल्कि इससे अपेक्षा की जाती है कि यह आनंददायक (खुशी बढ़ाने वाला) और मजेदार होगा| अब आपका अनुभव, खुशी बढाने वाला और रोचक, रहा कि नहीं, यह काफी हद तक इस पर निर्भर करता है कि आप किस तरह के खिलाड़ी हैं|

क्या आपको लगता है कि आपसे यह अपेक्षा की जाती है कि आप, राक्षसों से लड़ने, सोने की रक्षा करने, या फिर अच्छे साथी पाने की, अपनी हर कोशिश में सफल रहेंगे? बिलकुल भी नहीं| खेल इस तरह से तो काम नहीं करता| बहुत से मौकों पर ऐसा होता है कि आप पूरे, जोशो-खरोश से भरे होकर और जीत के इरादे से, लड़ाई के मैदान पर उतरते हैं, और फिर भी बुरी तरह से हार जाते हैं| इसमें हैरानी की कोई बात नहीं| यह सब खेल का ही एक हिस्सा होता है| खेल से उम्मीद की जाती है कि यह रोमांचक होगा|

जीवन कितना नीरस बन जाएगा, अगर आपकी सभी प्रयासों को पहली ही बार में, तुरंत सफलता मिल जाए! एक खेल जिसमें, रुकावटें, देरी और अनिश्चितताएं(uncertainty) शामिल होती हैं कहीं अधिक मजेदार होता है| यह खेल को, लंबे समय तक और अधिक उत्साह के साथ, खेलते रहने के लिए आपको प्रेरित करता है| खुदा का शुक्र हैं कि हमारी इच्छाएँ, फ़ौरन साकार(manifest) नहीं होतीं, नहीं तो बोरियत के कारण हमें रोना ही आ जाता| यह प्रयास और अनिश्चितता(uncertainity) ही है जोकि जीवन को इतना दिलचस्प बनाती है, क्योंकि ‘खेलने का अनुभव’ ही असली ईनाम है न कि वह सोना जोकि हम इकठ्ठा करते हैं|

मानव-जीवन का खेल, आखिरकार आपकी मृत्यु के साथ ही खत्म हो जाएगा, लेकिन इस दौरान जब आप यहाँ हैं, तो क्यों न इस खेल का पूरा आनंद उठाएं| जीवन को आनंददायक(fun giving) माना जाता है| तो बाहर निकलिए और खेलनें में व्यस्त हो जाईए! उन लुभावने विकल्पों में से कुछ का सामना कीजिए, जिन्हें आप अभी तक नजरअंदाज कर रहे थे, परिणामों को स्वीकार कीजिए, और वहाँ से खुद का विकास कीजिए|

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