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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: शुक्रवार, 11 मई 2012

समय-सीमा तय करना

(Original Post : Timeboxing, October 19th, 2004 by Steve Pavlina)  

'समय-सीमा' तय करना, समय के मैनेजमेंट का एक ऐसा तरीका है जिसका उपयोग मैं अक्सर करता हूँ| मैंने इसे, सबसे पहले सॉफ्टवेयर के निर्माण के दौरान सीखा था| मान लीजिए कि आपको, अपने एक नए उत्पाद(product) को, बाजार में उतारने की एक तय समय-सीमा मिली हुई है, जैसेकि 'इनकम-टैक्स का हिसाब लगाने वाले' एक सॉफ्टवेयर का सालाना अपग्रेड(सुधार, upgrade)| आपको हर हाल में, एक निश्चित तारीख तक नया अपग्रेड तैयार करना ही होगा| तो फिर आप अपने, विकास-चक्र(development cycle) के लिए शायद 'समय-सीमा तय करने' के तरीके का उपयोग करेंगे, दूसरे शब्दों में आप एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने काम को, बेहतर से बेहतर तरीके से, करने का प्रयास करेंगे| आप इसमें कौन-कौन सी नई खूबियाँ जोड़ पाएंगे, यह पूरी तरह से उपलब्ध समय पर निर्भर करेगा| अपने टाईम-टेबल को बदलने का सवाल ही नहीं उठता, इसलिए अगर आप पिछड जाते है तो आपको खूबियों में कटौती करनी ही होगी|

अपने खुद के कार्यों को संभालने(manage) के समय, 'समय-सीमा' निर्धारित करने की तकनीक मददगार साबित हो सकती है| मैं मुख्य रूप से इसका उपयोग दो अलग-अलग परिस्थितियों में करता हूँ|

Last Modified: सोमवार, 7 मई 2012

सफलता का डर: अगर आप सफल हुए तो क्या होगा?

(Original Post : Fear of Success: What will happen if you succeed?, December 4th, 2004 by Steve Pavlina)  

कई बार आपके पास एक ऐसा लक्ष्य होता है जिसे हासिल करने के बारे में आप सोचते तो हैं, लेकिन आप पाते है कि उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी प्रयास आप नहीं कर रहे| आपको असफल होने या नकारे जाने का वाकई कोई डर नहीं होता, लक्ष्य तक पहुँचने का रास्ता साफ-साफ़ नजर आ रहा होता है और शायद यह एक दिलचस्प चुनौती भी लग रही हो, और कभी-कभार आपको कुछ सफलता भी हासिल हो जाती हो| लेकिन ज्यादातर समय आपकी लय बन नहीं पाती, और आप नहीं जानते कि आखिर ऐसा क्यों होता है| और ऐसा अक्सर उन दीर्घकालिक(long-term) लक्ष्यों को हासिल करते वक्त होता है जिनमें थोड़े-थोड़े समय के बाद काम करने की जरूरत होती है, जैसे कि वजन घटाना या फिर 'नए बिजनेस की शुरुआत करने' और अंत में अपनी 'नौकरी छोड देने', के बीच का समय|

ऐसी परिस्थिति में, मैंने पाया है कि एक सवाल जोकि मददगार साबित होता हैं वह यह है कि "क्या होगा अगर आप सफल हो जाते हैं तो? थोड़ी देर के लिए बिलकुल भुला दीजिए कि आपको कैसा होने की उम्मीद है या फिर किस बात का डर है, सिर्फ इस पर विचार कीजिए कि वास्तव में क्या होने की संभावना है? तो अगर आप अपना लक्ष्य हासिल कर लेते हैं| तो फिर क्या होगा? क्या-क्या बदलाव होंगे?