Google Custom Search


Custom Search

आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: सोमवार, 7 मई 2012

सफलता का डर: अगर आप सफल हुए तो क्या होगा?

(Original Post : Fear of Success: What will happen if you succeed?, December 4th, 2004 by Steve Pavlina)  

कई बार आपके पास एक ऐसा लक्ष्य होता है जिसे हासिल करने के बारे में आप सोचते तो हैं, लेकिन आप पाते है कि उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी प्रयास आप नहीं कर रहे| आपको असफल होने या नकारे जाने का वाकई कोई डर नहीं होता, लक्ष्य तक पहुँचने का रास्ता साफ-साफ़ नजर आ रहा होता है और शायद यह एक दिलचस्प चुनौती भी लग रही हो, और कभी-कभार आपको कुछ सफलता भी हासिल हो जाती हो| लेकिन ज्यादातर समय आपकी लय बन नहीं पाती, और आप नहीं जानते कि आखिर ऐसा क्यों होता है| और ऐसा अक्सर उन दीर्घकालिक(long-term) लक्ष्यों को हासिल करते वक्त होता है जिनमें थोड़े-थोड़े समय के बाद काम करने की जरूरत होती है, जैसे कि वजन घटाना या फिर 'नए बिजनेस की शुरुआत करने' और अंत में अपनी 'नौकरी छोड देने', के बीच का समय|

ऐसी परिस्थिति में, मैंने पाया है कि एक सवाल जोकि मददगार साबित होता हैं वह यह है कि "क्या होगा अगर आप सफल हो जाते हैं तो? थोड़ी देर के लिए बिलकुल भुला दीजिए कि आपको कैसा होने की उम्मीद है या फिर किस बात का डर है, सिर्फ इस पर विचार कीजिए कि वास्तव में क्या होने की संभावना है? तो अगर आप अपना लक्ष्य हासिल कर लेते हैं| तो फिर क्या होगा? क्या-क्या बदलाव होंगे?

मैं यहाँ पर फौरन दिए जाने वाले जवाब के उम्मीद नहीं कर रहा हूँ, जैसे कि "अगर मैं वजन घटा लेता हूँ, तो मैं छरहरा(thin) हों जाऊंगा|" इस पर विचार करने के लिए १५ से ३० मिनट का वक्त अलग से रखिए ताकि आप यह सोच सकें कि अगर आप अपना लक्ष्य पा लेते हैं तो वाकई में आपके जीवन में क्या-क्या बदलाव होंगे?(इस दौरान टीवी, रेडियो या दूसरे व्यवधानों(distractions) से अपना ध्यान न भटकने दें)| अक्सर ऐसे कुछ अनचाहे साईड-इफेक्ट(side-effects) होते हैं जिनके बारे में आप सजग नहीं होते, लेकिन अवचेतन रूप से वे आपको, समर्पित(committed) पर्यास करने से, रोकने के लिए काफी होते हैं| उदाहरण के तौर पर अगर आप अपना काफी वजन घटा लेते हैं, तो ऐसा करने के कुछ साईड-इफेक्ट ये हो सकते हैं: लोग इस पर ध्यान देंगे और टीका-टिपण्णी करेंगे, कुछ लोग आपसे डाईटिंग के बारे में सलाह लेने लगेंगे, हो सकता है कि आपको लगने लगे कि अपने इस नए वजन को बनाए रखने के लिए आपको अपनी जीवन-शैली(life-style) में स्थाई बदलाव करने होंगे, शायद आपको नए कपडे भी खरीदने पड़ें, आप दूसरों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं फिर तो और अधिक लोग आपसे मिलना चाहेंगे(आपको यह पसंद हो या नहीं), आपके 'ज्यादा वजन वाले' कुछ दोस्त आपसे इर्ष्या(jealous) करने लगेंगे, आपके परिवार को शायद यह बदलाव पसंद ना आए, आपको शायद चिंता होने लगे कि आप अपना कम वजन बनाए रख भी पाएंगे या नहीं, शायद आपको अपनी थाली से, पसंदीदा खाने के गायब होने का गम सताने लगे और भी बहुत कुछ|

ऐसा शायद ही कभी होता है कि एक लक्ष्य में सब कुछ अच्छा ही अच्छा हो| सफलता के लिए बदलाव की जरूरत होती है, और बदलाव के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू होते हैं| अक्सर लोग, किसी काम में सफलता पाने के लिए, कोशिश करने का दावा तो करते हैं परन्तु सच्चाई यही होती है कि उनके लिए नकारात्मक पहलू, सकारात्मक पहलू पर भारी पड़ता है| इस समस्या से पार पाने का एक तरीका यह है कि सचेत होकर उन नकारात्मक पहलुओं के बारे में सोचिए और फिर एक-एक करके उन्हें जड़ से उखाड फेंकिए| एक नकारात्मक साईड-इफेक्ट को जड़ से उखाड़ने का मतलब होता है कि या तो यह पता लगाइए कि आप कैसे उन्हें पूरी तरह से खत्म कर सकते हैं या फिर उन्हें सहज ही स्वीकार करके उन के साथ जीना सीख लीजिए|

एक लक्ष्य के सकारात्मक पहलू पर ध्यान केंद्रित करना बेशक मददगार साबित होता है| लेकिन कभी-कभार उसके अँधेरे पहलु पर भी नजर डालना और यह स्वीकार करना कि आपको उसका सामना भी करना ही होगा, मत भूलिए|

असफलता और ठुकराए(rejection) जाने के डर से एकदम उलट, सफलता का डर कहीं ज्यादा हानिकारक साबित हो सकता है क्योंकि आप इससे अनजान होते हैं| लेकिन समस्या की जड़ में सफलता का डर नहीं है बल्कि यह तो सफलता के साईड-इफेक्ट्स का डर है, जिनमें से कुछ को आप बिलकुल भी पसंद नहीं करते| जिन डरों का आकलन(valuation) आपने कभी सजग होकर नहीं किया होता, वे लगातार शक्तिशाली बनते चले जाते हैं| इसकी बड़ी ही साधारण सी वजह है बिहेवियर-कंडीशनिंग(व्यवहार की आदत डालना) - जब आप उस चीज का सामना करने से बचते हैं जिससे कि आपको डर लगता है(चाहे वह सचेतन रूप से हो या फिर अवचेतन रूप से), तो आप खुद ही 'डर से बचने' की आदत को मजबूत बना रहे होते हैं| इसलिए जब आप (अनजाने ही) अपने लक्ष्य पर काम करने को लेकर, टाल-मटोल करने लगते हैं क्योंकि आपके मन में, सफल होने का, एक छुपा हुआ डर मौजूद होता है, तो आप वास्तव में 'काम टालने की आदत' डाल रहे होते हैं, और फिर जैसे-जैसे समय गुजरता जाता है, खुद को काम करने के लिए तैयार करना - कठिन और भी कठिन होता चला जाता है| घातक चक्रव्यूह!

खुद से यह पूछना कि "सफलता हासिल करने पर क्या होगा?", इस समस्या को हल हो सकता है क्योंकि इससे आपका पूरा ध्यान, उन डरों पर केंद्रित हो जाता है| डर की एक प्रवृति(आदत, tendency), यह होती है कि सीधे तौर से देखने पर यह सिकुड(shrink) जाता है, और आपका काम करना आसान बना देता है| 'डर के सिकुड़ने' को समझने का दूसरा तरीका यह है कि सचेत होकर गहराई से जांच करने पर, अवचेतन मन की बिहेवियर-कंडीशनिंग कमजोर पड़ जाती है| अगर आप अपने व्यवहार के संदर्भ(reference) में 'डर' शब्द का प्रयोग करना पसंद नहीं करते है तो आप इसे "टालमटोल करने वाला व्यवहार' भी कह सकते हैं, क्योंकि शब्दों का भाव महत्वपूर्ण है शब्द नहीं|

इसका एक दूसरा फायदा यह भी है कि आप, 'सजगता की रोशनी में नजर आने वाले', उन डरों को, जोकि वास्तव में अनसुलझी समस्याओं की मौजूदगी का एक पुख्ता सुबूत होते हैं, दरकिनार( aside) करने के लिए कोई सूझबूझ भरा तरीका भी निकाल सकते हैं| उदाहरण के तौर पर, चलिए वजन कम करने के उदाहरण पर फिर से विचार करते हैं, अगर आप अपना काफी वजन घटा लेते हैं तो फिर शायद आपको नए कपड़ों की जरूरत पड़ेगी| और अगर नए कपडे खरीदने से आपका बजट बिगड सकता है, तो फिर यह एक वास्तविक समस्या है जिसका सामना आपको करना होगा (अगर आपको ढीले-ढाले कपडे पहनने से कोई एतराज नहीं है तो फिर बात अलग है)| ध्यान न देने पर, इसके जैसी ही एक साधारण सी समस्या भी, आपको अवचेतन रूप से अपने लक्ष्य को हासिल करने से रोक सकती है| लेकिन एक बार आपने सजग होकर अपनी परिस्थिति की जांच-पड़ताल कर ली, और पहले ही इससे निपटने का एक तरीका ढूंढ निकाला, तो फिर आपने अपने अवचेतन को एक सन्देश दे दिया कि आपको इस समस्या से घबराने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि आपके पास इसका एक व्यावहारिक(practical) समाधान है|

चलिए अब इसके दूसरे पहलू पर विचार करते हैं| मान लीजिए कि आपने खुद से पूछा, "अगर मैं सफल हो जाता हूँ तो फिर क्या होगा?" और फिर सारे साइड-इफेक्ट्स पर गौर करने के बाद, आपको एहसास होता है कि आप वास्तव में उस लक्ष्य को हासिल करना ही नहीं चाहते| नकारात्मक पहलू, सकारात्मक पहलुओं पर भारी पड़ते हैं| मुझे इस हकीकत का सामना तब करना पड़ा जब मैं कंप्यूटर गेम्स के अपने बिजनेस को बढाने की योजना बना रहा था लेकिन मुझे उतनी सफलता नहीं मिल पा रही थी, जितनी कि मुझे उम्मीद थी| और जब मैंने खुद से यह जादुई सवाल पूछा, तो मुझे एहसास हुआ कि असल में मैं लक्ष्य को, इसके सभी साईड-इफेक्ट्स के साथ हासिल नहीं करना चाहता था - जो काम मैं वाकई में करना चाहता था वह था, कैरियर बदलकर अपना पूरा वक्त लिखने और व्याख्यान(lecture)देने में लगाना, जबकि कंप्यूटर गेम्स के अपने बिजनेस को और आगे बढाने से मैं उस कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण लक्ष्य से और दूर चला जाता| मुझे यही लगता था कि अपने कंप्यूटर गेम्स के बिजनेस को विकसित करना ही मेरा लक्ष्य होना चाहिए, लेकिन जब मैंने इस पर गहराई से विचार किया कि उस लक्ष्य को हासिल करने पर मैं आखिर कहाँ पर खडा हूँगा, तो मैंने पाया कि वह सफलता वैसी नहीं होगी जैसी सफलता मैं वास्तव में पाना चाहता था| मेरे लिए इसे स्वीकार करना बेहद मुश्किल था... यह मानना कि जिस रास्ते पर मैं चला जा रहा हूँ वह मेरी मंजिल तक नहीं जाता| मुझे वास्तव में उस लक्ष्य को छोड देना पड़ा क्योंकि मैं समझ चुका था कि उस लक्ष्य को हासिल करने के संभावित नतीजे क्या होंगे|

अब जबकि मैं, 'लिखने और व्याख्यान' देने को अपना कैरियर बनाने की दिशा में, अपने लक्ष्य निर्धारित कर चुका हूँ, मुझे एहसास हो रहा है कि इसके कुछ बड़े साईड-इफेक्ट्स भी हैं| दो फुल-टाइम व्यवसायों(careers) को संभालना मेरी क्षमता से बाहर की बात है| मेरे लिए एक सबसे मुश्किल साईड-इफेक्ट यह रहा कि अपने गेम्स-बिजनेस के लिए, मैंने जो लक्ष्य निर्धारित किए थे और जो सपने देखे थे, मुझे उन्हें भुला देना पड़ा| नए गेम्स के वे सभी रचनात्मक विचार, अब कभी भी हकीकत का रूप नहीं ले पाएंगे...| लेकिन जैसे-जैसे मैं अपने नए कैरियर में सफल होता चला गया तो यह सब बदलता गया| एक ऐसे खेल की रचना करना, जोकि चुनौतीपूर्ण हो, मनोरंजक हो, और जो लोगों को खुशी का एहसास दिलाता हो, बहुत अच्छा विचार है; हालांकि दूसरों के विकास में उनकी मदद करने के काबिल होना मुझे कहीं ज्यादा गहराई तक संतुष्ट करता है| मुझे इन सभी साईड-इफेक्ट्स की समीक्षा(review) करने के बाद, उन्हें एक-एक करके स्वीकार करने की प्रक्रिया बड़ी ही ज्ञानवर्धक(enlightening) लगती है|

तो क्या होगा अगर आप सफल हुए तो? अगर आप वजन घटा पाएं तो.... जीवनसाथी की तलाश कर पाएं तो... प्रोमोशन हासिल कर पाएं तो... बिजनेस शुरू कर पाएं तो... माता/पिता बन पाएं तो.... सिगरेट छोड पाएं तो... करोड़पति बन पाएं तो... खुद को बढ़ने का मौका दीजिए?       


[यह article आपको कैसा लगा, कृपया comments के जरिए इस पर अपनी राय जाहिर करें, अगर आपके पास इस article से जुडी कोई जानकारी या सुझाव हो तो आप उसे 3kbiblog@gmail.com पर भेज कर हमारे साथ share कर सकते हैं | ]

नए लेख ई-मेल से प्राप्त करें : 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

इस लेख पर अपनी राय जाहिर करने के लिए आपका धन्यवाद|