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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: शुक्रवार, 11 मई 2012

समय-सीमा तय करना

(Original Post : Timeboxing, October 19th, 2004 by Steve Pavlina)  

'समय-सीमा' तय करना, समय के मैनेजमेंट का एक ऐसा तरीका है जिसका उपयोग मैं अक्सर करता हूँ| मैंने इसे, सबसे पहले सॉफ्टवेयर के निर्माण के दौरान सीखा था| मान लीजिए कि आपको, अपने एक नए उत्पाद(product) को, बाजार में उतारने की एक तय समय-सीमा मिली हुई है, जैसेकि 'इनकम-टैक्स का हिसाब लगाने वाले' एक सॉफ्टवेयर का सालाना अपग्रेड(सुधार, upgrade)| आपको हर हाल में, एक निश्चित तारीख तक नया अपग्रेड तैयार करना ही होगा| तो फिर आप अपने, विकास-चक्र(development cycle) के लिए शायद 'समय-सीमा तय करने' के तरीके का उपयोग करेंगे, दूसरे शब्दों में आप एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने काम को, बेहतर से बेहतर तरीके से, करने का प्रयास करेंगे| आप इसमें कौन-कौन सी नई खूबियाँ जोड़ पाएंगे, यह पूरी तरह से उपलब्ध समय पर निर्भर करेगा| अपने टाईम-टेबल को बदलने का सवाल ही नहीं उठता, इसलिए अगर आप पिछड जाते है तो आपको खूबियों में कटौती करनी ही होगी|

अपने खुद के कार्यों को संभालने(manage) के समय, 'समय-सीमा' निर्धारित करने की तकनीक मददगार साबित हो सकती है| मैं मुख्य रूप से इसका उपयोग दो अलग-अलग परिस्थितियों में करता हूँ|

पहली परिस्थिति में, मान लीजिए कि आपको कोई कार्य करना है, लेकिन इसमें एक जोखिम(risk) है, कि हो सकता है कि इसे करने में, जितना जरूरी है उससे कहीं ज्यादा वक्त लग जाए, क्योंकि यह ऐसा काम हो सकता है जिसे आप शायद बेहतरीन ढंग से करना चाहें| इसलिए यहाँ पर, आप खुद को एक 'निश्चित समय अवधि'(time-period) दे देते हैं, जिसे बढ़ाया नहीं जा सकता है, और फिर उसी समय-सीमा में रखकर, अपने काम को बेहतरीन ढंग से करने का प्रयास करते हैं|

उदाहरण के तौर पर मैं हर साल दीवाली की खरीददारी करते वक्त, 'समय-सीमा' निर्धारित करने के तरीके का प्रयोग करता हूँ| मैं आमतौर पर इस काम के लिए करीब दो घंटे का वक्त तय करता हूँ, जिसमें करीब 8 लोगों के लिए गिफ्ट खरीदना शामिल है(बाकी का काम मेरी श्रीमती जी देख लेती हैं)| मैं पहले ही से तय कर लेता हूँ कि मेरी सूची में शामिल हरेक व्यक्ति के लिए कौन सा गिफ्ट खरीदना है, और फिर मैं इंटरनेट पर, जितनी खरीददारी कर पाता हूँ, कर लेता हूँ और बाकी की खरीददारी के लिए मैं, अपने करीब के बाजार का रुख कर लेता हूँ, जहाँ पर मैं एक से दूसरी दूकान तक जाते हुए, गिफ्ट खरीदता जाता हूँ| मैं अपने लचीले टाईम-टेबल का भी पूरा फायदा उठाता हूँ, और हफ्ते के बीच के दिनों में सुबह-सुबह के वक्त ही खरीददारी कर लेता हूँ, जिस वक्त दुकानों में ज्यादा भीड़ नहीं होती और मुझे लाईन में भी नहीं खडा होना पड़ता| इसलिए मैं दो घंटों के भीतर ही सभी के लिए गिफ्ट खरीद लेता हूँ|

(मैं जानता हूँ कि कुछ लोगों को छुट्टी के दिन खरीददारी करना पसंद होता हैं, और अगर आपको इसमें मजा आता है तो अपने मनपसंद सामान को, कई चक्कर लगाकर, दुकानों में तलाशने में, कुछ भी गलत नहीं है| लेकिन अगर आपको मेरी तरह, खरीददारी करते वक्त समझ ही नहीं आता कि क्या खरीदें, तो आप इस काम में और दस घंटे लगा कर भी, बेहतर गिफ्ट नहीं खरीद पाएंगे, तो अच्छा यही रहेगा कि आप 'हथियार डाल दें':), और तय समय के भीतर ही अपना काम बेहतरीन तरीके से करने की कोशिश करें|)

दूसरी परिस्थिति जिसमें मैं 'समय-सीमा' तय करता हूँ, वह तब उत्पन्न होती है जबकि मैं एक काम या एक प्रोजेक्ट को पूरा तो करना चाहता हूँ, लेकिन मुझे समझ ही नहीं आता कि शुरुआत कहाँ से की जाए, या फिर ऐसा नजर आने लगता है कि काम के एक हिस्से को पूरा करने में भी काफी वक्त लग जाएगा| या फिर यह मुझे थकाने वाला ऐसा काम हो सकता है, जिसे मैं अक्सर टालता रहता हूँ| ऐसी हालत में मैं एक निश्चित अवधि(time period) के दौरान काम करके, उसे थोड़ा और आगे बढाने के लिए, 'समय-सीमा' तय करने के तरीके का प्रयोग करता हूँ| मेरे लिए यह अवधि आम-तौर से 30-120 मिनट की होती है| मैं इस समय-अवधि के दौरान किसी खास मुकाम(milestone, target) पर पहुँचने की कोशिश नहीं करता - मैं तो केवल समय लगाने का वादा करता हूँ, और इस पर ध्यान नहीं देता कि मैं कितना काम पूरा कर पाता हूँ|  उदाहरण के तौर पर मैं इस तरीके का प्रयोग, नए लेख, लिखने के दौरान करता हूँ| मुझे एक लेख पूरा करने में लगभग 3-8 घंटों का वक्त लग जाता है| कभी-कभार मैं लेख को एक ही बार में पूरा कर लेता हूँ, लेकिन अधिकतर, मैं इसे कई हिस्सों(sessions) में बाँट कर ही पूरा कर पाता हूँ| इसलिए मैं शुरुआत करने और लेख को आगे बढाने के लिए, 'समय-सीमा' तय कर, 1-2 घंटों का अपना समय इस पर लगाता हूँ बिना इस बात की फ़िक्र किए कि, मैं इसे कितना पूरा कर पाता हूँ|

इस तरीके का एक साईड-इफेक्ट यह होता है कि जितना मैंने सोचा होता है मैं उसी कहीं अधिक समय तक इस पर काम करता रहता हूँ| अगर मैंने एक थकाने वाले काम को केवल 30 मिनट तक करने का वादा (अपने-आप से) किया होता है, तो इसकी शुरुआत करना आसान होता है क्योंकि मैंने खुद को, 30 मिनट के बाद इस काम को छोड़ने की इजाजत दे दी होती है| लेकिन एक बार उस निष्क्रियता(inertia) से उबरने के बाद, मैं अब अपना पूरा ध्यान अपने काम में लगा सकता हूँ, और इससे पहले कि मैं काम छोडना चाहूँ, 90 मिनट यूँ ही गुजर जाते हैं|

समय-सीमा निर्धारित करना, आपको 'दोषरहित(perfectionism)' काम करने और 'काम-टालने की आदत' से दूर रखता है, और यही इसे समय के मैनेजमेंट की एक उपयोगी तकनीक बनाता है| मैंने इसे, इसी लेख को लिखने के लिए भी इस्तेमाल किया है, और अब जबकि मेरी श्रीमती जी, खाने का सामान और अपनी मनपसंद फिल्म की डीवीडी लेकर, घर आ चुकी हैं, यह समय है अलविदा कहने का ...| :)
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