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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: शनिवार, 2 जून 2012

पक्का इरादा क्या होता है?

(Original Post : What is Commitment?, October 4th, 2011, by Steve Pavlina)    

अपना सिर पानी में डुबो दीजिए और इसे कुछ देर वहीं रखे रखिए|

आपको जल्द ही पता चल जाऐगा कि साँस लेने के लिए आपका इरादा १००% पक्का है|

इस पर ध्यान दीजिए कि आप साँस न लेने के लिए कोई बहाना नहीं बनाएंगे| ध्यान दीजिए कि आप खुद को 'साँस लेने के लिए' प्रेरित करने की फ़िक्र नहीं करेंगे| ध्यान दीजिए कि आपको 'साँस लेने की अपनी इच्छा को' सही ठहराने की कोई जरूरत नहीं होगी|

आप केवल साँस लेंगे|

पक्के इरादे का मतलब है कार्यवाही करना|

कोई बहाना नहीं| कोई बहस नहीं| कोई लंबी-चौड़ी जांच-परख नहीं| यह कितना कठिन है इसकी कोई शिकायत नहीं| दूसरे क्या सोचेंगे इसकी कोई चिंता नहीं| कोई डर कर पीछे हटना नहीं|

केवल आगे बढ़ना|

क्या होगा अगर कोई आपको पक्का इरादा करने से रोकना चाहे?

आप क्या करेंगे अगर कोई आपको साँस लेने से रोकना चाहे?

[यह article आपको कैसा लगा, कृपया comments के जरिए इस पर अपनी राय जाहिर करें, अगर आपके पास इस article से जुडी कोई जानकारी या सुझाव हो तो आप उसे 3kbiblog@gmail.com पर भेज कर हमारे साथ share कर सकते हैं | ]

Last Modified: शुक्रवार, 1 जून 2012

खुद पर शक करना घातक होता है

(Original Post : Skepticism May Be Harmful or Fatal if Swallowed, November 23rd, 2005 by Steve Pavlina)    

संदेह करने का अर्थ है शक और अविश्वास को बुनियाद बनाकर वास्तविकता को समझने की कोशिश करना ताकि आप एक समझदार इंसान की तरह बर्ताव कर सकें| बुनियादी रूप से संदेह का जन्म, 'किसी बात को आँख मूँद कर मान लेने' के विरोध में हुआ| संदेह करने के पीछे का मुख्य कारण, मूर्खतापूर्ण बातों को स्वीकार करने से खुद को बचाना होता है|

यहाँ तक तो सब ठीक हैं, लेकिन आजकल संदेह करने का प्रयोग, धर्म और अध्यात्मिक(spiritual) मामलों से भी बहुत आगे होने लगा है| अगर संदेह आपको धार्मिक कट्टरता से बचा सकता है तो शायद यह दूसरे मामलों में भी आपकी मदद कर सकता है| और कुछ हद तक यह मदद करता भी है| उदाहरण के तौर पर, संदेह करने से आप, अपने बिजनेस में धोखा खाने से बच सकते हैं|

लेकिन संदेह तब नुकसानदेह साबित हो जाता है जब आप इसे निगल जाते हैं| अगर आप इसे निगल जाए तो आप इसका रुख अपनी ओर कर देते हैं| आप, शक ओर अविश्वास को औज़ार बनाकर खुद को समझने की कोशिश करने लगते हैं| मैं किस काबिल हूँ? क्या मैं वाकई ऐसा कर सकता हूँ? अगर मैं ऐसा करने की कोशिश करूँ तो क्या मैं मुर्ख लगने लगूंगा? 

बड़ी गलती|