Google Custom Search


Custom Search

आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

जिम्मेदारी और आकर्षण का नियम

(Original Post : Responsibility and the Law of Attraction, August 14th, 2006 by Steve Pavlina)  

अपने जीवन के प्रति हमारी जवाबदेही(जिम्मेदारी, responsibility), एक ऐसी चीज है जिसे हम थोड़ी देर के लिए भुला तो सकते हैं लेकिन उससे पीछा नहीं छुडा सकते| जैसेकि मैं (स्टीव पव्लीना) अक्सर कहता रहता हूँ कि आप कंट्रोल(/नियंत्रण) तो दूसरे को दे सकते हैं लेकिन जवाबदेही नहीं| अंततः आपको अपनी जीवन में क्या हासिल करना है इसकी पूरी जिम्मेदारी आप और केवल आप पर ही होती है...न कि आपके परेंट्स, आपके बॉस, आपके समाज, भगवान, या फिर किसी और पर| आप जिसे चाहे उसे दोषी ठहरा सकते हैं, लेकिन उसके नतीजे केवल आपको ही झेलने(या फिर सराहने/appreciate) होते हैं|        

मुझे कभी-कभार ऐसे लोगों के खत(letters/feedback) मिलते हैं जोकि ‘जैसा वे नहीं चाहते’, उसके बारे में लगातार सोचते रहने के दुष्चक्र में फंसे हुए होते हैं| वे, अपनी इच्छाओं पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करने का दावा करते हैं, और फिर मुझसे पूछते हैं आखिर उनके लक्ष्य साकार(implement) क्यों नहीं हो रहे? और फिर वे उन सभी कारणों को गिनाने लगते हैं जोकि उनके विचार से उनकी परेशानियों की वजह होते हैं|

अगर मुझे ऐसे ई-मेल का एक फॉर्म(template) तैयार करना हो तो, वो कुछ ऐसा नजर आएगा :
“मुझे समझ में नहीं आता....
मैं निराश हूँ क्योंकि...
मुझे नफरत है...
मुझे नहीं पता...
मुझे बड़ा तनाव है कि...
मैं बड़ी चिंता करता हूँ कि...
मैं यह कर सकता हूँ... लेकिन मैं कर ही नहीं पाता...
मेरे जीवन में इतनी मुश्किलें क्यों हैं?"

ये तो अच्छे-खासे संकल्पों(intentions) की सूची है, क्या नहीं? और बेशक वह व्यक्ति अपने जीवन में इन्हीं संकल्पों को ही तो साकार कर रहा है| यहाँ पर जिस चीज की कमी हैं वह है ‘जिम्मेदारी’, वह व्यक्ति इन नतीजों के लिए खुद की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं कर रहा|

जिसके बारे में आप सोचते हैं, ‘आकर्षण का नियम’ आपको सिर्फ वही देता है| आप सोचते हैं तो आप चाहते हैं| हर विचार एक संकल्प है| आकर्षण का नियम एकदम निष्पक्ष(neutral) होता है – यह आपके ‘मनपसंद विचारों’ को छानकर अलग नहीं करता| अगर आप “जैसा आप नहीं चाहते” उसके बारे में सोचते हैं तो वह आपको मिल जाएगा| और अगर आप “जैसा आप चाहते हैं”, उसके बारे में सोचते हैं तो आपको वह भी मिल जाएगा|

अगर आप अपने संकल्पों को साकार करना चाहते हैं, तो फिर ऊपर दिए गए वाक्य लिखने का कोई अर्थ नहीं निकलता| अगर आपके संकल्प अभी तक साकार नहीं हुए हैं, तो भी आशावादी और सकारात्मक बने रहिए| अपने संकल्पों के बारे में सकारात्मक रूप से सोचिए और आकर्षण के नियम को अपना काम करने दीजिए| वर्तमान पल को बेहतर तरीके से जीने के बारे में सोचिए| ‘तालमेल(synchronicities)’ के बनने के प्रति सजग रहिए| अगर आप निराश हो जाते हैं तो बगीचे में सैर करने निकल जाइए, या फिर ध्यान(meditation) करके, निराशा के इस बीज को अपनी जड़ें जमाने से पहले ही उखाड फेंकिए| नहीं तो आप, अपनी इच्छाओं के विपरीत संकल्प लेकर उन्हें बेअसर कर देंगे|

आकर्षण के नियम पर महारत(mastery) हासिल करने की चाबी है जिम्मेदारी स्वीकार करना| आपको अपने जीवन में मौजूद, हर-एक चीज के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी| और मेरा मतलब यहाँ हर-एक चीज से है| अगर आपको इसका अनुभव हो रहा है तो आपने ही इसे ‘साकार’ किया है| आप जिस किसी चीज पर भी अपना ध्यान केंद्रित करेंगे उसका विस्तार होना शुरू हो जाएगा|

तो फिर आप कैसे “जैसा नहीं चाहते” उसके बारे में सोचना छोड सके हैं? सबसे पहले तो उसे आकर्षित करने की जिम्मेदारी स्वीकार कीजिए| इससे आपकी चेतना(consciousness) का स्तर बढ़ेगा और आकर्षण के नियम का सफलतापूर्वक इस्तेमाल करके, ‘आप जैसा चाहते हैं’, उसे हासिल करने की आपकी क्षमता बेहतर होगी|

मान लीजिए कि मैं अपने बच्चों के साथ बाहर घूमने के लिए जाता हूँ, और वे वहाँ पर शैतानियां(misbehave) करने लगते हैं| वे एक-दूसरे के साथ लड़ना शुरू कर देते हैं, और मैं उन्हें लेकर बेहद परेशान हो जाता हूँ| लेकिन बाद में, मुझे यह स्वीकार करना होगा कि मैंने इस परिस्थिति को अपने विचारों से आकर्षित किया था| मैंने अपने अवचेतन मन(unconscious mind) के जरिए यह संकल्प लिया था| शायद, हम जब बाहर जा रहे थे तो मुझे पिछली बार की (बाहर घूमने जाने के दौरान हुई) अप्रिय(unpleasant) घटना याद आ गई थी| शायद मैंने बच्चों के शरारती मूड पर ध्यान दे दिया था और इस बात की चिंता की थी कि वे और ज्यादा शरारत करना शुरू कर देंगे| अगर मैंने इसके बारे में कुछ भी सोचा था तो मैंने आकर्षण के नियम को सक्रिय(activated) कर दिया था|

अपनी वास्तविकता की रचना करने की जिम्मेदारी स्वीकार करने से, मैं उसे बदलने की शक्ति भी हासिल कर लेता हूँ| (अगर मैंने अपनी वास्तविकता की रचना की है तो इसका अर्थ यह हुआ कि मेरे पास ‘रचना करने की शक्ति है – सतीश)| मैं सचेत रहकर अपनी ज्यादा ऊर्जा “जैसा मैं चाहता हूँ” उसके बारे में सोचने में लगा सकता हूँ| इनमें से कुछ नकारात्मक विचार, फिर भी जब-तब मेरे मन में आते ही रहेंगे, लेकिन मैं उन विचारों को सकारात्मक विचारों से बदल सकता हूँ| अपनी कल्पना में, मैं बच्चों के साथ सुहावने सफर पर जा सकता हूँ तब भी जब इसे सहारा देने के लिए कोई बाहरी सबूत मौजूद न हों| मुझे सबूतों को ‘बाहर” तलाशने की कोई जरूरत नहीं होती, जबकि उन सबूतों का निर्माण भी तो मैं खुद ही कर रहा होता हूँ| जब मेरे संकल्प सकारात्मक होते हैं, तो मैंने पाया है कि चमत्कारिक(magically) ढंग से बच्चों का व्यवहार भी बेहतर हो जाता है| जब मैं उनके साथ अकेला होता हूँ तो आम-तौर पर उनका व्यवहार काफी अच्छा होता है| लेकिन उनका व्यवहार, वे जिस व्यक्ति के साथ होते हैं, उसकी उम्मीदों के मुताबिक़ बदल जाता है| मेरी श्रीमती जी भी अब इस बात को समझने लगी हैं|

क्या होगा अगर मैं, ‘जो कुछ मुझे मिल रहा है’, उसकी जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दूं? क्या होगा अगर मैं कहना शुरू कर दूं कि, ‘ये समस्याएं किन्हीं बाहरी कारणों की वजह से पैदा हो रहीं हैं, और मैं तो ‘जो कुछ हो रहा है’ उस पर सिर्फ ध्यान दे रहा हूँ”? तो फिर मैं अपने हालात को बदलने की शक्ति खो दूंगा| अगर मैं अपने विचारों को ‘जो कुछ मुझे मिल रहा है’ उस पर केंद्रित करना शुरू कर दूं तो फिर मैं, अनजाने ही आकर्षण के नियम को सक्रीय(activate) कर बैठूंगा जोकि मेरे जीवन में, इन्हीं चीजों का सतत प्रवाह(continuous flow) सुनिश्चित कर देगा| बुनियादी तौर पर मेरी हालात कभी भी नहीं बदलेंगे| और बदल भी कैसे सकते हैं? अगर मैं ‘जो कुछ मुझे मिल रहा है’ उसके बारे में ही सोचता रहूँ तो फिर मैं खुद को एक फंदे(loop) में उलझा लूँगा| (मेरी परिस्थितियाँ मेरे विचारों का निर्माण करेंगी और मेरे विचार मेरी परिस्थितियों का – सतीश)| और यह एक मजबूत फंदा होगा| अगर मेरा जीवन ‘जिन्हें मैं चाहता हूँ’ उन चीजों से भरा हुआ है तो मैं स्वर्ग में हूँ| वहीं दूसरी ओर अगर मेरे जीवन में उन चीजों की भरमार है, ‘जिन्हें मैं पसंद नहीं करता’ तो फिर मैं नर्क में हूँ|

अगर आपने पक्का इरादा किया हुआ है कि ‘जैसा आप नहीं चाहते’, आपको उन्हीं चीजों के बारे में सोचना है, तो निश्चित रूप से मैं आपको नहीं रोक सकता| ज्यादा-से-ज्यादा मैं यही कर सकता हूँ कि जो नतीजे आपको मिल रहे हैं उनके प्रति जिम्मेदारी का एहसास आपको करा दूँ, यह आपकी सजगता बढ़ाकर, यह जानने में कि आप अपने साथ क्या कर रहे हैं, आपकी मदद कर सकता है| लेकिन अगर आप खुद को धिक्कारना ही चाहते हैं तो बड़े शौक से ऐसा कीजिए| बस इतना जान लीजिए कि इस रास्ते में आगे आने वाली ‘शोक सभाओं’ (“मेरी तो किस्मत ही खराब है”, “मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है”, “क्या मेरे हालत कभी नहीं सुधरेंगे”?) में, मैं आपके साथ शामिल नहीं होने वाला| मैं आपकी मदद के लिए नहीं आने वाला और न ही कोई दूसरा व्यक्ति आपकी मदद कर पाएगा| केवल आप ही खुद की मदद कर सकते हैं|

मैंने ‘आकर्षण के नियम’ को सिर्फ इसलिए स्वीकार किया क्योंकि मैं खुद को परखना चाहता था| यह मेरी नजर में, खुद को पूरी तरह से साबित कर चुका है और अब मुझे इस पर संदेह नहीं होता| मुझे इस पर काम करते हुए कुछ वर्ष बीत चुके हैं, और यह अभी भी जब-तब मुझे आश्चर्यचकित(surprise) करता रहता है| यह किसने सोचा था कि हम ‘जैसा चाहते हैं’, सिर्फ उसके बारे में सोचकर, हम उसे आकर्षित कर सकते हैं? क्या वास्तविक संसार में चीजे वाकई इसी तरह से काम करती हैं| अगर यह असंभव लगता है, तो फिर इसके असंभव लगने का विचार भी दूसरे संकल्पों की तरह ही साकार होगा| अगर आप आकर्षण के नियम में विश्वास नहीं करते हैं तो आप वास्तव में इसका इस्तेमाल, खुद इसके ही खिलाफ कर रहे होंगे, जोकि इस नियम का एक पूरी तरह से जायज(valid) इस्तेमाल होगा, हालाँकि ऐसा करने पर आपको काफी निराशा का सामना करना होगा|

मैं अपने जीवन में खुशी और उत्साह से भरा हुआ रहता हूँ, उसका एक कारण यह है कि मैं, आकर्षण के नियम के साथ तालमेल बैठाने में लगातार बेहतर होता जा रहा हूँ| मुझे इसके साथ प्रयोग करना बेहद पसंद है| जब मैं उसके बारे में सोचता हूँ ‘जैसाकि मैं चाहता हूँ’, तो मुझे इसकी बड़ी उत्सुकता रहती है कि, देखते हैं कि यह कब साकार होना शुरू होता है| जब मैं ‘संकल्प-साकार’ होने की प्रक्रिया को नियंत्रित(control) करने की कोशिश करता हूँ तो अक्सर मैं इस प्रक्रिया में रुकावट(block) पैदा कर देता हूँ| लेकिन जब मैं इसे स्वाभाविक रूप से अपना काम करने देता हूँ, तब आखिरकार इसका प्रभाव साफ़ तौर से नजर आने लगता है| सही लोग, संसाधन(resources) और अवसर, मुझे तलाशते हुए, मुझ तक पहुँच जाते हैं, और ऐसा आम तौर पर ऐसे तालमेल(synchronicities) बनने के कारण होता है जिनकी मुझे बिलकुल भी उम्मीद नहीं होती|

मेरे दिमाग के ‘शक करने वाले हिस्से(skeptical part)’ को यह स्वीकार करने में दिक्कत होती है कि वास्तविक संसार में चीजें इस तरह से भी काम कर सकती हैं| इसे वास्तविकता के एक नए ढाँचे(मॉडल) की जरूरत होती है जिसमें ‘आकर्षण का नियम’ फिट हो सके| इसी कारण, मुझे अपनी धारणाओं(believes) में कई बड़े परिवर्तन करने पडे ताकि उनमें आकर्षण के नियम के लिए गुंजाइश बन सके| इसने मुझे वास्तविकता को व्यक्तिपरक(subjective) नजरिए से देखने के लिए प्रेरित किया जोकि अंततः(finally) मेरे सोच-विचार करने का स्वाभाविक तरीका बन गया|

क्या हो सकता है और क्या नहीं?, इसके बारे में अपनी सोच का दायरा बढाने के बाद से, मैंने बहुत सी ऐसी चीजों का अनुभव किया है जिन्हें पहले मैं नामुमकिन समझा करता था| उदाहरण के तौर पर, शनिवार के दिन, अपनी ‘रेकी’ क्लास के दौरान मैंने एक विस्मित(fascinating) कर देने वाला प्रयोग देखा (मैं इसके बारे में जरुर लिखूंगा अगर मुझे इसे दोहराने का मौका मिल पाया तो)| मेरे दिमाग का ‘शक करने वाला हिस्सा’, अब इसका अधिक विरोध नहीं करता, क्योंकि उसे अब ऐसी चीजों के अस्तित्व की व्याख्या(explaning) करने वाला, एक नया संदर्भ(context) मिल गया है| और हर बार, जब भी यह ऐसी चीजों के अस्तित्व को स्वीकार करता है, तो नई संभावनाओं के दरवाजे खुलते चले जाते हैं|

यह सब, अपनी वास्तविकता की 100% जिम्मेदार स्वीकार करने से शुरू होता है| वह आप ही हैं जोकि, इस वक्त भी, इसका निर्माण कर रहे हैं| आप किसकी रचना कर रहे हैं – ‘जैसा कि आप चाहते हैं’, या फिर ‘जैसा कि आप नहीं चाहते’| अपने विचारों में परिवर्तन लाईए, और आप देखेंगे कि आपकी वास्तविकता में भी परिवर्तन आना शुरू हो जाएगा|
[यह article आपको कैसा लगा, कृपया comments के जरिए इस पर अपनी राय जाहिर करें, अगर आपके पास इस article से जुडी कोई जानकारी या सुझाव हो तो आप उसे 3kbiblog@gmail.com पर भेज कर हमारे साथ share कर सकते हैं | ]

नए लेख ई-मेल से प्राप्त करें : 


कुछ सम्बंधित लेख पढ़ें :
२० मिनट में कैसे आप अच्छा महसूस कर सकते हैं?
अपने लक्ष्य को हासिल करने का बेहतर तरीका कौन सा है

कुछ अन्य बाहरी  लिंकस

4 टिप्‍पणियां:

  1. behtarin kaam kar rahe hai aap ,,,,,,bahut bahut dhanywaad

    उत्तर देंहटाएं
  2. लेख सराहने के लिए आपका बेहद आभार|
    आकर्षण का नियम आपको वही देता है जोकि आप वास्तव में चाहते हैं| पूरे दिन में अपने विचारों का आकलन करें और पता करें कि कितने विचार आपके संकल्प के पक्ष में हैं और कितने विपरीत| अगर आपके अधिकतर विचार संकल्प के पक्ष में हैं तो आकर्षण का नियम उन संकल्पों को जल्द ही आपके जीवन में साकार कर देगा|

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही अच्छी और उपयोगी जानकारी है | रांडा बर्न की पुस्तक 'द सीक्रेट ' मैं पढ़ चुका हूँ लेकिन इस लेख में आपने जो अपना अनुभव और प्रयोग अंकित किया है, वह मेरे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है | इसके लिए धन्यवाद |

    उत्तर देंहटाएं

इस लेख पर अपनी राय जाहिर करने के लिए आपका धन्यवाद|