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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: शुक्रवार, 24 अगस्त 2012

कठिन लोगों का सामना कैसे करें?

(Original Post : Dealing with Difficult People, November 20th, 2004 by Steve Pavlina)   

आप कैसे कठिन, तर्कहीन(irrational) या फिर गाली-गलौच करने वाले लोगों का सामना कर सकते हैं, खासकर कि तब जबकि वे उन पदों(positions) पर आसीन हों जहाँ से वे आपके जीवन के एक हिस्से को नियंत्रित कर सकते हों?

मैं(स्टीव पव्लीना) कभी भी किसी ऐसे व्यक्ति से नहीं मिला जोकि पूरी तरह से तर्कसंगत(rational) हो| जानकारी को इकठ्ठा करने और उसे संसाधित(process) करने की हमारी काबलियत, पूर्णता(perfection) से कोसों दूर है| लेकिन हमारी भावनाएँ हमें एक छोटा रास्ता दिखाती हैं| ‘डैनियल गोल्मैन’ नें अपनी किताब ‘ईमोशनल इंटलीजैंस’ में उन लोगों के बारे में विस्तार से बताया है जोकि अलेक्साथेमिया(alexathemia) के शिकार होते हैं, यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें लोग या तो अपनी भावनाओं को महसूस ही नहीं करते या फिर वे अपनी भावनाओं से पूरी तरह से नाता तोड़ लेते हैं| आप शायद सोचने लगें कि ऐसे लोग तो बेहद समझदार/तार्किक होते होंगे, लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है| वे तो दुनिया में अपना काम भी ठीक तरह से नहीं कर पाते| उनके पास, यह तय करने के लिए कोई भावनात्मक संदर्भ(context) नहीं होता, कि उनके लिए क्या ज्यादा जरूरी है और क्या नहीं? उनके लिए एक रुपया कमाना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना कि एक लाख रूपये कमाना| वे उन कार्यों को करते हुए घंटो बिता देते हैं, जिन्हें हम चुटकी बजाते ही निपटा सकते हैं, जैसेकि डेंटिस्ट के पास जाने के लिए कौन सा समय सही रहेगा? हमारी भावनाएँ हमें एक छोटा तर्क-संगत रास्ता दिखाती हैं – हम जरूरी और गैरजरूरी चीजों के बीच के अंतर को महसूस कर लेते हैं|

Last Modified: मंगलवार, 7 अगस्त 2012

आखिर आपका मूल्य क्या है?

(Original Post : What is Your Value?, August 30th, 2005 by Steve Pavlina)  

पिछले गुरूवार जब मैंने(steve pavlina) “माध्यम और सन्देश”(लेख जल्द ही उपलब्द्ध होगा) का विषय उस एक 20-मिनट के व्याख्यान(speech) के दौरान उठाया, जो मैंने अपने एक ‘टोस्टमास्टर क्लब’ में दिया था, तो मैंने हरेक श्रोता को एक फर्जी(fake) बिजनेस कार्ड बनाने को कहा जिस पर उन्होंने अपना नाम और कैरियर लिखा| फिर स्पीच के अंत मैं मैंने उन्हें फिर से ऐसे करने को कहा, और बेशक नतीजे बिलकुल अलग थे क्योंकि लोग अब अपने कैरियर के बारे में अलग तरह से सोच रहे थे|

यह मान बैठना कि हमें अपनी कैरियर के दायरे में रहकर ही काम करना है एक जाल में फंसने जैसा है| शायद आप खुद से कहें कि, “मैं एक बड़ी कंपनी में नौकरी करता/करती हूँ|” लेकिन अपनी कैरियर को एक ऐसी चीज के रूप में देखना जोकि आपमें ही समाहित(contiained) हो आपको कहीं अधिक शक्तिशाली बनाता है| इसलिए आप कुछ इस तरह से सोच सकते हैं, “इस कंपनी को मैंने अपनी रचनात्मक-अभिव्यक्ति (self-expression) के लिए चुना है|” बजाय इसके कि आप कंपनी में एक स्थान ग्रहण(holding a position) करें, आप कंपनी को अपने अंदर एक स्थान ग्रहण करते हुए देखें| यह कुछ ऐसा होगा जैसे कि आपने किसी कंपनी की सेवाओं(services) को किराए पर लिया हो, और जो सेवा वह कंपनी आपको देगी वह होगी ‘अपने मूल्य को दूसरे लोगों तक पहुंचाने में आपकी मदद करना|’