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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: मंगलवार, 7 अगस्त 2012

आखिर आपका मूल्य क्या है?

(Original Post : What is Your Value?, August 30th, 2005 by Steve Pavlina)  

पिछले गुरूवार जब मैंने(steve pavlina) “माध्यम और सन्देश”(लेख जल्द ही उपलब्द्ध होगा) का विषय उस एक 20-मिनट के व्याख्यान(speech) के दौरान उठाया, जो मैंने अपने एक ‘टोस्टमास्टर क्लब’ में दिया था, तो मैंने हरेक श्रोता को एक फर्जी(fake) बिजनेस कार्ड बनाने को कहा जिस पर उन्होंने अपना नाम और कैरियर लिखा| फिर स्पीच के अंत मैं मैंने उन्हें फिर से ऐसे करने को कहा, और बेशक नतीजे बिलकुल अलग थे क्योंकि लोग अब अपने कैरियर के बारे में अलग तरह से सोच रहे थे|

यह मान बैठना कि हमें अपनी कैरियर के दायरे में रहकर ही काम करना है एक जाल में फंसने जैसा है| शायद आप खुद से कहें कि, “मैं एक बड़ी कंपनी में नौकरी करता/करती हूँ|” लेकिन अपनी कैरियर को एक ऐसी चीज के रूप में देखना जोकि आपमें ही समाहित(contiained) हो आपको कहीं अधिक शक्तिशाली बनाता है| इसलिए आप कुछ इस तरह से सोच सकते हैं, “इस कंपनी को मैंने अपनी रचनात्मक-अभिव्यक्ति (self-expression) के लिए चुना है|” बजाय इसके कि आप कंपनी में एक स्थान ग्रहण(holding a position) करें, आप कंपनी को अपने अंदर एक स्थान ग्रहण करते हुए देखें| यह कुछ ऐसा होगा जैसे कि आपने किसी कंपनी की सेवाओं(services) को किराए पर लिया हो, और जो सेवा वह कंपनी आपको देगी वह होगी ‘अपने मूल्य को दूसरे लोगों तक पहुंचाने में आपकी मदद करना|’

ऐसा क्यों है कि उच्च-स्तर के पेशावर वक्ताओं(Professional speakers) को 45-मिनट की एक स्पीच के लिए $10,000 (रु 5,50,000)  से अधिक की धनराशि मिलती है| आखिर कैसे ये वक्ता अपनी फीस को इतने ऊंचे स्तर पर कायम रख पाते हैं? इसका एक कारण यह भी है कि ये उच्च-स्तर के वक्ता, जो मूल्य वे दूसरों को प्रदान करते हैं, उसकी कीमत को समझते हैं| और उनका मूल्य, उनकी इस काबलियत में निहित(lies) होता है कि वे बहुत ही थोड़े समय में लोगों की सोच को बदल सकते हैं, कभी-कभी तो हमेशा के लिए| मैनें भी ऐसी कई प्रस्तुतियों(presentaions) में हिस्सा लिया हैं जहाँ पर वक्ता ने एक घंटे से भी कम समय में मेरी सोच को हमेशा के लिए बदल दिया| केवल एक ही विचार जिसे सही तरह से प्रस्तुत किया गया हो, इतना मूल्यवान साबित हो सकता है कि वह पूरे सेमिनार की कीमत को जायज ठहरा देता है| वे वक्ता, जो इस तरह के बदलाव को उत्पन्न(effect) कर सकते हैं उनकी संख्या, मांग(demand) की तुलना में बहुत ही कम है, और इसलिए, भुगतान की दर(pay-rates) हमेशा ऊँची बनी रहती हैं|

एक वक्ता का मूल्य अंततः इस बात पर निर्भर करता है कि इससे उसके श्रोताओं(audience) को कितना फ़ायदा होता है| आखिर उसका वास्तविक असर क्या है? इसी तरह से, आपका मूल्य (आपके कैरियर के मामले में) इस बात पर निर्भर करता है कि आप दूसरों के लिए ऐसा क्या कर पाते हैं जिनसे उनको किसी-न-किसी तरह से फ़ायदा हो| इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप के पास कौन-कौन सी डिग्रीयां हैं या फिर आप अभी किस पद(post) पर हैं| जोकुछ आप दूसरों को दे सकते हैं वही आपका मूल्य होता है| आप जोकुछ भी करते हैं आखिरकार उसका वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है?   

जब आप सचेत होकर उस मूल्य को समझने लगते है जोकि आप अपने काम के माध्यम से दूसरों को उपलब्ध कराते हैं, तो फिर आप, सोच-विचार करके अपना पूरा ध्यान उस मूल्य को बढाने में लगा सकते हैं| मिसाल के तौर पर, एक पेशेवर वक्ता अपने मूल्य को, कम से कम वक्त में, ज्यादा-से-ज्यादा लोगों को, अधिक गहराई से और अधिक लंबे समय के लिए प्रभावित करने की अपनी काबलियत का विकास करके, बढ़ा सकता है| 

और यह वास्तव में सहज ज्ञान ही है, लेकिन हममें से ज्यादातर लोग अपना ध्यान अपने मूल्य से हटा कर, बचत करने की बारीकियों में उलझ कर रह जाते हैं| दूसरे छोर पर आपका मूल्य किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा ग्रहण(receive) किया जाना चाहिए, वरना आपका मूल्य व्यर्थ ही जाएगा| आप, अपने काम के द्वारा जो मूल्य उपलब्ध कराते हैं उससे किन व्यक्तियों को सबसे अधिक फ़ायदा हो सकता है, और कैसे आप, उनके लिए अपनी सेवा को और बढ़ा सकते हैं?

[यह article आपको कैसा लगा, कृपया comments के जरिए इस पर अपनी राय जाहिर करें, अगर आपके पास इस article से जुडी कोई जानकारी या सुझाव हो तो आप उसे 3kbiblog@gmail.com पर भेज कर हमारे साथ share कर सकते हैं | ]

4 टिप्‍पणियां:

  1. सार्थक और प्रेरित करता लेख!

    कुँवर जी,

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  2. बहुत अच्छा प्रेरणादायक आलेख

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    1. लेख पसंद करने के लिए आपका धन्यवाद|

      हटाएं

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