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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: गुरुवार, 20 सितंबर 2012

खुशी पहले, बाकी सब बाद में

(Original Post : Happiness First, Then Everything Else, August 12th, 2012 by Steve Pavlina)   

अगर आप एक नौकरी, एक सम्बंध, या फिर एक ऐसी जीवन-शैली(lifestyle) को स्वीकार करते हैं जिसे आप सहन(tolerate) तो कर सकते हैं लेकिन जिसे आप सराह(appreciate) नहीं पाते तो इसका सीधा सा अर्थ यह है कि आप, अपनी खुशी से ज्यादा किसी और चीज को अहमियत दे रहे हैं|

सामाजिक-अनुकूलन(social conditioning) ने शायद आपको यकीन दिला दिया है कि अपने बैंक खाते में एक निश्चित रकम बनाए रखने के लिए, अपने लोन की किश्तों का भुगतान सही समय पर करने के लिए, या फिर किसी और की जरूरतें पूरी करने के लिए, अपनी खुशियों की बलि चढाना ही जीने का एक सही तरीका है| बचपन से हमें यही तो सिखाया जाता है कि आपको जिममेदार बनना है और एक अच्छी सी स्थायी(stable) नौकरी हासिल करनी है|

इस अनुकूलन(conditioning) के मुताबिक़, अगर आप इन चीजों को ठीक से करते हैं तो फिर आप सफल हैं| आप वही कर रहे हैं जिसकी आपसे उम्मीद की जाती है, और ऐसा करने पर कोई आपको दोषी(fault) नहीं ठहरा सकता|

लेकिन अभी, या फिर कुछ समय के बाद आपको महसूस होने लगता है कि अपने बिल सफलतापूर्वक चुकाने  और दूसरों की जरूरतें पूरी करने की इस जद्दोजहत(struggle) में, खुद को ऐसी जिंदगी से महरूम(deprive) रखना, जिसमें आपको खुशी मिलती है और जिसे आप वाकई जीना चाहते हैं, सफलता नहीं है| बल्कि हकीकत में तो यह बुरी तरह से असफल होना है|