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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: मंगलवार, 2 अक्तूबर 2012

हिम्मत एक प्रवेशद्वार है

(Original Post : Courage is the Gateway, March 30th, 2005 by Steve Pavlina)  

डॉ डेविड हव्किंस नें अपनी किताब “Power vs. Force : The Hidden Determinants of Human Behavior”, में एक अनुक्रम(hierarchy) के बारे में जिक्र किया है जिसमें मनुष्य की भावनात्मक अवस्थाओं के बारे में बताया गया है जहाँ पर शर्म और अपराध-बोध(guilt) सबसे निचले पायदान पर और शांति और ज्ञान(enlightenment) सबसे ऊँचे पायदान पर स्थित होते हैं|

हव्किंस ये दावा करते हैं कि जहाँ निचले स्तर की भावनात्मक अवस्थाएं हमें कमजोर करती हैं वहीं उच्च स्तर की अवस्थाएं हमें शक्तिशाली बनाती हैं| और हिम्मत, शक्ति और कमजोरी(दुर्बलता) के बीच की वह रेखा होती है जो इन दोनों अवस्थाओं को विभाजित करती है| यह पहली सकारात्मक अवस्था होती है| हिम्मत, ऊर्जा के निम्न(lower) स्तरों को, जहाँ हमें ऐसा लगता है कि जैसे हम जीवन से संघर्ष कर रहे हों, ऊर्जा के उच्च स्तरों, जहाँ हम जीवन के साथ सहयोग करने लगते हैं, से अलग करती है| जैसा कि हव्किंस लिखते हैं :


“हिम्मत के इलाके में आपको खोज-बीन, उपब्द्धियाँ, धैर्य और पक्के इरादे जैसी चीजें मिलती हैं| निचले स्तरों पर दुनिया हताशा, उदासी, डर और निराशा से भरी हुई एक जगह नजर आती है; लेकिन हिम्मत के स्तर पर जीवन, उत्साह, चुनौतीपूर्ण और जोश से भरा हुआ लगने लगता है| जो रुकावटें, उन लोगों को जिनकी चेतना का स्तर निम्न(lower) होता है, आसानी से हरा देती हैं, वही रुकावटें, उन लोगों को जूनून से भर देती हैं जोकि खुद को वास्तविक शक्ति के पहले स्तर तक उठा लेते हैं| और यहीं से उत्पादकता(productivity) की शुरुआत होती है|”
हिम्मत, चरित्र की शक्ति और कमजोरी को विभाजित करने वाली रेखा है| अगर आप उस परिस्थिति से आगे निकलना चाहते हैं जहाँ पर आप अपना जीवन डर और चिंता के साए(shadow) में जीते हैं, तो अंततः आपको हिम्मत की शक्ति को अपनाना ही होगा| हालाँकि यह विकास का सबसे ऊँचा स्तर नहीं है जिसे आप हासिल कर सकते हैं, यह कहीं ज्यादा दृढ-स्तरों(persistent states) जैसेकि विचार(reason), प्यार, खुशी और शांति की ओर बढते हुए आपका पहला सकारात्मक कदम होता है| इस स्तर पर आप खतरे और जोखिम को देखते हैं, उसे स्वीकार करते हैं, और फिर डर के बावजूद भी कार्यवाही(काम) करते हैं| और इसका असर यह होता है कि आपके जीवन से डर का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है, और ऐसा इसलिए होता है ताकि आप विकसित होकर ऊँचे स्तरों तक पहुँच पाएं जहाँ पर आपकी जरूरतें आसानी से पूरी हो सकें और डर की जरूरत ही खत्म हो जाए| आप समझ जाते हैं कि किसी चीज से डरने की कोई जरूरत ही नहीं है और डर आपको उतना ही डराता है, जितना डरावना आप उसे अपने मन में बनाते हैं| और जब ऐसा होता है तो आप सीख जाते हैं कि कैसे आप अपने भीतर डर की रचना करना बंद कर सकते हैं| डर ‘एक प्रवेशद्वार(gateway)’ इस वजह से है क्योंकि इसे पार करने से पहले आपको अपने डरों के चेहरे से नकाब हटाना होता है तब भी जबकि वे आपको बिलकुल असली नजर आ रहे होते हैं| जब तक आप उनसे बचते रहेंगे, आप खुद को कमजोर बनाए रखेंगे| लेकिन उनका सामना कीजिए और वे गायब हो जाएंगे| 

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