Google Custom Search


Custom Search

आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: शुक्रवार, 28 दिसंबर 2012

चेतना के स्तर

(Original Post : Levels of Consciousness, April 7th, 2005 by Steve Pavlina

डेविड आर. हव्किंस, अपनी किताब Power vs. Force, में मानव-चेतना के विभिन्न स्तरों के एक अनुक्रम(hierarchy) के बारे में बताते हैं| यह एक बड़ी ही रोचक मिसाल है| अगर आप इस किताब को पढ़ें तो आप बड़ी ही आसानी से यह पता कर सकते हैं कि अपनी वर्तमान जीवन अवस्था के मुताबिक़ आप, इस अनुक्रम में कहाँ पर स्थित है|

चेतना के स्तर, बढते हुए क्रम में इस प्रकार हैं : शर्मिंदगी(shame), ग्लानी(guilt), उदासीनता(apathy), शोक(grief), डर, इच्छा, क्रोध, अभिमान(pride), हिम्मत, निष्पक्षता(neutrality), तत्परता(willingness), स्वीकृति, विचार(reason), प्रेम, आनंद, शांति, ज्ञानोदय(enlightenment)|

हालांकि हम अलग-अलग समय पर विभिन्न स्तरों पर होते हैं, फिर भी आमतौर पर हमारे लिए एक प्रमुख ‘सामान्य’ स्तर होता है|  अगर आप इस ब्लॉग को पढ़ रहे हैं तो इस बात की संभावना अधिक है कि आप इस वक्त कम-से-कम हिम्मत के स्तर पर हैं क्योंकि अगर आप एक निम्न स्तर पर होते तो फिर आप सचेत होकर व्यक्तित्व विकास करने में शायद कोई रूची(interest) ही नहीं लेते|

मैं(स्टीव पव्लीना) बारी-बारी से इन स्तरों के बारे में आपसे बात करूँगा, ‘हिम्मत’ और ‘विचार’ के बीच के स्तरों पर खास ध्यान देते हुए, क्योंकि यही वह दायरा है जहां पर आप इस वक्त हो सकते हैं| स्तरों के नाम(labels) हव्किंस के हैं| हर स्तर का विवरण हव्किंस के विवरणों पर आधारित है, लेकिन इसमें मैंने अपने विचार भी शामिल किए हैं| हव्किंस इसका वर्णन लघुगुणक(logarithmic) scale के रूप में करते हैं, इसलिए उच्च स्तरों पर निम्न स्तरों के मुकाबले बहुत ही कम लोग होते हैं| एक स्तर से अगले उच्च स्तर पर जाने के नतीजतन(result) आपके जीवन में भारी बदलाव आते हैं|

शर्मिंदगी : यह मृत्यु से बस एक ही कदम ऊपर का स्तर होता है, इस स्तर पर शायद आप खुदकुशी का इरादा रखते हैं| या फिर आप एक serial killer(कार्मिक हत्यारे) होते हैं| इसके स्तर पर आप खुद से ही नफरत करने लगते हैं|

ग्लानी :  शर्म से ऊपर का एक स्तर, हालाँकि अभी भी शायद आपके मन में ख़ुदकुशी के विचार आते रहते है| अपनी नजरों में आप एक दोषी इंसान होते हैं, आप खुद को, पुरानी बातों के लिए माफ नहीं कर पाते|

उदासीनता : आप निराशा महसूस करते हैं और खुद को पीड़ित(victimized) मानते हैं| एक ऐसी स्थिति जिसमें आप खुद को असहाय समझते हैं| काफी बेघर(homeless) लोग इस स्तर पर फंसे रहते हैं|

शोक : एक स्तर, जहाँ पर हमेशा आपको उदासी और किसी को खोने का गम सताता रहता है| अपने किसी करीब व्यक्ति के गुजर जाने की स्थिति में आप इसी स्तर पर होते हैं| डिप्रेशन, गहरी उदासी| फिर भी यह स्तर 'उदासीनता' से ऊपर का एक स्तर है क्योंकि आप संवेदनशून्यता(numbness) से बाहर निकलने की शुरुआत कर रहे होते हैं|

डर :  दुनिया को आप एक डरावनी और असुरक्षित जगह की तरह देखते हैं|  डर, आपकी सोच पर हावी होने लगता है| आमतौर पर, इस स्तर से ऊपर उठने के लिए आपको मदद की जरूरत होती है वर्ना आप काफी लंबे वक्त के लिए यहीं पर फंसे रह सकते हैं, जैसेकि गाली-गलौच/मारपीट करने वाले एक सम्बन्ध में|

इच्छा : अपने लक्ष्य तय करने और उन्हें हासिल करने के विपरीत, इस स्तर पर आप लत, लालसा(cravings) और लालच के शिकार होकर धन-दौलत, स्वीकृति(approval), सत्ता(power), शोहरत आदि की तलाश करते हैं| उपभोग, भौतिक सुख-सुविधा आदि| यह स्तर है धूम्रपान करने, शराब पीने और नशीली दवाओं के सेवन का|

क्रोध : निराशा का स्तर, अधिकतर बार निराशा तब होती है जब आपकी इच्छाएं निचले स्तरों पर पूरी नही हो पाती हैं| यह स्तर आपको अगले उच्च स्तर पर जाने के लिए प्रेरित भी कर सकता है, या फिर आपको नफरत करने के जाल में फंसाए रख सकता है| एक गाली-गलौच/मारपीट करने वाले सम्बन्ध में आप पाते हैं कि एक व्यक्ति गुस्सैल होता है जबकि दूसरा व्यक्ति डरा हुआ रहता है|

अभिमान : वह पहला स्तर जहां पर आपको अच्छा महसूस होने लगता है, लेकिन धोखा मत खाईए, ऐसा महसूस करना एक छलावा भर होता है| क्योंकि यह बाहरी परिस्थितियों जैसेकि धन-दौलत, रुतबे, आदि पर निर्भर होता है, इसलिए यह बड़ा असुरक्षित(vulnerable) होता है| अभिमान आपको देशभक्ति, जातिवाद, धार्मिक युद्धों(wars) की और ले जाता है| ज़रा हिटलर के बारे में सोचिए| तर्कहीन जिद और बचाव का एक स्तर| धार्मिक कट्टरपंथी भी इसी स्तर पर फंसे हुए होते हैं| आप अपनी मान्यताओं के साथ इतने करीब से जुड जाते हैं कि अपनी मान्यताओं पर हुए हमले को आप, खुद पर हुए हमले की तरह देखने लगते हैं|

हिम्मत :  वास्तविक शक्ति का पहला स्तर| मैंने इसके बारे में पहले भी अपनी लेख (link to courage is the gateway) में लिखा है| इस स्तर पर आपको जीवन चुनौतियों और रोमांच से भरा हुआ नजर आने लगता है| आप महसूस करने लगते हैं कि व्यक्तित्व विकास में आपकी रूचि लगातार बढ़ रही है, हालाँकि इस स्तर पर आप शायद इसे हुनर-सीखने(skill-building), अपने कैरियर को आगे बढाने और शिक्षा हासिल करने आदि,  नामों से जानते हैं| आप भविष्य को अपने अतीत से बेहतर होता हुआ देखने लगते हैं बजाय सिर्फ अतीत को दोहराते रहने के|

निष्पक्षता :  इस स्तर का सार 'जियो और जीने दो' के वाक्य में समाया हुआ है| यह स्तर लचीला, तनाव मुक्त और स्वतंत्र होता है|
हालात चाहे जैसे भी हों आप अपना संतुलन नही खोते| आपको कुछ भी साबित करने की कोई जरूरत नहीं होती| आप सुरक्षित महसूस करते हैं और दूसरे लोगों के साथ आसान से मेलजोल बढ़ा लेते हैं| काफी लोग जोकि आत्मनिर्भर/स्वनियोजित(self-employed) होते हैं इसी स्तर पर होते हैं| एक बहुत ही आरामदायक स्थान| आत्मसंतोष(complacency) और आलस्य का एक स्तर| आप अपनी जरूरतों का ख्याल रखते हैं लेकिन आगे बढ़ने के लिए खुद पर बहुत ज्यादा दबाव नहीं डालते|

तत्परता :  अब जबकि आप मूल रूप से सुरक्षित और आरामदायक स्थिति में होते हैं, आप और अधिक प्रभावी ढंग से अपनी ऊर्जा का उपयोग करना शुरू देते हैं| अब सिर्फ 'काम चलने' से बात नहीं बनती| आप अपने काम को बेहतरीन तरीके से करने के बारे में सोचने लगते हैं| आप ऐसी चीजों, टाईम-मैनेजमेंट, उत्पादकता(productivity) और खुद को व्यवस्थित(organised) करने, के बारे में विचार करने लगते हैं जोकि 'निष्पक्षता' के स्तर पर आपके लिए इतना जरूरी नहीं होता| यह स्तर, इच्छाशक्ति और आत्म-अनुशासन के विकास का होता है| ऐसे लोग समाज के 'सैनिक' होते हैं : वे चीजों को अच्छे ढंग से करते हैं और ज्यादा शिकायतें नहीं करते| अगर आप स्कूल में हैं तो फिर आप वाकई में एक अच्छे स्टूडेंट होते हैं; आप अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर होते हैं और काम को अच्छी तरह से करने के लिए जरूरी समय लगाते हैं| इस बिंदु पर आपकी चेतना, व्यवस्थित और अनुशासित होती हैं|

स्वीकृति :  अब एक जबरदस्त बदलाव होने लगता है और आपके अंदर, लगातार सचेत रहकर जीवन जीने की संभावनाएं, जन्म लेने लगती हैं| 'तत्परता' के स्तर पर आप खुद को सक्षम बना चुके होते हैं, और अब आप अपनी काबलियत का सही इस्तेमाल करना चाहते हैं| यह लक्ष्यों को निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने का स्तर होता है| हालांकि हव्किंस नें इस स्तर को 'स्वीकृति' का नाम दिया है, लेकिन मुझे इस स्तर का यह नाम खास पसंद नहीं है, बुनियादी तौर पर इसका अर्थ है कि आप दुनिया में अपनी भूमिका की जिम्मेदारी स्वीकार करना शुरू कर देते हैं| अगर आपके जीवन में आपको कोई बात सही नहीं लगती है (आपका कैरियर, आपकी सेहत, आपके सम्बन्ध) तो आप पता लगाते हैं कि आपको क्या चाहिए और फिर आप इसे बदल देते हैं| आप अपने जीवन को उसकी सम्पूर्णता(broadness) में साफ़-साफ देखना शुरू कर देते हैं| इस स्तर पर बहुत से लोग अपना कैरियर बदल देते हैं, एक नए बिजनेस की शरुआत करते हैं, या फिर अपने भोजन में बदलाव करते हैं|

विचार :  इस स्तर पर आप निचले स्तरों के भावनात्मक-पहलुओं (emotional aspects) को पीछे छोड कर आगे बढ़ जाते हैं फिर स्पष्ट रूप से और तर्क-वितर्क करते हुए सोचने लगते हैं| हव्किंस इसका विवरण दवाओं और विज्ञान के स्तर की तरह देते हैं| मुझे(स्टीव पव्लिना) को लगता है कि, जब आप इस स्तर पर पहुँचते हैं तो आपकी तार्किक-शक्ति(reasoning ability) पूरी तरह से विकसित हो चुकी होती हैं| अब आपके पास अनुशासन होता है और आप सचेत होकर, अपनी प्राकृतिक क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह से तैयार होते हैं| आप उस बिंदु पर पहुँच चुके होते हैं जहां पर आप खुद से कहते हैं, "वाह! मैं यह सब कुछ कर सकता हूँ और मैं जानता हूँ कि मुझे अपनी इस शक्ति को अच्छे काम करने में लगाना होगा| अब मैं अपनी प्रतिभा का बेहतरीन उपयोग कहाँ पर कर सकता हूँ?" आप अपनी आस-पास की दुनिया पर एक नजर डालते हैं और फिर अपना सार्थक योगदान देना शुरू कर देते हैं| आइंस्टीन और फ्रायड इस स्तर की सबसे ऊँची अवस्था पर थे| यह तो शायद स्पष्ट ही है कि ज्यादातर लोग अपने पूरे जीवन में इस स्तर पर कभी नही पहुँच पाते|

प्रेम : मुझे, हव्किंस द्वारा इस स्तर को दिया गया नाम 'प्रेम' पसंद नहीं है क्योंकि यह स्तर प्यार की भावना का नहीं है| यह तो निस्वार्थ प्यार की भावना है, एक चिरस्थाई समझ जोकि सभी जीवों से आपके सम्बन्ध को समझाती है| यह क्षमा की तरह होता है| 'विचार' के स्तर पर आप, दूसरों की सेवा में अपने दिमाग को लगाते हैं| लेकिन आखिरकार आप एक बंद गली में पहुँच जाते हैं जहां पर आप सिर्फ एक बुद्धिजीवी(intellectual) बनकर रह जाते हैं| आप ध्यान देते हैं कि आपको 'सिर्फ सोचते रहने' से कहीं ज्यादा बड़े सन्दर्भ(context) की जरूरत है| प्रेम के स्तर पर आप अपने दिमाग और अपनी दूसरी प्रतिभाओं और क्षमताओं को अपनी ह्रदय(heart) की सेवा में लगाते हैं (सिर्फ अपनी भावनाओं के स्तर पर नहीं बल्कि सही-गलत की बेहतर समझ – अपनी चेतना के स्तर पर)| मैं इसे एक ऐसे स्तर के तौर पर देखता हूँ जहां आप अपने वास्तविक लक्ष्य के बारे में सचेत हो जाते हैं| इस स्तर पर आपके इरादे, अहंकार की इच्छाओं से दूषित हुए बिना, शुद्ध हो जाते हैं| यह स्तर मानवता के लिए अपना जीवन अर्पित करने का होता है| ज़रा गांधी, मदर टेरेसा, अल्बर्ट स्च्वेइत्जेर(en.wikipedia.org/wiki/Albert_Schweitzer) के बारे में सोचिए| इस स्तर पर आप पाते हैं कि आपसे से भी बड़ी एक शक्ति आपको रास्ता दिखा रही है| यह त्याग करने जैसा अनुभव होता है| आपका अंतर्ज्ञान(intution) बेहद शक्तिशाली हो जाता है| हव्किंस के मुताबिक़, 250 लोगों में से केवल एक ही व्यक्ति, अपने पूरे जीवनकाल(lifetimes) में इस स्तर तक पहुँच पाता है|

आनंद : एक स्थिति जिसमें आप स्थिर, लगातार विस्तारित(pervasive) होती हुई, खुशी का अनुभव करते हैं| Eckhart Tolle नें अपनी किताब “The Power of Now” में इस स्तर का जिक्र किया है| यह स्तर संतों और ज्ञानी आध्यात्मिक गुरुओं का होता है| ऐसे लोगों के करीब रहना, जोकि इस स्तर पर पहुँच चुके हैं, आपको बेहद सुकून का एहसास करा सकता है| इस स्तर पर जीवन पूरी तरह से तालमेल(synchronicity) और अंतर्ज्ञान से निर्देशित होता है| अब लक्ष्यों को निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए विस्तृत योजनाएं बनाने की जरूरत नहीं होती – आपकी चेतना का विस्तार आपको एक बहुत उच्च स्तर पर काम करने की क्षमता प्रदान करता है| मृत्यु का एक करीबी अनुभव आपको अस्थायी तौर से इस स्तर पर पहुंचा सकता है|

शांति : सम्पूर्ण ज्ञान-प्राप्ति(transcendence)| हव्किंस दावा करते हैं कि 1 करोड़ में से केवल एक ही व्यक्ति इस स्तर पर पहुँच पाता है|

ज्ञानोदय : मानव-चेतना का उच्चतम स्तर, जहां पर मानवता, दिव्यता(divinity) से गले मिलती है| बेहद दुर्लभ| भगवान् कृष्ण, महात्मा बुद्ध और यीशु मसीह का स्तर| इस स्तर पर स्थित लोगों के बारे में सिर्फ विचार करना ही, आपकी चेतना के स्तर को बढ़ा देता है|

मेरे विचार से आपको यह मॉडल गौर करने लायक लगेगा| केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि वस्तुएं, घटनाएं, और सम्पूर्ण समाजों को भी आप इन स्तरों के मुताबिक़ छांट सकते हैं| अपने खुद के जीवन में ही, हालाँकि आपके जीवन के कुछ हिस्से, दूसरे हिस्सों की तुलना में अलग स्तरों पर स्थित पर होंगे, लेकिन फिर भी आप पता लगा पाएंगे कि वर्तमान में आप मुख्य तौर पर किस स्तर पर है| आप शायद सामान्य रूप से ‘निष्पक्षता’ के स्तर पर हों लेकिन अभी भी आपके लिए धुम्रपान की लत(इच्छा का स्तर) को छोड़ना मुश्किल हो| आप खुद के भीतर जिन निचले स्तरों को पाते हैं वे जंजीरों(बेड़ियों/drags) की तरह जकड कर, आपको आगे बढ़ने से रोकते हैं| लेकिन आपको अपने जीवन में उच्च स्तर भी मिलेंगे| अगर आप ‘स्वीकृति’ के स्तर पर होकर एक ऐसी किताब पढ़ते हैं(जोकि ‘विचार’ के स्तर की हो), तो आपको बेहद प्ररेणा मिलती है| अभी वर्तमान में आप जिस किसी भी चीज से सबसे अधिक प्रभावित हों, ज़रा उसके बारे में सोचिए| इसमें से कौन सी वस्तु आपकी चेतना के स्तर को बढाती है? कौन सी चीज इसे नीचे ले जाती है?

चेतना के इन स्तरों के बारे में मुझे एक बात बेहद पसंद है, और वह बात यह है कि मैं खुद, अपने जीवन का विश्लेषण करके यह जान सकता हूँ मैं इन स्तरों से कैसे गुजरा हूँ| मुझे याद है कि बचपन में मैं काफी समय तक ‘ग्लानी’ के स्तर पर फंसा रहा था – मुझे बताया गया था कि मैं एक निर्बल पापी(sinner) हूँ और मेरी तुलना उस ‘किसी’ से की जाती थी जो ‘प्रेम’ या उससे भी उच्च स्तर पर स्थित थे| वहां से मेरी तरक्की ‘उदासीनता’ के स्तर पर हो गई, जहां पर मुझे कुछ भी समझ नहीं आता था| हाई-स्कूल तक आते-आते मैं ‘अभिमान’ के स्तर पर पहुँच चुका था – मैं एक जोशीला किशोर था, अपने स्कूल की एथलेटिक टीम का कैप्टन था, शाबाशी और पुरस्कारों की तो जैसे बरसात ही होती रहती थी, लेकिन मुझे उनकी लत हो गयी थी| ‘हिम्मत’ के स्तर को मैंने अपनी किशोरावस्था के आख़िरी वर्षों में छुआ, हालांकि मेरी हिम्मत का कोई फोकस नहीं था, लेकिन फिर मैंने अति कर दी और खुद को तरह-तरह की मुसीबतों में फंसा लिया| उसके बाद मैंने अगला एक साल ‘निष्पक्षता’ के स्तर पर बिताया और फिर 20 साल के उम्र के दौरान, काफी कोशिशों के बाद अपनी चेतना के स्तर को बढाने में कामयाब हुआ और पहले ‘तत्परता’ और फिर ‘स्वीकृति’ के स्तर पर पहुँच गया| अभी वर्तमान में मैं ‘विचार’ के स्तर पर हूँ और धीरे-धीरे ‘प्रेम’ के स्तर के करीब पहुंचता जा रहा हूँ| मुझे बार-बार ‘प्रेम’ के स्तर का अनुभव हो रहा है और यह अब मेरे जीवन के कई फैसलों को निर्देशित कर रहा है, हालांकि अभी भी यह मेरा स्वाभाविक स्तर नहीं बन पाया है| मुझे लगातार कई दिनों तक ‘आनंद’ के स्तर का भी अनुभव हुआ है, लेकिन अभी यह स्थायी नहीं है| उस स्तर पर मैं उत्साह से भरा हुआ रहता हूँ, जैसेकि मेरे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का तूफ़ान उमड़ रहा हो| यह मुझे मुस्कुराने के लिए मजबूर कर देता है| मैं आज सुबह से ही इस स्तर पर हूँ, शायद इसलिए क्योंकि मैंने सुबह से कुछ नहीं खाया है (जब मैं कुछ नहीं खाता या बहुत थोडा भोजन लेता हूँ तो मेरे लिए चेतना के उस स्तर पर पहुंचना आसान होता है)|

हम, किसी भी हफ्ते के दौरान, प्राकृतिक रूप से कई स्तरों के उतार-चढ़ाव से गुजरते रहते हैं, इसलिए आपको शायद 3-4 स्तरों का एक दायरा नजर आएगा, जहां पर आप अपना काफी वक्त गुजारते हैं| अपने ‘प्राकृतिक’ स्तर का पता लगाने का एक तरीका, इस पर ध्यान देना है कि आप मुसीबत के दौरान कैसा व्यवहार करते हैं? अगर आप एक संतरे को निचोड़ें तो आपको संतरे का रस मिलेगा क्योंकि संतरे के भीतर यही होता है| जब बाहरी घटनाएं आप पर दबाव डालती हैं तो आपके भीतर से क्या बाहर आता है? क्या आप परेशान हो जाते हैं और आपको कुछ भी नहीं सूझता(डर)? क्या आप लोगों पर चिल्लाना शुरू कर देते हैं(क्रोध)? क्या आप बचाव की मुद्रा में आ जाते हैं(अभिमान)? दबाव में होने पर मैं चीजों का गहराई से विश्लेषण(analysis) करना शुरू कर देता हूँ, हालाँकि अभी हाल ही में, मैं जब एक दबाव की परिस्थिति में था तो मैंने इसे अपने अंतर्ज्ञान(intuition) का उपयोग करके संभाला था, यह मेरे लिए एक बड़ा बदलाव था| इससे मुझे पता चलता है कि अब मैं धीरे-धीरे निस्वार्थ ‘प्रेम’ के स्तर के करीब पहुँच रहा हूँ क्योंकि उस स्तर पर, दबाव की स्थिति में भी अंतर्ज्ञान तक प्रभावी ढंग से पहुंचा जा सकता है|

आपके चेतना-स्तर पर, आपके वातावरण की हर चीज का प्रभाव पड़ता है| टीवी, फिल्में, किताबें, वेब-साइटें, लोग, जगहें, वस्तुएं, भोजन आदि| अगर आप ‘विचार’ के स्तर पर हैं तो टीवी पर ख़बरें देखना (जोकि मुख्य रूप से डर और इच्छा के स्तर पर होती हैं), आपके चेतना-स्तर को अस्थायी तौर पर नीचे ला सकता है| अगर आप ‘ग्लानी’ के स्तर पर हैं, तो फिर टीवी की ख़बरें आपके चेतना-स्तर को ऊपर उठा सकती हैं|

एक स्तर से दूसरे स्तर पर जाने के लिए ऊर्जा की एक विशाल मात्रा की जरूरत होती है| मैंने इसके बारे में, अपने लेख 'quantum leaps'(लेख जल्द ही उपलब्ध होगा) पर चर्चा के दौरान, पहले भी लिखा है| सचेत होकर प्रयास किए बगैर या फिर दूसरों की मदद के बिना, इस बात की अधिक संभावना है कि आप अपने वर्तमान स्तर पर ही बने रहेंगे जब तक कि कोई बाहरी शक्ति आपके जीवन में प्रवेश नहीं करती|

स्तरों के प्राकृतिक क्रम( progression) पर ज़रा ध्यान दीजिए, और ज़रा विचार कीजिए कि क्या होता है जब आप इस प्रक्रिया को छोटा करने की कोशिश करते हैं| अगर आप आत्म-अनुशासन में महारत हासिल किए बगैर, ‘विचार’ के स्तर और लक्ष्यों को निर्धारित करने(स्वीकृति) के स्तर पर पहुँचने की कोशिश करें, ऐसी हालत में आप इतने ज्यादा बेतरतीब और अस्थिर होंगे कि अपने मन-मस्तिष्क की पूरी क्षमता का इस्तेमाल ही नहीं कर पाएंगे| अगर आप ‘विचार’ को साधे(mastered) बिना, ‘प्रेम’ के स्तर पर पहुँचने के लिए खुद पर दबाव डालें, तो आप अत्याधिक भोलेपन और धार्मिक अंधविश्वास में फंस सकते हैं|

अपने वर्तमान स्तर से एक स्तर ऊपर उठना भी बेहद कठिन हो सकता है; ज्यादातर लोग अपने पूरे जीवन में ऐसा नहीं कर पाते| सिर्फ एक स्तर का बदलाव भी आपके जीवन के पूरी बुनियादी स्वरूप को बदल सकता है| और यही कारण है कि ‘हिम्मत’ के स्तर से निचले स्तरों पर स्थित लोगों के लिए, बिना किसी बाहरी मदद के, उच्च स्तरों पर पहुँचने की संभावना बेहद कम होती है| सचेत होकर इस पर काम करने के लिए हिम्मत की जरूरत पड़ती है; अंततः इसका अर्थ यह होता है कि आपको अधिक सचेत और जागरूक बनने के लिए अपनी वास्तविकता को बार-बार दाव(bet) पर लगाना पड़ता है| लेकिन जब कभी भी आप उस अगले स्तर पर पहुँचते हैं, तो आप पाते हैं कि यह दाव खेलकर आपने कोई गलती नही की| मिसाल के तौर पर जब आप ‘हिम्मत’ के स्तर पर पहुँचते हैं तो, आपके पुराने डर और झूठा अभिमान, अब आपको बचकाने(silly) लगने लगते है| जब आप ‘स्वीकृति’ के स्तर(अपने लक्ष्यों को निर्धारित करना और उन्हें हासिल करना) पर पहुंचकर, ‘तत्परता’ के स्तर पर एक सरसरी निगाह डालते हैं तो आप पाते हैं कि आप ट्रेडमिल(treadmill) पर एक चूहे की तरह भाग रहे थे – बेशक आप एक अच्छे धावक(runner) थे लेकिन आप दिशाहीन थे|

मेरे विचार से, एक इंसान के तौर पर हम जो सबसे महत्वपूर्ण काम कर सकते हैं वह है अपनी व्यक्तिगत चेतना के स्तर को ऊंचा उठाना| जब हम ऐसा करते हैं, तो हम चेतना के उन बढे हुए स्तरों को अपने आस-पास के लोगों में फैलाने लगते हैं| ज़रा कल्पना कीजिए कि यह दुनिया कितनी कमाल की जगह बन सकती है, अगर हम सभी व्यक्तियों को कम से कम ‘स्वीकृति’ के स्तर पर ला सकें| हव्किंस के अनुसार पृथ्वी पर 85% लोग ‘हिम्मत’ के स्तर से नीचे के स्तरों पर जीते हैं|

जब कभी भी आप अस्थाई तौर से उच्च स्तरों का अनुभव करते हैं, तो आप आगे का रास्ता देख पाते हैं| ये पल(moments) उन कुछ पलों में से एक होते हैं जहां पर आप साफ़ तौर पर समझ जाते हैं कि चीजों को बदलने की जरूरत है| लेकिन जब आप निचले स्तरों पर होते हैं तो आपकी स्मृति(memory) पर धुंध छा जाती है|

हमें सचेत होकर लगातार उन्हीं स्रोतों(sources) पर लौटने की जरूरत होती है जोकि अगले चरण को पूरा करने में हमारी मदद कर सकते हैं| हरेक चरण के लिए अलग समाधानों की जरूरत होती है| मुझे याद है कि जब मैं ‘निष्पक्षता’ से ‘तत्परता’ के स्तर पर जा रहा था, तो मैं लगभग हर रोज ही टाईम-मैनेजमेंट के बारे में पढ़ा करता था| मैं ऐसे स्रोतों में, जोकि उन व्यक्तियों द्वारा बनाए गए थे जोकि ‘तत्परता’ के स्तर पर थे, खुद को पूरी तरह से डुबो लेता था और ऐसा तब तक चलता रहा जब तक कि मैं ‘तत्परता’ के स्तर पर नहीं पहुँच गया| लेकिन टाईम-मैनेजमेंट पर एक किताब, उस व्यक्ति के लिए जोकि ‘अभिमान’ के स्तर पर हो, किसी काम की नहीं होगी, वे तो बचाव की मुद्रा में आकर इस पूरी धारणा को ही सिरे से खारिज कर देंगे| और ‘शान्ति’ के स्तर पर स्थित व्यक्तियों के लिए टाईम-मैनेजमेंट का कोई अर्थ नहीं होता| हालाँकि आप, बुनियादी स्तरों पर महारत हासिल किए बिना उच्च स्तरों पर नहीं पहुँच सकते| यीशु एक बढ़ई(carpenter) थे| गाँधी एक वकील थे| बुद्ध एक राजकुमार थे| हम सभी को कहीं न कहीं से शुरुआत करनी ही पड़ती है|

इस अनुक्रम(hierarchy) पर ज़रा खुले दिमाग से गौर कीजिए और विचार कीजिए कि इससे आपको अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए, एक नयी अंतर्दृष्टि(insight) हासिल करने में, कैसे मदद मिल सकती है| कोई भी स्तर, किसी भी दूसरे स्तर की तुलना में, सही या गलत नहीं होता| अपने अहम्(ego) को ‘किसी एक ख़ास स्तर पर होने के विचार’ में मत उलझने दीजिए, बशर्ते आप ‘अभिमान’ के स्तर पर न हों|

[यह article आपको कैसा लगा, कृपया comments के जरिए इस पर अपनी राय जाहिर करें, अगर आपके पास कोई जानकारी या सुझाव हो तो आप उसे 3kbiblog@gmail.com पर भेज कर हमारे साथ share कर सकते हैं | ]

नए लेख ई-मेल से प्राप्त करें : 


कुछ सम्बंधित लेख :

7 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति,
    जारी रहिये,
    बधाई !!

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut bahut aabhaar is lekh ke liye,,,kripyaa naye naye lekho se humaraa parichay karwaate rahe,,,,,god bless u

    उत्तर देंहटाएं
  3. आदरणीय शतीसजी,
    आपका ब्लॉग देखा मुझे बहुत पसंद आया। सभी लेख आकर्षक व भावपूर्ण हैं। मेरे ब्लॉग पर टिप्पणी करने के लिए आपका अत्यंत आभारी हूँ।
    अनुराग चौधरी http://centurionblogger.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. धनवाद, अनुराग जी|
      इस ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है |

      हटाएं

इस लेख पर अपनी राय जाहिर करने के लिए आपका धन्यवाद|