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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: शुक्रवार, 21 नवंबर 2014

आपको कभी भी नौकरी क्यों नहीं करनी चाहिए – दस कारण

(Original Post : 10 Reasons You Should Never Get a Job, July 21st, 2006 by Steve Pavlina)

अभी कुछ समय पहले मैंने यूं ही मजे के लिए एरिन से पूछ लिया, “अब जबकि बच्चे भी स्कूल जाने लगे हैं, तुम्हें नहीं लगता कि अब तुम्हें बाहर जाकर अपने लिए एक नौकरी ढूंढनी चाहिए? तुम इतने समय से बेरोजगार हो, यह मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता|”   

वह मुस्कुराई और बोली, “वाकई| मुझे नौकरी छोड़े हुए इतना लंबा वक्त हो गया| लेकिन अजीब बात है कि यह मुझे पसंद है!”

हममें से किसी के पास भी 90 के दशक से कोई नौकरी नहीं है(मैंने पहली और आखिरी बार 1992 में नौकरी की थी), इसलिए हम काफी लम्बे समय से सेल्फ-एम्प्लोयेड(self-employed) हैं| हमारे घर में तो अक्सर यह मजाक चलता रहता है जिसमें हम एक-दूसरे से कहते रहते हैं, “आवारागर्दी बहुत हो गयी, अब जाओ और अपने लिए एक नौकरी ढूंढो!”

यह ‘थ्री स्टूजिस’ के एक दृश्य की तरह हैं जहां पर मोए, कर्ली से एक नौकरी करने के लिए कहता है और कर्ली कुछ इस तरह से वापस जवाब देता है, “नहीं, कृपया करके यह नहीं! और कुछ भी चलेगा बस यह नहीं!”

यह एक मजेदार बात है कि जब लोग एक खास उम्र पर पहुँचते हैं, जैसे कि कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद, वे यह मान लेते हैं कि अब, बाहर निकलकर अपने लिए एक नौकरी तलाश करने का वक्त आ गया है| लेकिन, उन बहुत सी चीजों की तरह जिन्हें लोग करते हैं, ऐसा करना और यह मान लेना कि यही करना सही है कोई अच्छा विचार नहीं है| वास्तव में, अगर आप सामान्य(reasonably) रूप से एक समझदार व्यक्ति हैं, तो नौकरी हासिल करना, अपना जीवन-यापन(support yourself) करने के लिए किए जाने वाले उपायों में से सबसे बुरा उपाय है| अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए, खुद को बंधुआ-मजदूर(indentured servitude) बनाकर, बेचने के अलावा और कहीं बेहतर तरीके मौजूद हैं|

Last Modified: शुक्रवार, 13 जून 2014

मुनाफा सबसे अहम् नहीं होता

(Original Post : Never Put Profits First, December 21st, 2013, by Steve Pavlina)

बिजनेस के किताबों से जो विचार मैंने सीखे, उनमें से ज्यादातर बेकार थे| बाकी तो बेहद नुकसानदेह थे| सहज-ज्ञान और प्रयोग ही सबसे बेहतर गाईड(Guide) साबित हुए |

सबसे पहली बात, जिस पर बिजनेस की किताबें इतना जोर देती है वह यह है कि बिजनेस चलाने का मकसद मुनाफ़ा कमाना और उसे बढ़ाना होता है| कुछ किताबें तो इस बात पर इस तरह से अड़ जाती हैं, जैसेकि अगर आप यह बात नहीं मानते तो दुनिया में आपसे बड़ा बेवकूफ और कोई नहीं होगा| मैंने पाया है कि इस मॉडल(model) के अनुसार चलने पर, मेरे निर्णय और नतीजे सबसे ज्यादा मूर्खतापूर्ण होते हैं|

कल, मैं ऐसी ही एक किताब को उलट-पलट कर देख रहा था जोकि किसी ने मुझे डाक(mail) से भेजी थी| वह किताब अब कूड़ेदान में है| यह अब गत्ते का डिब्बा बनाने के काम में आएगी, जोकि हम सभी के लिए कहीं ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक(healthier) रहेगा, बजाए इसके कि कोई दूसरा व्यक्ति इसे पढने लगे|

जैसे ही आप एक ऐसे ऑफिस में प्रवेश(walk) करते हैं जहां पर मुनाफे को सबसे अहम् माना जाता है, तो आपके नाक विषाद(oppression) से भर जाती है| यकीन नही होता कि इंसान कैसे गुलामी को इस तरह से स्वीकार कर सकते हैं| मुझे ऐसी जगहों पर जाने से डर लगता है जहां पर हर कोई मुर्दों की तरह बर्ताव करता है| यह लहर बेहद अनोखे ढंग से खौफनाक होती है| कोई हैरानी की बात नहीं कि कार्टेल का बिजनेस इतना फल-फूल रहा है| अगर मुझे भी अपनी जिन्दगी के कई साल कैबिन में गुजारने होते, तो शायद मुझे भी रोज नशे की खुराक की जरुरत पड़ती|