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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: शुक्रवार, 13 जून 2014

मुनाफा सबसे अहम् नहीं होता

(Original Post : Never Put Profits First, December 21st, 2013, by Steve Pavlina)

बिजनेस के किताबों से जो विचार मैंने सीखे, उनमें से ज्यादातर बेकार थे| बाकी तो बेहद नुकसानदेह थे| सहज-ज्ञान और प्रयोग ही सबसे बेहतर गाईड(Guide) साबित हुए |

सबसे पहली बात, जिस पर बिजनेस की किताबें इतना जोर देती है वह यह है कि बिजनेस चलाने का मकसद मुनाफ़ा कमाना और उसे बढ़ाना होता है| कुछ किताबें तो इस बात पर इस तरह से अड़ जाती हैं, जैसेकि अगर आप यह बात नहीं मानते तो दुनिया में आपसे बड़ा बेवकूफ और कोई नहीं होगा| मैंने पाया है कि इस मॉडल(model) के अनुसार चलने पर, मेरे निर्णय और नतीजे सबसे ज्यादा मूर्खतापूर्ण होते हैं|

कल, मैं ऐसी ही एक किताब को उलट-पलट कर देख रहा था जोकि किसी ने मुझे डाक(mail) से भेजी थी| वह किताब अब कूड़ेदान में है| यह अब गत्ते का डिब्बा बनाने के काम में आएगी, जोकि हम सभी के लिए कहीं ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक(healthier) रहेगा, बजाए इसके कि कोई दूसरा व्यक्ति इसे पढने लगे|

जैसे ही आप एक ऐसे ऑफिस में प्रवेश(walk) करते हैं जहां पर मुनाफे को सबसे अहम् माना जाता है, तो आपके नाक विषाद(oppression) से भर जाती है| यकीन नही होता कि इंसान कैसे गुलामी को इस तरह से स्वीकार कर सकते हैं| मुझे ऐसी जगहों पर जाने से डर लगता है जहां पर हर कोई मुर्दों की तरह बर्ताव करता है| यह लहर बेहद अनोखे ढंग से खौफनाक होती है| कोई हैरानी की बात नहीं कि कार्टेल का बिजनेस इतना फल-फूल रहा है| अगर मुझे भी अपनी जिन्दगी के कई साल कैबिन में गुजारने होते, तो शायद मुझे भी रोज नशे की खुराक की जरुरत पड़ती|

‘मुनाफे को सबसे ज्यादा अहमियत देना’ एक कमाल की मानसिकता है अगर आप अपनी सेहत, आत्म-सम्मान, प्रेरणा, और संबंधों को नष्ट करना चाहते हैं| मैं तो कभी भी ऐसी एक जगह पर काम करना पसंद नहीं करूंगा, और न ही मैं दूसरों को ऐसे वातावरण में काम करने के लिए कहूँगा| लोग, एक मशीन की सेवा में लगे पूर्जों(cogs) से, कहीं बेहतर बर्ताव के लायक होते हैं|

एक बिजनेस के लिए, कहीं बेहतर सशक्त प्राथमिकताएँ (empowering priorities) होती हैं| फिर तो बेशक आप ज्यादा रोचक प्राथमिकताएं जैसेकि – ‘पिछले साल हमने जितना किया, चलिए इस साल उससे कहीं बड़ा करते हैं’, तय कर सकते हैं|   

मैं तो इसे पसंद करूंगा :


बिजनेस का उद्देश्य, लोगों को सशक्त(empower) बनाना होता है ताकि वे खुद को और अपनी रचनात्मकता को दूसरों के साथ इस तरह से बाँट सकें कि सबका भला हो सके|

यह मानना कि मुनाफे को सबसे ज्यादा अहमियत नहीं देने पर आप एक कामयाब बिजनेस नहीं कर सकते, बेतुकी बात ही है| मेरा अनुभव के मुताबिक़ कामयाबी हासिल करना तब बेहद आसन हो जाता है जब आप, ‘मुनाफा-सबसे अहम्’ के नजरिए को अपनाकर, अपमानित महसूस करने से इनकार कर देते हैं|    

मुनाफे को सबसे ज्यादा अहमियत देने के बजाय, रचनात्मक चुनौतियों को सबसे ज्यादा अहमियत दीजिए| विकास और अनुभव को सबसे ज्यादा अहमियत दीजिए| खुशी को सबसे ज्यादा अहमियत दीजिए| दिलचस्प लोगों के साथ काम करने को सबसे ज्यादा अहमियत दीजिए| समाज में अपने योगदान को सबसे ज्यादा अहमियत दीजिए|

मुझे अपना बिजनेस चलाने से प्यार है – बहुत ज्यादा – क्योंकि मैं पैसे को सबसे अहम् नहीं मानता| बेशक पैसे का अपना महत्व है, लेकिन इसका स्थान सबसे सबसे ऊपर नहीं होता, बिलकुल भी नहीं|

मैं लगभग 20 वर्षों से एक इंटरप्रेन्योर(entrepreneur(self-employed)) हूँ| वे साल, जब मैं पैसे को सबसे अहम् मानता था मेरे जीवन के सबसे तनावपूर्ण और तकलीफदेह साल रहे| और जब मैंने अपनी रचनात्मकता को बाहर आने दिया, अपने रिश्तों को बेहतर बनाया, दिलचस्प प्रोजेक्ट्स में दूसरों के साथ सहयोग किया, अपना योगदान दिया, उम्मीद से ज्यादा दिया, खुद को बेहतर बनाने के लिए कोशिश की, वे वर्ष थे जब मैं सबसे ज्यादा खुश और संतुष्ट रहा|

समय का इतना लंबा अंतराल, मुझे यह देखने में मदद करता है कि अगर मैंने अपने लिए तनावपूर्ण और तकलीफदेह वर्षों का निर्माण किया होता तो आखिरकार मैं, कई दशकों(decades) की इस तरह की यादों का, एक पुलिंदा(bundle) बनकर रह जाता, और इसका अर्थ यह है कि अपने बुढापे के सालों में, मैं इस बात को लेकर कडवाहट से भर जाता कि आखिरकार मैंने अपना जीवन इसे तरह से क्यों गुजारा| सौभाग्य से मुझे लगता है कि इससे पहले कि बीमारी ज्यादा बढ़ती, मैंने समस्या का इलाज उसकी शुरुआती अवस्था में ही कर दिया, इसलिए अब सबकुछ उलटा ही हो रहा है| जैसे-जैसे मैं बुढापे की ओर बढ़ रहा हूँ मेरी खुशी बढ़ती ही जा रही है क्योंकि मैं साल-दर-साल, खुशनुमा यादों की परते अपनी याददाश्त(memory) में जमा करता जा रहा हूँ| बिना इस बात कि परवाह किए कि मैं कितना पैसा कमा रहा हूँ या फिर नहीं कमा रहा, मुझे दिलचस्प प्रोजेक्ट्स याद है, रचनात्मक प्रवाह याद है, गहरी दोस्ती याद है, सहयोगी याद हैं, दिल छु लेने वाला अभिनंदन याद है, वे लोग याद हैं जिनकी मैंने मदद की, और भी बहुत कुछ| हाँ, बस मुझे सिर्फ यह याद नहीं है कि मेरा बैंक बैलेंस उन दिनों कैसा नजर आता था|   


अपनी रचनात्मकता का इस्तेमाल करके धन कमाना बहुत अच्छा विचार है| और इसे चुनौती का एक हिस्सा रहने दें| लेकिन इसे अपने काम का केंद्रीय उद्देश्य(central purpose) न बनाएं| सिर्फ पैसा कमाने के लिए उन चीजों को, जिन्हें करने के लिए आप खुद को प्रेरित नहीं कर पाते, न करें| अपने हृदय(heart) द्वारा दिखाए रास्ते पर चलना ही हमेशा बेहतर होता है, तब भी जब ऐसा करने का मतलब, अपने मकान से बाहर निकाल दिया जाना ही क्यों न हो - क्योंकि आप अपना किराया नहीं चुका सकते| मैं(steve pavlina) आपसे ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मुझे भी एक बार ऐसे ही अनुभव से गुजरना पड़ा था| उस वक्त बेशक यह बड़ा तनावपूर्ण था, लेकिन अब जबकि वह वक्त मेरी याददाश्त का एक हिस्सा बन चुका है, मुझे इस पर गर्व है, मैं इसे दूसरों को प्रेरित करना वाली एक कहानी के तौर पर याद करता हूँ कि आपको मुर्दों की तरह जीवन गुजारने पर समझौता नहीं करना चाहिए|
 
अपने ह्रदय(heart) को सही लगने वाले रास्ते को चुनिए, खासकर कि बिजनेस में| वह काम कीजिए जिसे करना आपको गौरवशाली और संतुष्ट बनाता है, और फिर आप जीवन के हरेक साल को गहरी संतुष्टी से भर देंगे, बिना इस बात कि परवाह किए कि आप कितना पैसा कमा रहे हैं| अगर आप अपने अंदर की आवाज पर भरोसा करें, प्रेरणा पर काम करें, अनुभव और सकारात्मक रिश्ते बनाने के लिए अपना समय दें, तो आज नहीं तो कल कामयाबी आपके कदम चूमेगी|  


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