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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: रविवार, 13 नवंबर 2016

कबीर दास के दोहे(भाग-1)

(Quotes from Sant Kabir Das with meaning in Hindi - Part1)
दुख में सुमिरन सब करे, सुख मे करे न कोय ।
जो सुख मे सुमिरन करे, दुख काहे को होय ।

दोहे का अर्थ : दुःख-तकलीफ में तो सभी भगवान् को याद करते हैं, सुख में कोई उसे याद नहीं करता, जो व्यक्ति सुख में भी भगवान् को याद रखता है उसे फिर कोई भी दुःख-दर्द नहीं सता सकता|

तिनका कबहुँ ना निंदिये, जो पाँव तले होय ।
कबहुँ उड़ आँखो पड़े, पीर घानेरी होय । 

दोहे का अर्थ : उस तिनके कोई छोटा मत समझिये जो कि पैरों तले दबा होता है, क्योंकि जब हवा चलने पर वही तिनका आँखों में पड़ जाता है तो बड़ी तकलीफ देता है| अर्थात अपने से छोटे जीव का कभी तिरस्कार मत कीजिए|

साईं इतना दीजिये, जा मे कुटुम समाय ।
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु ना भूखा जाय ।

दोहे का अर्थ : हे प्रभु मुझे इतना दीजिये कि मेरे परिवार का पेट भर जाए, न तो मैं ही भूखा रहूँ और ना ही मेरे घर में आने वाला कोई मेहमान ही भूखा जाए |

जाति न पूछो साधु की, पूछी लीजिए ज्ञान ।
मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान ।

दोहे का अर्थ : बुद्धिमान पुरुष से उसकी जाति मत पूछिए, उससे उसका ज्ञान पूछिए| तलवार का मूल्य कीजिये और म्यान(तलवार रखने का खोल) को पडी रहने दीजिये|  

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय ।
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय ।

दोहे का अर्थ : हे मन, जरा धीरज रखो, सब काम धीरे-धीरे ही होते हैं| माली चाहे सौ घड़े पानी ही सिंचाई क्यों न कर ले, पेड पर फल तो मौसम के आने पर ही लगेंगे|  

पाँच पहर धंधे गया, तीन पहर गया सोय ।
एक पहर हरि नाम बिन, मुक्ति कैसे होय ।


दोहे का अर्थ : पांच पहर काम पर गए, तीन पहर नींद में बिताए, आखिरी एक पहर में भी भगवान् को याद नहीं किया, अब आप ही बताईये कि मुक्ति कैसे मिलेगी|
*(पहर = 2.5-3 hours time)

शीलवंत सबसे बड़ा, सब रतनन की खान ।
तीन लोक की संपदा, रही शील में आन ।

दोहे का अर्थ : जीवन में विनम्रता सबसे बड़ा गुण होता है, यह सब गुणों की खान है| सारे जहां की दौलत होने के बाद भी सम्मान, विनम्रता से ही मिलता है|

माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर ।
आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर ।

दोहे का अर्थ : ना तो धन-दौलत मरी और न ही मन, शरीर मरते रहे| न तो उम्मीद मरी और न ही लालच, कबीर दास कहते हुए चले गए|

माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रोंदे मोय ।
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौदूंगी तोय ।

दोहे का अर्थ : मिट्टी, कुम्हार से कहती है, कि आज तू मुझे पैरों तले रोंद (कुचल) रहा है| एक दिन ऐसा भी आएगा कि मैं तुझे पैरों तले रोंद दूँगी|

रात गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय ।
हीना जन्म अनमोल था, कोड़ी बदले जाय । 

दोहे का अर्थ : कबीर जी कहते हैं कि रात सो कर गवां दी, और दिन खाने-पीने में गुजार दिया| हीरे जैसा अनमोल जीवन, बस यूं ही व्यर्थ गवां दिया|

जो तोकु कांटा बुवे, ताहि बोय तू फूल ।
तोकू फूल के फूल है, बाकू है त्रिशूल ।

दोहे का अर्थ : जो व्यक्ति आपके लिए कांटे बोता है, आप उसके लिए फूल बोइये| आपके आस-पास फूल ही फूल खिलेंगे जबकि वह व्यक्ति काँटों में घिर जाएगा|

आय हैं सो जाएँगे, राजा रंक फकीर ।
एक सिंहासन चढ़ी चले, एक बँधे जात जंजीर ।

दोहे का अर्थ : जो भी व्यक्ति इस संसार में आता है चाहे वह अमीर हो या फिर गरीब हो वह आखिरकार, इस दुनिया से चला जाता है| एक व्यक्ति को धन-दौलत मिलती है जबकि दूसरा जात-पात की जंजीरों में जकड़ा रहता है|  

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