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आज का विचार

आज का विचार (Thought of the Day in Hindi): (Subscribe by e-mail)

Last Modified: सोमवार, 31 अगस्त 2015

जीवन में पीछे छूटने पर वापसी कैसे करें?


बचपन में, मैं साइकिल चलाना सीखना चाहता था लेकिन इसमें मुझे उम्मीद से ज्यादा वक्त लग रहा था| मैं हमेशा साईकल के दोनों तरफ supporting wheels लगा कर ही इसे चला पाता था और ज्यादा practice भी नहीं करता था, इसलिए मैं साईकल को बैलेंस करना नहीं सीख पा रहा था|

एक दिन मैंने देखा कि मेरी छोटी बहन (जोकि मुझसे ढाई साल छोटी थी) साईकल चलाना सीखने लगी है| अभी भी उसे ठीक से इसे चलाना नहीं आता था लेकिन वह इसे, मुझसे बेहतर तरीके से balance कर पा रही थी| यह विचार, कि वह मुझे हरा देगी, मेरे लिए हजम करना मुश्किल था!

इसलिए मैंने अपनी साईकल उठाई और इसे सड़क पर उतार दिया, मैंने ठान लिया था कि चाहे जो हो जाए मुझे ‘आज और अभी’ इसे चलाना सीखना है| मैंने, अपनी साईकल में supporting wheels लगाए और फिर पागलों की तरह इसे चलाने लगा| जितना संभव था, मैंने सड़क के किनारे उगी हुई घास के करीब रहने की कोशिश की ताकि अगर मैं गिरूँ भी तो मुझे ज्यादा चोट न लगे|

कई बार चलाने और रुकने के बाद आखिरकार मुझे साईकल को बैलेंस करना आ गया| फिर तो जैसे मुझे पंख लग गए| मैंने उन गर्मियों में काफी साईकल चलाई और फिर मैंने हमेशा के लिए इसे चलाना सीख लिया|
उस वक्त तक मुझे लगता था कि साईकल चलना सीखना बहुत मुश्किल काम है| यह डरावनी और सुन्न कर देने वाली चीज थी| मुझे गिरने से बहुत डर लगता था| लेकिन एक बार मैंने डर का सामना करने और तकलीफ झेलने की हिम्मत जुटा ली, तो मैं बड़ी तेजी से दूसरी तरफ पहुँच गया और मैंने इस नए हुनर को सीख लिया| फैसला लेने और साईकल चलाने के बुनियादी हुनर को सीखने में मुझे केवल एक घंटे का वक्त लगा|